December 29, 2013

नव वर्ष के स्वागत में ..

२०१४ आने वाला है इस अवसर पर सभी को नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ!
नववर्ष के स्वागत हेतु शौपिंग मॉल  में सजावट -
बर्फ का किला -दुबई मॉल में 
मॉल ऑफ़ एमिरेट्स [दुबई ]
अल ऐन मॉल ,अल ऐन
बवादी मॉल ,अल ऐन
ग्लोबल विलेज -दुबई --आज कल बहुत भीड़ नहीं है .दुबई शोपिंग फेस्टिवल २ तारीख से शुरू होगा.
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ग्लोबल विलेज प्रवेश द्वार 
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प्रवेश द्वार 
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भारत का पवेलियन 
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टर्की का पवेलियन 
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भुने हुए भुट्टे और अन्य गिरियाँ 
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भारतीय पवेलियन 
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भारतीय पवेलियन 
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ग्लोबल विलेज-दिसंबर २०१३ 

December 24, 2013

ये ज़िद्दी बच्चे !

ये ज़िद्दी बच्चे !
आम आदमी पार्टी को ‘जिद्दी बच्चों का जमावड़ा’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा.
जिस तरह से उन्होंने एक जिद्द पकड़ कर उसको ही सही ठहराते हुए यहाँ तक पहुँच गए हैं वह काबिले तारीफ़ है. इस सिस्टम में जहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी समाई हुई हैं उस दलदल में पाँव जमा कर खड़े होने का तरीका इन्होने इतनी जल्दी सीख लिया इसकी शाबाशी देना बनता ही है.
अन्ना हजारे के साथ अनशन से पहचान में आये कुछ लोग संगठित हो कर इस तरह से नया रूप लेंगे इसका अंदाजा लोगों को नहीं था सिस्टम से लड़ने की जिद्द को बालहठ  समझ कर लोग इन्हें दुलारते रहे लेकिन ‘आप’ पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल,मनीष सिसोदिया ने जिस तरह से  अपनी दूरदर्शिता दिखाई है जिस तरह अब तक का इनका कार्यक्रम देखा है उससे लगता है की बहुत होमवर्क करके ही यहाँ तक पहुँच पाए हैं.
गूगल इमेज से साभार 

चुनाव के नतीजों  बाद लगा कि दिल्लीवासियों ने लगता है जैसे किसी बंद हुए सर्कस के दरवाज़े खोल दिए हों और सभी को करतब दिखाने  का इंतजाम कर रहे हों .२३ तारीख तक सब मजमा लगाये बातों की चाट परोसे जा रहे थे !
 आम आदमी पार्टी के सामने  बड़ी मुश्किलें थीं...'इधर कुआँ, उधर खाई वाली' स्थिति  !
भारतीय जनता पार्टी ने  विपक्ष में बैठने की बात कह कर पहले ही पल्ला छाड़ लिया और कांग्रेस के साथ मिलकर ‘आप’ को उकसाने लगे कि ये सरकार बनाना नहीं चाहते क्योंकि वादे पूरे नहीं कर सकते .
कांग्रेस ने चतुराई से निर्णय लिया कि 'आप' को समर्थन दे कर जनता के साथ हो जायेंगे कि देखिये हम कितने भले हैं हमारी बुराई करने वालों की सरकार हम बनवा रहे हैं .और उनके इस कदम से उन्हें दोनों तरफ से फायदा होना ही है –एक वह जनता के दिल में जगह बनायेंगे कि हमने आप की पसंद को सरकार बनने में सहायता की और दूसरे यह कि अपनी कट्टर विरोधी ‘ भारतीय जनता पार्टी ‘को कुर्सी से दूर रखा ! अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में टिक जाती है काम करती है तो भी वे जनता के बीच इसी बात को लेकर जायेंगे देखिये हमने आप को पूरा सहयोग दिया इसलिए वे कम कर सके! और अगर आप पार्टी कुछ नहीं कर पाती तब भी ‘कांग्रेस’ को जनता की सहानुभूति मिलेगी कि कांग्रेस ने अपने लिए इतना बुरा भला ‘आप ‘पार्टी से सुना फिर भी बडप्पन दिखाते हुए उन्होंने नए दल को सहयोग दिया अब वे कुछ कर नहीं पाए तो नयी पार्टी की  ख़ामी है कांग्रेस का क्या  दोष! अब इस सारे प्रकरण में नुक्सान बी जे पी का होगा .

