July 1, 2017

पैरों के पर !

कविवर ब्लॉगर राजेंद्र स्वर्णकार जी का सन्देश मिला कि आज ब्लॉग दिवस है तो सभी ब्लॉगर अपनी एक पोस्ट अवश्य पोस्ट करें .पोस्ट लिखने का मन नहीं था लेकिन 'ब्लॉग जगत के पुराने दिन लाने के जो प्रयास किये जा रहे हैं ,उसमें अपना योगदान दिए बिना न रह सकती थी  इसलिए यही आत्मालाप पोस्ट के रूप में प्रस्तुत है -

जून १६ से १७ 

--------२०१६ ,जून महीने से २०१७ का जून महीना ...
इस पिछले एक साल में इतना कुछ अनुभव किया जिसपर आराम से एक किताब लिखी जा सकती है!
बहुत बार ग्रहों -नक्षत्रों की चाल पर यूँ ही विश्वास नहीं जागने लगता ,क्योंकि इतना अनापेक्षित घटने लगता है कि अचानक एक दिन आप
अपने दिमाग की सभी खिड़कियाँ बंद करके यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं अब मैं सिर्फ अपने काम करता जाऊँगा ..क्या होगा  क्या नहीं ,ऊपर वाला जाने ! और यही तो गीता  का भी उपदेश है कि कर्म किये जाओ फल की इच्छा न करो ...

लेकिन इस स्थिति पर पहुँचने के लिए या इस स्थिति को समझ कर ग्रहण करने के लिए आपको कई ऐसे अनुभवों से गुज़रना पड़ता है जिनसे आप सीखते भी जाते हैं और उन सीखों को साथ -साथ जीवन में उतारते चले जाते हैं.हाँ पहली बार भगवद गीता का पूरा पाठ और पुनर्पाठ भी किया ताकि अपने प्रश्नों के उत्तर पा सकूँ लेकिन लगता है इस पुस्तक को फिर से पढ़ना होगा .कई अनुत्तरित प्रश्न अब भी हैं.

 इस एक साल  में मैंने यात्रायें भी इतनी की कि लगने लगा है कि मेरे पाँव में पहिये बाँध दिए गए हैं.
एक हफ्ते बाद फिर से यात्रा की तैयारी है ! आशा है इस बार यह कुछ अच्छी खबर और अच्छे अनुभव दे कर जाएगी.
यात्राओं के अनुभव चित्र सहित अगली बार ...
तो अब ब्लॉग जगत को पुराने रूप में वापस लाने के 'ताऊ रामपुरिया जी ' के इस प्रशंसनीय प्रयास में सहयोग देते हुए  'हिंदी  ब्लॉग दिवस' पर  ब्लॉग -यात्रा पर निकला जाए ...राम-राम !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

14 comments:

vandana gupta said...

सही कहा आपने .........यात्रा कहीं से शुरू हो वापसी घर पर ही होती है :)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-07-2016) को "ब्लॉगिंग से नाता जोड़ो" (चर्चा अंक-2653) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ताऊ रामपुरिया said...

जीवन में अक्सर ऐसे अवसर आते हैं या घटनाएं हो जाती हैं जब हम दार्शनिक से हो जाते हैं. ऐसे में हम गीता की तरफ़ देखते हैं और गीता समझने में बहुत मुश्किल है. जितने विद्वानों ने गीता की टीका लिखी है वह सब अलग अलग रास्ते लगते हैं. कोई भक्ति में कोई योग में और कोई कर्म में गीता देखता है. आचार्य रजनीश ने गीता की एक और अदभुत व्याख्या की है कि गीता का संवाद कृष्ण और अर्जुन के मध्य युद्ध भूमि में हुआ और संजय ने अपनी कामेंट्री द्वारा महाराज धृतराष्ट्र को बताया और धृतराष्ट्र द्वारा यह गीता संदेश आगे बढा.
संजय ने अंधे महाराज धृतराष्ट्र को जो बताया वो हूबहू उसी रूप में अंधा व्यक्ति कैसे समझेगा जिसने कभी दुनिया भी नही देखी.
और शायद इसी कारण गीता जो भी पढता है वह अपने मन माफ़िक उसमे खोज लेता है. यही बात गीता को संसार का सर्व श्रेष्ठ ग्रंथ बनाती है.

ब्लाग जगत को आपका अनुपम योगदान रहा है जब भी समय मिले तब अवश्य निकालियेगा. बहुत शुभकामनाएं.

#हिंदी_ब्लागिँग में नया जोश भरने के लिये आपका सादर आभार
रामराम
०९०

Digamber Naswa said...

वैसे तो जीवन अपने आप में अनंत यात्रा ही है ... पर कई बार पड़ाव आते बैन फिर नए पड़ाव आते हैं ...
आपकी यात्रा सफल हो ... शुभकामनाएँ ...

अमिताभ श्रीवास्तव said...

वाह। आज बहुत बहुत दिनों बाद हमने भी ब्लॉग की शक्ल देखी। बड़ा कमजोर हो गया है। कोशिश करेंगे खिलाने-पिलाने की उसे पुनः अपनी रौनक देने की। किन्तु व्यस्तताएं संभव है अपना जाल बिछाकर फांसे रखेंगी। खैर, देखते हैं किन्तु आज ब्लग की सैर ने पुराने दिनों का आभास कराया है। आप तो संपर्क में ही नहीं हैं सिवा इस एक ब्लॉग के। पर जैसी हों स्वस्थ रहें , प्रसन्न रहें और अपनी इन यात्राओं को कागज पर उतार कर हमें भी शब्दों के माध्यम से सैर कराएं।

Udan Tashtari said...

सार्थक लेखन.....अभिनन्दन करते हैं. हिन्दी ब्लॉग जगत आबाद रहे. अनंत शुभकामनायें. नियमित लिखें. साधुवाद.. आज पोस्ट लिख टैग करे ब्लॉग को आबाद करने के लिए
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

संगीता पुरी said...

अन्तर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स डे की शुभकामनायें .... #हिन्दी_ब्लॉगिंग

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीया
आपने बहुत सुंदर और रुचिकर लिखा है

🙏 🙏 🙏
हमारे आग्रह का मान रखने के लिए आभार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीया
आपने बहुत सुंदर और रुचिकर लिखा है

🙏 🙏 🙏
हमारे आग्रह का मान रखने के लिए आभार

Jyoti Khare said...

मन का सच कह दिया

शुभकामनाएं

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बात तो सही है... पर अब लौटे हैं तो नियमित लिखने और ब्लॉगर साथियों को पढने की कोशिश रहेगी

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अथक पथिक ...

Vineeta Yashswi said...

Ek achhi shuruaat ki apne...

Jyoti Dehliwal said...

आपकी ब्लॉग यात्रा मंगलमय हो।