स्वदेश वापसी /दुबई से दिल्ली-'वन्दे भारत मिशन' Repatriation Flight from UAE to India

'वन्दे भारत मिशन' के तहत  स्वदेश  वापसी   Covid 19 के कारण असामान्य परिस्थितियाँ/दुबई से दिल्ली-Evacuation Flight Air India मई ,...

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May 26, 2010

बंज़र हथेलियाँ

एक नज़्म-:


बंज़र हथेलियाँ
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क रोज़ उग आये थे कुछ लम्हे
खुद ब खुद हथेलियों पर मेरी ,
चाहत की नमी ,
अहसास की गरमी ने पाला था उन्हें ,
और पलकों ने दिया था साया ,

जिस रोज़ आँख लगी मेरी ,
जागी तो ,
इस धरती को बंज़र पाया ,
ढूँढा बहुत ..मगर ,
कोई लम्हा फ़िर न मिला
मालूम हुआ है,
कि 'रेखाएँ ' ...खुदगर्ज़ हुआ करती हैं!

.............................अल्पना ...........................


January 11, 2010

'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'


'फसाना-ए-शब-ए-ग़म'
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जुर्म   -ए-तमन्ना की सज़ा

यूँ मिला करती है मुझे ,

खिंचती हैं रंगे पलकों की,

जब दर्द कफस में अंगड़ाईयाँ लेता है,

सर्द आहों में दम तोड़ती हैं उम्मीदें,

नक्श ज़हन में उभरने लगते हैं,

परत दर परत उघड़ती हैं सब यादें,

होने लगती है...

मेरे सब्र की आज़माईश!

बह जाएँ अश्क तो कुछ सुकून मिले,
पर पशेमान से
सुबक़ते हैं
और
आँखों में ही सो जाते हैं!

मशवरे देती है सबा..
की यूँ बेज़ार ना हो,
आगोश में तुझको ,कज़ा के ही
अब तो चैन आएगा!
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[लिखित -अल्पना वर्मा],[चित्र साभार-श्री देव प्रकाश जी]
कुछ उर्दू शब्दों के अर्थ
फसाना=कहानी, शब=रात,कफस=पिंजरा,पशेमान=शर्मिंदा ,सबा=हवा,कज़ा=मौत



एक ग़ज़ल
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फिल्म-शगुन,गीत -साहिर लुधियानवी,संगीतकार -ख़ैयाम,
मूल गायिका -जगजीत कौर,picturised on Nivedita
'तुम अपना रंजोग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो,
तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो'
[कवर वर्षन- स्वर--अल्पना]
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