नयी पार्टी को तो लोगों ने वैसे भी मौका दिया अगर वे न भी कर पाए तो उन्हें उनकी अनुभवहीनता का सहारा लेकर जनता से राहत मिल सकती है. वैसे भी आप’ के पास खोने को अपना कुछ नहीं है क्योंकि उनके पास जो कुछ है जनता का ही है चुनाव के लिए धन या लड़ने की हिम्मत के लिए जनता का विश्वास !

अब 'आप’ पार्टी एक बड़ी दुविधा से निकल कर तो आयी है मगर उसका यह निर्णय उसे कई सवालों के घेरे में खड़ा करता है ,जैसे  पार्टी का कहना कि वे किसी से समर्थन न लेंगे न देंगे लेकिन उन्होंने समर्थन लिया ...अब जो आंकड़े टी वी पर बताये जा रहे हैं उनके अनुसार जनता के ओपिनियन पोल में भी  दिल्ली की जनता की  २% सहमती ही थी.6 लाख एस एम् एस में से केवल २ लाख दिल्ली की जनता ने दिए थे ! इसी पर एक कार्टून देखें-
गूगल इमेज से साभार 

उस पर आरोप है कि जनता के साथ धोका किया है जिस कोंग्रेस को उन्होंने चोर कहा उसी के सहारे खड़े हो कर वे चलना शुरू कर रहे हैं .ऐसे में यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह सब कोंग्रेस की किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है [जिसे मैं नहीं मानती] .

वैसे लोगों को अब शांत रहकर थोड़े दिन ‘’तमाशा ‘’ देखना चाहिये क्योंकि उन्हें क्या चाहिये वे शायद जानते ही नहीं क्योंकि जब केजरीवाल  अनशन के लिए बैठे सरकार ने सुना नहीं तब सलाह दी कि बिना राजनीति में कूदे  यह लड़ाई जारी नहीं रख  सकते [उन में मैं भी एक थी मैंने भी तब यह पोस्ट लिखी थी ]और ये ही जनता थी जो कहने लगी कि चुनाव लड़ो ..उन सब ने कैसे न कैसे मिलकर लोगों  से सहायता  और अपने बल बूते पर चुनाव लड़ा ..सभी  ये सब एक तमाशे की तरह देख रहे थे ..शीला जी 15 साल से दिल्ली में राज कर रही थीं  वे भी शायद पूरी तरह आश्वस्त थीं कि ये कल के बच्चे कहाँ उनके क्षेत्र में प्रवेश कर पायेंगे. सभी बड़ी पार्टियों ने 'आप’ पार्टी को हलके में ही लिया और जब नतीजे सामने आये तो लोग हैरान रह गए.

बीजेपी को जो सीटें मिलीं उसमें  मोदी जी के प्रभाव का ही हाथ है वरना उन्हें ये भी न मिली होतीं क्योंकि उनके कार्यकर्ता आम आदमी के पास जाते नहीं हैं [सुना है उनका काम प्रभावी  भी नहीं था] और उसी पुराने तरीके से चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाये हुए हैं .मेरे विचार में उन्हें अगर लोकसभा में जीतना है तो जनता के बीच जाएँ उन्हें अपने विश्वास में लें .बीजेपी के पास एक से एक अच्छे वक्ता है जो दिल्ली की जनता का दिल जीत सकते हैं जैसे सुषमा स्वराज जी !बी जे पी को यह  भी ध्यान रखना चाहिये कि उनके चाहने वाले ही कहीं सोशल मीडिया के आवश्यकता से अधिक और गलत इस्तेमाल से उन्हें नुक्सान न पहुँचा दें! इसके लिए भी कोई मोनिटरिंग होनी चाहिये जो पब्लिक की मानसिकता को समझते हुए उतना ही शोर मचाये जितना ज़रूरी है. अधिकतर लोग [आप पार्टी के समर्थक में से कई] शायद मेरी ही तरह चाहते हैं कि श्री नरेंद्र मोदी जी को इस बार प्रधानमंत्री बनना चाहिये और इसके लिए बी जे पी को लोकसभा के लिए उत्तर प्रदेश ,दिल्ली और बिहार में अपनी खास जगह बनानी होगी और सभी सदस्यों को मन मुटाव भुला कर एक साथ मोदी जी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए पार्टी के लिए काम  करना होगा ताकि स्पष्ट बहुमत लेकर राज करें न कि त्रिशंकु रहकर !

