June 7, 2013

खुद को छलते रहना..


 --१--

धूप में चलते हुए,
इस ख़ुश्क ज़मीन पर
 क़दम ठिठके 
ज़रा छाँव मिली
लगा किसी दरख्त के नीचे आ पहुंची हूँ.
मगर नहीं ,
यह  तो बादल का एक टुकड़ा है जो 
ज़रा बरसा और पानी बन कर बह गया,
धूप अब और तेज़ लगने लगी है मुझको !
----अल्पना -----
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