October 21, 2009

'रात ग़मे तन्हाई की --चंदा ओ चंदा '

पेश हैं कुछ शेर ..साथ लिखे हैं तो ग़ज़ल जैसी लग रही है....अब जैसे हैं वैसे के वैसे उनके कुदरती रूप में 'आप के सामने हैं.

'रात ग़मे तन्हाई की'
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ग़मे तन्हाई की रात बहुत गहरी है,
बन के ओस मेरे आँसू बिखर जाते हैं.

दिल की चौखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ सँवर जाते हैं.

बादलों  से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

--लिखित द्वारा -अल्पना वर्मा २०/१०/२००९


...आज का गीत...
'चंदा ओ चंदा किसने चुराई तेरी मेरी निंदिया'
फ़िल्म-'लाखों में एक '-[लता जी का version]मेरे स्वर में सुनिए..
संगीत-राहुलदेव बर्मन ,गीत-आनंद बक्षी.


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चित्र गूगल से साभार.'कमेन्ट फॉर्म पर सीधा जाने के लिए यहाँ क्लिक करें.'

October 15, 2009

'दीवाली आई है'

एक बरस बिता कर दीवाली आई है,इसी शुभ अवसर पर आप सभी को दीवाली की ढेर सारी शुभकामनायें.
ईश्वर करे हर ओर रोशनी केवल इस एक दिन नहीं ,हर दिन रोशनी हर घर आँगन में ऐसे ही जगमगाती रहे.



दीवाली आई है
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अमा का तम सघन,बेध रही दीप शिखा,
अनगिन किरण कण ,बिखरे हैं चहुँ दिशा,
महकी बयार है पकवानों की सुगंध से,
फुलझडी,अनारों की जगमग भी छाई है,
पुलकित है जग सारा नूतन उमंग से,

सजे घर द्वार सभी ,दीवाली आई है.

ज्योति मुखरित हो,हर घर के आँगन में,
कोई भी कोना ,ना रजनी का डेरा हो,
खिल जाएँ व्यथित मन,आशा का बसेरा हो,
करें विजय तिमिर पर ,अपने मन के बल से,
दीपों की दीप्ती यह संदेसा लाई है,

करें मिल कर स्वागत,दीवाली आई है.
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..अल्पना वर्मा.. [१५ -१०-२००९]




आप के अनुरोध पर यह गीत पोस्ट के साथ १६ तारीख को जोड़ा गया है..


अकेले हैं चले आओ [फ़िल्म-राज़ ][लता जी का version]]




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October 5, 2009

घूमे आधी रात को चिडियाघर में!

शीर्षक बिलकुल सही है...आधी रात ही नहीं सुबह दो बजे तक घूम सकते थे..कैसे??
यू ऐ ई की राजधानी अबू धाबी है और अबू धाबी में है शहर अलऍन .
फूलों और बागों के इस शहर को यू ऐ ई का सब से सुन्दर शहर माना जाता है.
अबूधाबी में होते हुए भी राजधानी से १६० किलोमीटर दूर है.
यहाँ की हरियाली मुख्य आकर्षण तो है ही.साथ ही यहाँ पूरे मिडल ईस्ट का सब से बड़ा चिडियाघर भी है.
इस चिडियाघर को १९६७-६८ में शेख जायेद के आदेश पर बनवाया गया था। इस समय यहाँ ४००० [चार हज़ार]जानवर हैं.
आज कल यहाँ रिसॉर्ट भी बनाया जा रहा है.
ज्ञात हो अलेन शहर यू ऐ ई के निर्माता और प्रथम प्रेजिडेंट शेख जायेद का जन्म स्थान भी है.
बात कर रही थी आधी रात को चिडियाघर देखने की-जी हाँ बिलकुल सही सुना.
इस साल पहली बार रमजान के पूरे महीने में,रात ९ बजे से सुबह २ बजे तक जानवरों के nocturnal व्यवहार को दिखाने /समझाने के लिए चिडियाघर को पब्लिक के लिए खोला गया.
यह आयोजन अमेरिका के सेन दीअगो जू के सहयोग से किया गया था.

हम भी पहुंचे रात को चिडियाघर देखने..जानवरों के पिंजरों में सब अँधेरा ही था..हलकी रोशनी कहीं कहीं की गई थी। जो बाहर से पिंजरों पर पड़ रही थी.जू बहुत बड़ा है इस लिए जहाँ तक चल कर जा सकते थे बस वहीँ तक गए क्यूँ कि रात को ट्रेन नहीं चलती थी.जानवरों के नाम पर सिर्फ बन्दर और उनकी विभिन्न किस्में,हिरनों की किस्में जागी हुई मिलीं..बन्दर भी ज्यादातर सो ही रहे थे..लगभग हर ३-४ पिंजरे के पास एक गार्ड खडा था..जिस से जानवरों को कोई परेशान न करे..मैं ने भी सिर्फ जहाँ जानवर जागे हुए थे वहीँ की फोटो लीं ..ताकि फ्लेश से सोये हुए जाग न जाएँ.
'बर्ड हाउस 'में सब से ज्यादा चहल पहल थी..पंछी भी रात को आगंतुक देख कर खूब चहक रहे थे.Falcon शो भी हुआ..पहले देखा था इस लिए उस रात हमने नहीं देखा -falcon की तस्वीरें पुराने शो की हैं क्योंकि यह शो सामान्य दिनों में भी हर रोज़ चलता है.
देखीये 18 sept,2009 रात में ली गयीं चिडियाघर की कुछ तस्वीरें-
[चित्रों को बड़ा देखने के लिए उन पर क्लिक करें.]
Al Ain zooDeer[ghazaal]
DeerMonkey again
Bird housemonkey
birdslove birds
Love birdVulture
bird trainerfalcon1
penguineDSCN3308