July 7, 2013

चित्र और त्रिवेणी

कभी -कभी कुछ चित्रों को देखकर अभिव्यक्ति शब्द बुनने लगती है,ऐसे ही कुछ शब्द त्रिवेणी बनकर इन चित्रों के लिए उभर आए हैं। ये चित्र श्री सुब्रमनियम जी के बाग़ के हैं उन्हीं के द्वारा खींचे हुए हैं, मैंने इनके पिक्सल कम करके यहाँ लगाए हैं। इनके मूल आकार उनके फेसबुक अल्बम में देख सकते हैं।

-१-
रात के  आँसू पत्तों पर चमकते  मोती ,
सुबह होते ही ओस फ़ना हो जाती है,

झूठ है कि सूरज सबको जीवन देता है।
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-२-
इन्द्रधनुष बिखेरता रहा  रंग अपने,
आसमां  नीला ,पत्ते हरे  और  श्वेत पुष्प बिन आस ,

सुनो ! सफ़ेद में सब रंग शुमार होते हैं।
------अल्पना ------------
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-३-
गुफ्तगू करता ,फ़ूल  खिलता- मुस्कुराता है,
हवा चली ,झूल गयी  डाल और उड़ गया भंवरा,

एक  भंवरे का मकसद तो पराग पाना भर है। 
-------अल्पना ---------
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31 comments:

अनूप शुक्ल said...

बहुत खूब! क्या बात है~!

डॉ टी एस दराल said...

सुन्दर फूल। और अत्यंत सुन्दर त्रिवेणियाँ।

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, शब्द और चित्र का सशक्त संयोजन..

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

शब्द और चित्र दोनों ही एक दूसरे के पूरक .....झूठ कि सूरज सबको जीवन देता है ...बेहतरीन त्रिवेणी ।

Vikesh Badola said...

सूरज का सौतेलापन, सफेद फूल की उदारता, फूल से भंवरे का विश्‍वासघात........प्‍यार से उकेरा गया सब कुछ।

Shashi said...

It is so beautiful ,really written well . Keep writing .

Manav Mehta 'मन' said...

बहुत बढ़िया

ताऊ रामपुरिया said...

चित्र को देखकर भाव का पैदा होना एक नैसर्गिक प्रतिभा है.

तीनों ही त्रिवेणी अपने आप में अद्वितीय हैं. बहुत ही खूबसूरत भाव और वो भी सटीकता के साथ, शुभकामनाएं.

रामराम.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वाह !!! बहुत उम्दा लाजबाब भावपूर्ण प्रस्तुति,,

RECENT POST: गुजारिश,

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर रचना
तीनों एक से बढ़कर एक


(जी वैसे आप बहुत दिनों बाद दिखाई दीं )

सतीश सक्सेना said...

बढ़िया वर्णन और चित्रण ..

Prakash Govind said...

रात के आँसू पत्तों पर चमकते मोती ,
सुबह होते ही ओस फ़ना हो जाती है,

झूठ है कि सूरज सबको जीवन देता है।
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तीनों ही त्रिवेणी अर्थपूर्ण और बहुत लाजवाब हैं
सुन्दर सृजन

बधाई / आभार

rohitash kumar said...

ब्लॉग पर आइए....घर के पीछे या आगे ..किसी गांव के मोड़ पर..या किसी मंदिर के प्रांगन में...या शहर के किसी पार्क में....गली के किसी नुक्कड़ पर...मन्नतों के धागे से बंधे पीपल के पत्तों पर ठहरी हुई बूंदों मिलेंगी और देश की खूशबू आपको देगी...

Maheshwari kaneri said...

झूठ कि सूरज सबको जीवन देता है ...शब्द और चित्र दोनों ही एक दूसरे को मात देरहे हैं ..खुबसूरत प्रस्तुति..

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... भँवरे का मकसद तो पराग ही है ... जैसे सूरज का मतलब ऊर्जा देना है फिर चाहे आंसू रहे या ओस उड़ जाए ...
सभी त्रिवेनियाँ कमाल का अर्थ समेटे ...

arvind mishra said...

Very thoughtful!

शिवनाथ कुमार said...

त्रिवेणी में डुबकी लगाना अच्छा लगा
प्रकृति के ये रूप बड़े निराले होते हैं
साभार

सु..मन(Suman Kapoor) said...

बहुत बढ़िया

Einstein said...

बहुत खूब बन पड़ी चित्र और उसकी अभिव्यक्ति ...

क्या भंवरे का परागपान, फूलों के रस कि सार्थकता

सिद्ध करने का कारण नहीं बन जाती है ?

आभार---

Alpana Verma said...

@नहीं Einstein जी .मैं नहीं मानती.स्वार्थ पूर्ति के लिए किसी का उपयोग उसके गुण की सार्थकता हुई क्या?
आप का कथन तो कुछ ऐसा ही हुआ जैसे कि किसी रूपसी के शोषण को आप उसके रूप की सार्थकता कह दें.

Einstein said...


माफ़ करें अल्पना जी मेरा ये अर्थ तो कदापि नहीं था।
मेरा आशय ये था कि जब मधुमक्खियाँ फूलों का रस पान
करती है तो उस रस को स्वादिष्ट मधु के रूप में हमें प्रदान
करती है । क्या मधुमक्खियाँ फूलों का शोषण करती है ?
क्या फूलों के रस का मधु में परिवर्तित हो जाना उसके सार्थकता
को सिद्ध नहीं करती है ? यदि आपके पास समय हो तो मेरे विचारों
की दुनियाँ में आपका स्वागत है @ http://einsteinkunwar.blogspot.in/2009/04/blog-post_8201.html

अवनीश एस तिवारी said...

good one

Avaneesh

ajay yadav said...

आदरणीया सादर अभिवादन
एक चित्र सैकड़ों संभावनाओं कों व्यक्त करता हैं |
उम्दा लेखन |
मनभावन संयोजन |

ajay yadav said...

आदरणीया
अति सुंदर शब्द संयोजन,
मनभावन चित्र
डॉ अजय

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

निसंदेह साधुवाद योग्य लाजवाब अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई

premkephool.blogspot.com said...

बहुत सुंदर रचना

premkephool.blogspot.com said...

बहुत बढ़िया

Reena Maurya said...

सुन्दर अति सुन्दर...
:-)

Reetika said...

behatreen abhivyakti...

rahul0731verma said...

very nice 'triveni'...........please keep writing & bless readers like me with your fantastic writing work