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''यूँ तो वतन से दूर हूँ लेकिन इस की मिट्टी मुझे हमेशा अपनी ओर खींचे रहती है''

August 10, 2016

माही--एक लघु फिल्म-एक प्रयास

अपनी लिखी एक छोटी सी कहानी को फिल्म के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है.
आशा है आपको पसंद आएगा....

अवधि-3 मिनट ४० सेकंड     Time: 3 Minutes 40 Sec

इंटरनेट की स्पीड धीमी है और फिल्म अगर लोड  न हो रही हो तो  विडियो सेटिंग में quality२४० कर लें इससे  फिल्म जल्दी load हो जायेगी.

अपने सुझाव या टिप्पणी अवश्य दीजियेगा.

June 25, 2016

परिवर्तन

परिवर्तन जीवन का  शाश्वत नियम है.
जो इस पल है बिलकुल वैसा ही अगला पल नहीं होगा यह भी तय है..
यह सब हमेशा से ही सुनते आये हैं और सुनते रहेंगे ,महसूस करना और इस कथन को जीने में भी फर्क है...
जब इस कथन को जीना पड़ता है ,तब तकलीफ होती है .
बीता हुआ कल लौटेगा नहीं ..उस कल की यादें रह जाएँगी.

जीवन कब करवट बदलता है पता ही  नहीं चलता .
आने वाले बदलाव जीवन में सुख लाएँगे या  दुःख...
कुछ कह नहीं सकते ,मात्र आज का ही पता है.
कहा जाता है कि वर्तमान में जिओ ..
क्या वर्तमान में जीने से भविष्य अपने आप संवारा हुआ मिलेगा.?
भविष्य  के लिए योजनाएँ भी बनानी तो पड़ेंगी ही..
योजना बनाने के लिए कोई आधार भी होना चाहिए.

ब्लॉग डायरी के पन्ने पलटने मैं यहाँ बहुत दिनों बाद आई हूँ,
मुझे वापस  लाने वाली  ,आने वाले कल की अनिश्चितता है .
गत वर्ष जब पहली बार विपश्यना ध्यान सीखा तब लगा जैसे स्थिरता पाने  का मार्ग मिल गया है परन्तु  नहीं ..
वह स्थिति अभी कोसों दूर है .

पिछले कुछ वर्षों से एक नियम सा बंध गया था यूँ तो उतार चढ़ाव कम कभी रहे नहीं 
लेकिन फिर भी कहीं न कहीं निश्चितता थी.
कई अपरिहार्य पारिवारिक कारणों से नौकरी  छोड़ कर अब स्वदेश लौटने की तैयारी में हूँ ,मन अशांत है.
यूँ तो कई बार तकदीर ने करवटें  ली हैं...लेकिन इस बार जो मोड़ आ रहे हैं उनसे मन में उलझन है.
शायद अनिश्चितता कारण हो...

सलवटें मेरे माथे की हाथों की लकीरों सी लगती हैं मुझे .ना जाने नियति ने क्या तय किया है मेरे लिए ?
भारत अब तक जाते रहे  हैं तो लौट आने के लिए ..लेकिन इस बार से यह उल्टा हो जाएगा.
अध्यापन की नौकरी से ब्रेक में फिर से लिखना नियमित हो पायेगा यह तो तय है .
चलते -चलते फिल्म -किसना के एक गीत की पंक्ति याद आ रही हैं ..
'हम हैं इस पल यहाँ ,जाने हों कल कहाँ''
इसलिए जल्द ही अगली पोस्ट के साथ मिलती हूँ...












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March 23, 2016

होगी पिया संग होली !


Radha Krishn Holi-Courtesy:google images 
होगी पिया संग होली
                                               - अल्पना वर्मा 

बहे फागुनी बयार ,गौरी करे सिंगार 
मन रंगे इस बार ,करे पी का इंतज़ार .

बजे चंग बार-बार ,फूल पालकी सवार 
सुनो  मन की पुकार ,सजन आओ इस पार.

देख रंगों की बहार ,बजे हिय के तार 
पिचकारी की धार ,लागे मन में कटार

भीगा -भीगा संसार ,ठंडी लागे फुहार 
लेके प्रीत बेशुमार, सजन आये तेरे द्वार !

बिछुडों को लो पुकार ,रूठों को भेजो प्यार 
लेकर मिलन के हार ,आया होली का त्यौहार!
==================२३/०३/२०१६ ================

आप सभी को होली पर्व की ढ़ेरों शुभकामनाएँ!!!
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