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June 8, 2008

'यूं हुई समन्दर मैं '


यूं हुई समन्दर मैं

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सोचा था मुट्ठी में संभाल रखा है



जतन से उस को,


पर न जाने कब..


फिसल गया वो...

सूखी रेत की तरह,



और रह गयी किरकिरी हाथों में,


जो आंखों में चुभती है तो.....



बना जाती है समन्दर मुझ को !



-Alpana Verma

29 comments:

mehek said...

bahut gehre bhav kehti sundar kavita,thode shabdon mein bahut kuch keh gayi,badhai

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

चन्द लफ्जों में समां लिया आपने सागर, धन्यवाद

रंजू ranju said...

बहुत सुंदर लिखा है अल्पना आपने .थोड़े से लफ्जों में गहरी बात कह दी है ..

दीपक भारतदीप said...

मन के समंदर में उठती लहरें
कई नाम है जो नाव की तरह
लहराते निकल जाते हैं
जिसका किनारा आ गया
वह साथ छोड़कर चला गया
वह लहरें भी रूप बदल देती
जिनके साथ वह खेल जाते हैं
एक लहर आती, एक नाव ले आती
उसके रुखसत होने के पहले ही
दूसरी उठती नजर आती
हर किसी का मन है समंदर
सबकी अलग अलग कहानी हैं
कुछ लहरों के साथ ही बहते
तो कुछ दृष्टा बनकर
लहर और नाव का खेल देखते जाते हैं
मन के समंदर में तैरते हैं बस नाम
हाथ में तो सबके किरकिरी नजर आती है
...................................

आपकी इस कविता पर मुझे कुछ इस तरह शब्द सूझे। बहुत बढिया कविता है आपकी
दीपक भारतदीप

बाल किशन said...

अद्भुत!
बहुत सुंदर!
बधाई.

बाल किशन said...

अद्भुत!
बहुत सुंदर!
बधाई.

Anonymous said...

hi i never had a doubt on you and you are amazing...but write something romantic.

mahendra mishra said...

बधाई.

अबरार अहमद said...

भावनाओं से भरे जज्बात। बधाई।

अशोक पाण्डेय said...

बहुत सुन्‍दर कविता है। बधाई।

ajay kumar jha said...

alpana jee,
saadar abhivaadan. samundar jitnee gahree baat keh daalee aapnee wo bhee mahaj chand panktiyon mein.

राजीव रंजन प्रसाद said...

अल्पना जी,

सुन्दर और गहरी क्षणिका है।

***राजीव रंजन प्रसाद

sanjay patel said...

अच्छा ख़याल और कहन है आपकी.
हिन्दी मुक्त छंद की यह बात नज़्म का लुत्फ़
दे रही है.

अल्पना वर्मा said...

आप सभी को मेरा बहुत बहुत शुक्रिया....आप का हर शब्द आगे लिखते रहने का उत्साह देता है...अल्पना

Dr. Chandra Kumar Jain said...

सहज संवेदना की
अलग-सी रचना.
बधाई.

Udan Tashtari said...

बहुत सुंदर लिखा है, लिखते रहिये. बधाई.

DR.ANURAG ARYA said...

और रह गयी किरकिरी हाथों में,


जो आंखों में चुभती है तो.....



बना जाती है समन्दर मुझ को !

ये अपने आप मे एक खूबसूरत रचना है....
गाना .....लिखना ओर दोनों चीजे बखूबी करना ...आप मे वाकई कुछ ख़ास हुनर है.....एक शिकयत रहती है आपसे ..आप कविता कम लिखती है.....

mamta said...

छोटी और सुंदर रचना।

अल्पना वर्मा said...

anuraag ji ...haan ye sach hai maine abhi dhyan diya ki kavitayen kam post ki hain--agli baar se is baat ka dhyan rakhungi..

aap sabhi ne is kavita ko saraha is ke liye ek baar phir se dhnywaad :)

Aadi said...

phenominal work .. absolutely astounding .. it really deserve a standing ovation .. loved the way you said : phisal gaya woh sookhee ret kee tarha .. amazing

Aadi said...

Only for you dear Alpz ..
http://expressions-adityaz-world.blogspot.com/2008/06/main.html

mahendra mishra said...

bahut badhiya abhivyakti . badhai

Aadi said...
This comment has been removed by the author.
Aadi said...

Thank you for ur encouraging words Alpz .. But I am really looking forward for your view on my take on 'Madhushalaa' and other poems posted there .. please take time to read and post ur comments there
Also I did some tweaking to the same poem .. please revisit it as well

महामंत्री (तस्लीम ) said...

बहुत खूब। आपने थोडे से शब्दों में अपनी बात जिस खूबसूरती से बयाँ की है, वह बहुत सुन्दर है। इस प्यारी सी कविता के लिए बधाई स्वीकारें।

ishq sultanpuri said...

ret ka kya hai bikhar jayegee.
ati sundar

राजेश अग्रवाल said...

सरोकार पर आपकी टिप्पणी देखकर आपके ब्लाग तक आया. बहुत मर्मस्पर्शी व भावपूर्ण कविताएं लिख रही हैं आप. क्या आपने यह भी पाया है कि पंक्तियों की आपस की लम्बाई, छंद और मात्राओं में कुछ सुधार की गुंजाइश है, जिससे वे और बेहतर बन सके?
सादर

अल्पना वर्मा said...

Rajesh ji ,vigyan vishya padhe aur padhayee hain --hindi sahitya aur niyamo ki jaankari itni nahin ki kavitaon ko niyam anusaaar likh sakun--
aap batayeeye kahan correction kiya ja sakta hai main seekhne ko tayyar hun..bas bhaavon ko kagaz par yum hi utaar dete hain...aap ne is pahlu par dhyan diya --achcha laga
dhnywaad

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" said...

alpna jee
namaskaar
yoon hui samandar main
padh kar achchhi lagi
bhaav bahut achchhe hain
badhai
aapka
Dr.vijay tiwari"kislay"
http://www.hindisahityasangam.blogspot.com/