January 11, 2010

'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'


'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'
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जुर्म   -ए-तमन्ना की सज़ा

यूँ मिला करती है मुझे ,

खिंचती हैं रंगे पलकों की,

जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,

सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,

नक्श ज़हन में उभरने लगते हैं,

परत दर परत उघड़ती हैं सब यादें,

होने लगती है...

मेरे सब्र की आज़माईश!

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से
सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
--------------

[लिखित -अल्पना वर्मा],[चित्र साभार-श्री देव प्रकाश जी]
कुछ उर्दू शब्दों के अर्थ
फसाना=कहानी, शब=रात,कफस=पिंजरा,पशेमान=शर्मिंदा ,सबा=हवा,कज़ा=मौत



एक ग़ज़ल
--------



फिल्म-शगुन,गीत -साहिर लुधियानवी,संगीतकार -ख़ैयाम,
मूल गायिका -जगजीत कौर,picturised on Nivedita
'तुम अपना रंजोग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो,
तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो'
[कवर वर्षन- स्वर--अल्पना]
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64 comments:

Arvind Mishra said...

खूबसूरत कविता और अंदाजे बया ,सुमधुर गीत भी -शुक्रिया ! कुछ उर्दू शब्दों की हिन्दी भी दे दें तो बहुतों का भला हो जायेगा ! मुझे ही कुछ शब्दों को लेकर अक्सर अर्थ का अनर्थ जैसा भ्रम हो जाता है और कविता की सहज प्रवाहमयी समझ बाधित हो जाती है .

Udan Tashtari said...

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,

आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!


-आह!! वाह...बहुत सुन्दर और अन्त में जो गज़ल लगा दी...क्या कहने!!

seema gupta said...

आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
" चैन मिले न मिले और मिले भी तो कजा की आगोश में , बेहतरीन इन पंक्तियों में एक कशिश है...कई बार पढ़ते रहे...."

regards

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर रचना. आभार.

डॉ. मनोज मिश्र said...

""सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,
नक्श ज़हन में उभरने लगते हैं,
परत दर परत उघड़ती हैं सब यादें,
होने लगती है...
मेरे सब्र की आज़माईश!
बह जाएँ अश्क
तो कुछ सुकून मिले,""
गहन भावों से घनीभूत लाइनें ,बेहद उम्दा,बेहद खूबसूरत.

बूझो तो जानें said...

Bahut hi sundar rachna. Padkar accha laga.

तनु श्री said...

मुझे दोनों बहुत अच्छे लगे आपकी लेखनी और आपकी आवाज.

ताऊ रामपुरिया said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!


सुंदरतम रचना, उर्दू शब्दों के मायने लगा कर इसका अर्थ सभी के लिये समझना आसान होगया है जिससे रचना की खूबसूरती और बढ गई है.

गीत बेहद कर्णप्रिय और मधुर है. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

महफूज़ अली said...

सुंदर अभिव्यक्ति के साथ ...बहुत सुंदर रचना....

ललित शर्मा said...

खिंचती हैं रंगे पलकों की,
जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,

वाह! बेहतरीन

sada said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

दिगम्बर नासवा said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं...

उमड़ते हुवे जज्बातों की बेहतरीन दास्तान ........... लफ़्ज़ों को हगरे एहसास में पिरोया है आपने ....... सच है शब-ए-गम में अश्क बह नही पाते और जब दर्द की इंतेहा हो जाती है कज़ा के बाद ही चैन आता है ........... बहुत ही बेहतरीन नज़म ......
आपकी गायी हुई ग़ज़ल भी कमाल की है ......

मीत said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!
मेम बहुत सुंदर लिखा है...
यह गीत मुझे बहुत पसंद है...
क्या आप बता सकती हैं जिस पर यह फिल्माया गया है वह कलाकार कौन है...
मीत

psingh said...

अल्पना जी
रचना तो निसंदेह अच्छी है
लेकिन आपकी आवाज़ तो बहुत अच्छी है
शुक्रिया कुबूल करें

मीत said...

मेम यह लिंक चेक कीजिये

http://www.archive.org/details/TumApnaRanjoGhamByAlpana


मीत

मीत said...

मेम एक बात और आपकी आवाज में तो यह गीत मैंने डाउनलोड कर लिया क्या आप मुझे इसका वास्तविक एम् पी३ (जगजीत कौर की आवाज वाला) भेज सकती हैं...
अगर हाँ तो भेज दीजिये न...

रश्मि प्रभा... said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!
.......kya baat hai !
tum apna ranzo gum apni pareshani mujhe de do

रश्मि प्रभा... said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!
.......kya baat hai !
tum apna ranzo gum apni pareshani mujhe de do

वन्दना अवस्थी दुबे said...

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
बहुत खूब. और आपकी आवाज़ में ये गज़ल, सुभानल्लाह.

रंजना said...

BAS......WAAH....WAAH....AUR WAAH....

अल्पना वर्मा said...

@Arvind ji,urdu Shbdon ke arth de diye gaye hain.
Shukriya is sujhhav ke liye.
...........................
@Meet,aap ne jo jaankari chahi hai us ke saath Song details update kar diya hai.
-Archive site ka link hi is player code mein lagaya hai.:)
Abhaar.