कांग्रेस एक पुरानी पार्टी है जिसे इस बार हार ज़रूर मिली है लेकिन उस में एक से एक दिग्गज और अनुभवी नेता हैं जो जानते हैं कि साम –दंड, भेद कब क्या प्रयोग में लाया जाए सत्ता को पाने के लिए .और यह समर्थन भी उसी रणनीति का एक हिस्सा है. दिल्ली की बात करें तो उनके चीफ अरविन्दर सिंह लवली एक अच्छे वक्ता हैं और इस बार उन्हें कांग्रेस ने बहुत सही चुना है ,हाल ही में टी वी पर उनके संयत और प्रभावी जवाबों को सुनकर लगा कि कोंग्रेस की वापसी दिल्ली में अगर होगी तो उसमें  लवली सिंह का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा. आज की स्थिति देखकर लगता है कि दिल्ली में 6 महीने से पहले ही अगर  दुबारा चुनाव हुए तो उसमें कोंग्रेस को फायदा होगा [जानती हूँ कि मेरा यह कहना आम धारणा के विपरीत है, मगर मेरा यही आकलन है]


ब वापस आप ‘ पार्टी पर आयें और उनके पक्ष को समझे तो यह ज़रूर है कि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस से उनका कोई गठबंधन नहीं है बस बाहरी समर्थन  है.
अगर वे पार्टी नहीं बनाते तो तब भी ये ही लोग उन पर दोष मढ़ते कि ‘’आप’’ ने  डर कर मैदान छोड़ दिया और दिल्ली की जनता को दोबारा चुनाव झेलने का कारण भी सभी पार्टियाँ मिलकर आप’’ को बना देतीं! अब जब बाहर से समर्थन लिया तब भी लोग शांत नहीं हैं .
आखिर ये ‘दोषारोपण करते रहने वाले लोग चाहते क्या हैं ?शायद कुछ नहीं सिर्फ सामने वाले को लट्टू बना कर घुमाते रहना चाहते हैं !`[मेरे विचार में अगर ये  दिल्ली में दोबारा चुनाव होने देते तो बहुत से समर्थक जो इस प्रकरण के बाद आप' से अलग हो गए हैं वे जुड़े रहते ...इस पूरे प्रकरण में फिलहाल ''आप'' का नुक्सान ही दिख रहा है जब तक ये अगले कुछ हफ़्तों में कुछ साबित कर के नहीं दिखाते.]

हाँ ,अन्ना का स्टेंड इस विषय पर मुझे कुछ समझ नहीं आया. उन्होंने  ‘नो कमेंट्स’ क्यों कहा ?यह पार्टी तो आप के आन्दोलन से निकली पार्टी है .एक शुभकामना तो बनती ही थी.

मेरे विचार में ‘आप’ पार्टी अपनी मेहनत से  धाराओं के विपरीत बहते हुए यहाँ तक पहुँची है ,उन्हें उनका काम करने के लिए सभी को पूरा सहयोग ,समय  और अवसर देना चाहिये. ‘आप ‘ पार्टी को किसी को भी अब बिना अधिक सफाई देते हुए अपने काम पर लग जाना चाहिये. आप अच्छा काम  करेंगे तब भी लोग तैयार बैठे हैं मीन -मेख निकालने के लिए और नहीं करेंगे तो भी लोग पहले से ही हंगामा करने  को तैयार बैठे मिलेंगे. इसी कुव्यवस्था में आप एक बड़ी लड़ाई लड़कर यहाँ तक पहुंचे हैं तो आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाते चलें .यहाँ मैं आप को नरेन्द्र मोदी जी का उदाहरण  देना चाहूंगी जिस तरह उन्होंने ‘अपने विरोधियों ,प्लेग , भूकंप’ आदि तूफानों में  से गुज़र कर अपनी गुजरात रूपी नैय्या को पार लगाया है उसी तरह अगर ‘आप’ भी ईमानदार है तो अपनी छवि और साफ़ करने के लिए कुछ कर के दिखाना होगा. आज जो गुजरात जा कर आता है तारीफें करता रहता है ‘आप ‘से उम्मीदें करते हैं कि वह भी दिल्ली को ऐसा ही सुन्दर रहने लायक सुरक्षित शहर बना कर दिखाएँ! जिस जिद्द को लेकर चले थे ‘’आप’’ उसे बनाए रखिये ..जनता ‘आप’ के साथ हैं.
श्री अरविन्द केजरीवाल ,मनीष सिसोदिया और कुमार विश्वास सहित ‘आप’ पार्टी के सभी सदस्यों को शुभकामनाएँ और बधाई!
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