अभिशप्त माया

ग़लती से क्लिक हुई छाया एक साए की  आज सागर का किनारा ,गीली रेत,बहती हवा कुछ भी तो रूमानी नहीं था. बल्कि उमस ही अधिक उलझा रही थी माया...

October 6, 2010

ऐसा भी होता है !!!


कभी कभी जीवन में बहुत कुछ ऐसा होता है जो आप ने पहले से तय नहीं किया होता. सब कुछ अप्रत्याशित सा ! पिछले दो महीने में भी बहुत कुछ इतनी तेज़ी से घटा ..
जैसे किसी सुस्त निढ़ाल से मन को पंख मिल गए थे !