रचना दीक्षित said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुती एक एक शब्द एक एक पंक्ति मुखर हो उठी है आपकी कलम का साथ पा कर

मोहन वशिष्‍ठ 9988097449 said...

bahut sunder rachna alpna ji behatrin barambar badhayi maaf karna english me likhna pad raha hai jald hi hindi me chalu hote hi apne pyare blogjagat me wapas lautunga aap sabhi ka aashirwad aur pyar ki darkar

अमिताभ श्रीवास्तव said...

mujhe esa lagtaa he ki- मेरे सब्र की आज़माईश!
yahi to vo mool tatv he jisake kaaran itani behatreen rachna banaai gai.yaa yah bhi kah saktaa hoo, isi ek baat ne marm ki peedaa ko darshayaa he. bahut khoob rachna he.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

परत दर परत उघड़ती हैं सब यादें,

होने लगती है...

मेरे सब्र की आज़माईश!....बेहद बेहतरीन लिखा है ..एहसासों को लफ़्ज़ों का जामा पहना दिया है ...

BrijmohanShrivastava said...

शीर्षक के अनुसार गम की "रात " का जिक्र नही आ पाया है और आपकी आखिरी चार लाइनों पर बहुत पुराना शेर याद आया ""यू तो घबराके वो कह देते है कि मर जायेंगे /मर कर भी चैन न पाया तो कहां जायेगे ? ""उक्त शेर मे जो भी कहा गया हो ,मगर हवा के माध्यम से आपने जो संदेश देना चाहा है ,हकीकत यही है कि मौत की आगोश मे ही चैन मिलता है ।

अल्पना वर्मा said...

@ Respected Brij Sir,
ग़म के स्याह अंधेरो में डूबे व्यक्ति के लिए दिन भी 'ना ख़तम होने वाली रात 'ही है..यही सोच कर यह शीर्षक रखा था..
एक और शीर्षक सोचा था...'राह-ए -फ़ना की ओर'..फिर यह 'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'
ज़्यादा सटीक लगा..

नीरज गोस्वामी said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

वाह वाह...अब ऐसी कमाल की रचना के लिए सिवा वाह वाह के और क्या कहूँ ...और आपने तुम अपना रंजो गम सुना कर मन विभोर कर दिया...
नीरज

"अर्श" said...

रचना बेहद खुबसूरत बेहद ....और निचे आकर और मजा आगया
आपकी खुबसूरत आवाज़ में आपको सुनना ... तुम अपना ...

बधाई कुबुलें...

अर्श

योगेश स्वप्न said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!

YADON KE ZAKHM JISKE PAS HAIN WO YAHI TO KAHEGA , BAHUT SHAANDAAR ABHIVYAKTI HAI ALPANA JI, GEET SUNTA HUN. BADHAAI.

Kishore Choudhary said...

बाद मुद्दत के आपकी एंट्री बहुत अद्भुत हुई है. गीत मेरी पसंद का है और हमेशा रहेगा. आप जो लिखती हैं वो सबसे हट के होता है, कहिये किस बात की तारीफ की जाये ?

हरकीरत ' हीर' said...

जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,
सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,
नक्श ज़हन में उभरने लगते हैं,
परत दर परत उघड़ती हैं सब यादें,


ओये होए ......!!

अल्पना जी इस बार तो गज़ब ढाया है ......!!

बूझो तो जानें said...

आपकी यह रचना बहुत अच्‍छी लगी । पहले तो समझ मे न आया । पर नीचे लिखे अर्थ के होने से समझ में आ गया । आपका आभार एवं शुभकामनाएं ।

शमीम said...

एक बहुत सुंदर रचना जो अपने में अनेक भाव समेटे हुए है । रचना हेतु बधाई ।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बहुत बढिया लगी ये रचना......साथ में उर्दू शब्दों के दिए अर्थ के कारण भाव अच्छे से समझ में आ गए...
गीत भी बेहद कर्णप्रिय लगा.......
आभार्!

दिलीप कवठेकर said...

वाकई में इस बार की गज़ल बडी गहराई लिये हुए है.

बस यही कहा जा सकता है कि सब्र ही एक मात्र रास्ता है.

आपका गीत हमेशा की तरह बढियां रहा. इन अलग सी आवाज़ों पर आपकी आवाज़ सूट भी करती है. अब भावों का भी प्रादुर्भाव हो गया है, जो गज़ल की रूह को छू ले जाती है.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

अल्पना जी, आदाब.
जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,
सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,
खूबसूरत नज्म की यादगार पंक्ति है..
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

Apoorv said...

बेहद दिलकश नज़्म..अपने साथ बहाती से ले जाती है किसी अनजान किनारे पर..जुर्मे-तमन्ना की यह नाउम्मीदी ही सबसे बड़ी सज़ा होती है..और अश्कों का थक कर आँखों मे ही सो जाना....क्या कहूँ!!!!!

मो सम कौन ? said...

