April 18, 2008

सुबह



सुबह जब मेरे दरवाज़े पर दस्तक देने,
आगे बढ़ती है,

कोहरे को छांटती हुई
तो,
उसके कदमों को, दरवाजे़ से

कुछ फासले पर लगा

एक बड़ा पेड़ रोक लेता है!

सुबह कोशिश करती है

बढ़ती है

अपने अंगरक्षकों को भेजती है

उनमें से कुछ ही जीतकर

मेरे पास पहुंचते हैं,

उससे पूर्ण अहसास नहीं हो पाता

कि,
सुबह हो गई है।

और मैं,

दरवाजे पर हल्की दस्तक को¸

हवा का झोंका समझ बंद रहने देती हूं

अंधेरे में घुटती हुई
करती रहती हूं
अपने जीवन की सुबह की प्रतीक्षा

और टटोलती रहती हूं

अंधकार में,

सुबह का जीवन में अर्थ –

[written at the age of 18]--Alpana Verma

18 comments:

डॉ. अजीत कुमार said...

18 की उम्र में जीवन के सुबह को खोजने समझने की एक भावनात्मक कोशिश.
लाजवाब!

अबरार अहमद said...

अच्छी कविता। बधाई।

umesh mishra said...

shandar prayas badhai

DR.ANURAG ARYA said...

सोच ही रहा था की शायद किन्ही व्यस्तायो ने आपको घेर रखा है ....बड़े दिनों बाद ये कविता आयी...वो सुबह कभी तो आयेगी......अल्पना जी आपने वो नज्म सुनी होगी ...आपकी कविता की कुछ पंक्तिया बहुत सुंदर है खास तौर से .....शुरआत बेहद लाजवाब.....

mehek said...

subhah ki dastak badi bhavnase bhari hai,bahut khubsurat.

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुन्दर भाव हे,और टटोलती रहती हूं अंधकार में,
सुबह का जीवन में अर्थ –
अनुराग जी ने ठीक कहा वो पक्तिया जबरन याद आ जातई हे.. वो सुबह कभी...

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया भाव, बधाई.

प्रतीक माहेश्वरी said...

नमस्ते,
आपकी यह कविता पढ़ी. काफ़ी अच्छा लगा आपकी दूरगामी सोच को समझकर.
वैसे आपके सुझावों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
अभी आपसे माफ़ी माँगना चाहूँगा क्योंकि आपकी बाकी की कविताएँ नही पढ़ पा रहा हूँ.
लेकिन भविष्य में यह ज़रूर होगा..
अभी-अभी मैंने भी एक कविता पोस्ट की है...कृपया उसके लिए भी सुझाव दें...
आपका आभारी,
प्रतीक

Z.Hussain said...

hi Alpana
your poems are very nice keep it up and wish you the best

Hussain,
PRO,
Kuwait

Meeta said...

Awesome! good work! Keep smiling and sharing. Thanks and regards,

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' said...

एक बड़ा पेड़ रोक लेता है!
सुबह कोशिश करती है
बढ़ती है
अपने अंगरक्षकों को भेजती है
उनमें से कुछ ही जीतकर
मेरे पास पहुंचते ....

सुंदर ....बहुत दिनों बाद एक नई सोच ...... शुभकामनाएं

Poonam Agrawal said...

subah kee khoj mein ..andhkaar mein khojtee ek athara saal kee masoom ladkee....

Bahut Sunder abhivyakti hai...
My best wishes with u...

Dr. Chandra Kumar Jain said...

अंधेरे में माचिस
तलाशता हुआ हाथ
अंधेरे में होकर भी
अंधेरे में नहीं होता.
===============
उम्र की इस दहलीज़ पर
ऐसी तलाश,तराश देती है
इंसान की खोज को !
बधाई.

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

पूरी रचना बहुत ही सुंदर भाव लिए हुए है.. बधाई

अरूणा राय said...

achha hai

Rachna Singh said...

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laxman singh said...

hi alpana very good morning you are v nice womengood work keep smiling thanks regards