अल्पना जी, ताऊ रामपुरिया की पहेलियों पर आपके द्वारा प्रदत्त सारगर्भित जानकारियों से प्रभावित होकर आपका भारत दर्शन ब्लोग देखा और यकीन मनिये नेट पर समय बिताना सफ़ल हो गया। घर बैठे-बैठे अपने देश की जानकारी इतने रोचक ढंग से प्राप्त हुई कि सच में अभिभूत हूं। कभी-कभी लगता है कि कुछ लोग असाधारण रूप से प्रतिभासंपन्न हैं और आप उनमें से एक हैं। आप बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। कामना है आप इसी ऊर्जा से अपना काम करती रहें।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर रचना, धन्यवाद

मनोज कुमार said...

कविता इतनी मार्मिक है कि सीधे दिल तक उतर आती है।

हास्यफुहार said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!
बहुत बढिया लगी ये रचना.

पी.सी.गोदियाल said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

अति सुन्दर !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आपके स्वरों में कुछ बात है।
और हाँ. इतनी क्लिष्ट उर्दू, आजकल सीख रही हैं क्या?
--------
अपना ब्लॉग सबसे बढ़िया, बाकी चूल्हे-भाड़ में।
ब्लॉगिंग की ताकत को Science Reporter ने भी स्वीकारा।

सुशील कुमार छौक्कर said...

आपके ब्लोग पर आकर दो दो चीजें मिल जाती है एक बढिया सुन्दर रचना और एक प्यारा गीत आपकी आवाज में। और आपकी पोस्ट लगते ही दोडे चले आते है वैसे आजकल देरी हो रही है। हमेशा की तरह आज की पोस्ट भी पसंद आई।
बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

बहुत खूब। वैसे ये सच है कि रोने से सुकून तो मिलता ही।

अभिषेक प्रसाद 'अवि' said...

jab bhi dil pareshaan hota hai... kya kahun kambakht aankh humesha nam hota hai... rona to achhi baat hai... mann ki aur tan ki dono gandgi bahar nikal jati hai... adbhutaas rachna...

मोहसिन said...

Bahut hi sundar rachna . Shubhkamnay

सुलभ 'सतरंगी' said...

बस खामोश कर दिया आपने.

अश्क पशेमाँ है
बह जाए तो कुछ सुकून मिले,
सुबक़ते हैं पर
आँखों में ही सो जाते हैं!

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!

सुलभ 'सतरंगी' said...

"तुम अपना रंजोग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो,.."

क्या खूब संगीतमय स्वर बाँधा है...

- सुलभ

डॉ .अनुराग said...

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!


arse baad is mood me najar aayi......albatta is mood me kuch aor der rahe to behtar ho.....

Harsh said...

bahut sundar alpna ji.....

संजय भास्कर said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुती एक एक शब्द एक एक पंक्ति मुखर हो उठी है आपकी कलम का साथ पा कर

MUFLIS said...

aapki pur-kashish aawaaz mei
bahut hi khoobsurat geet sun`ne ko milaa....its one of my favourites..
thanks .
nazm mei mn ke khayaalaat
khud ubhar rahe haiN..
padhne se sukoon miltaa hai.

सुनीता शानू said...

किसे बहुत सुन्दर कहें आपकी रचना या यह ग़ज़ल!
शुक्रिया अल्पना जी...
तुम अपना रंजोग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो,
तुम्‍हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो'

श्रद्धा जैन said...

होने लगती है...

मेरे सब्र की आज़माईश!

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

bahut khoobsurat nazm

Rajey Sha said...

ख्‍यालों का बहुत ही खूबसूरत प्रवाह देखने को मि‍ला, बेहतर रचना के लि‍ये बधाई स्‍वीकारें।

RAJ SINH said...

गज़ब की कशिश लिए बेहतरीन नज़्म .......और जगजीत कौर की आवाज़ को हूबहू ढाल दिया आपने अपने गाने में .

ज्योति सिंह said...

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,

आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
waah kya baat hai ,is baar andaaj kuchh naye hi hai ,kafi pasand aayi dono cheeje .

गौतम राजरिशी said...

विलंब से आ रहा हूँ मैम.....इस खूबसूरत नज़्म से वंचित ही रह जाता

"बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से सुबक़ते हैं
और आँखों में ही सो जाते हैं"

...बहुत सुंदर पंक्तियाँ!

Mrs. Asha Joglekar said...

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
ये तो आशा से भरपूर है पर
कज़ा के आगोश में चैन आ भी जाये तो क्या । चैन तो अभी चाहिये Right now in cash !

kshama said...

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
Aah ! Kis qadar dard samete hue hai yah rachana!

ह्रदय पुष्प said...

बहुत देर से आया लेकिन शुक्र है आ गया और 'फसाना-ए-शब-ए-ग़म' को पढ़ लिया
"जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,
सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,"
...
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
किस की तारीफ़ करू किसको छोडू? वाह वाह - लाजवाब.

शरद कोकास said...

बहुत सुन्दर ।

vijaymaudgill said...

बस इतना कहूंगा कि पढ़ने के बाद भीतर कुछ हलचल हुई है।