Search This Blog

April 15, 2013

एक अजन्मी कविता!



एक अजन्मी कविता 
चाह छाँव मीत प्रीत गीत अर्थ-बिन अर्थ समय-असमय बात -बेबात गुण -अवगुण उपेक्षा -अपेक्षा धुंध- स्वप्नशून्य- नैन 
********अल्पना ******* 


25 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज मंगलवार (16-04-2013) के मंगलवारीय चर्चा ---(1216) ये धरोहर प्यार की बेदाम है (मयंक का कोना) पर भी होगी!
नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
सूचनार्थ...सादर!

प्रवीण पाण्डेय said...

थाप की तरह करते बात..शब्द

Tanuj arora said...

Zindagi ki dhup chhanv mein na jne kitbi hi baar hm shbd pirone ki shuraat to krte h pr kch shabdon baad hi us adhoori shbdon ki maala ko ase hi chod dete h aur ek "ajnmi kavita" reh jati h kahin gum panno mein....

वाणी गीत said...

चाह से शून्य के मध्य कितने पड़ाव ,
नैनों को जीवन भर का काम !!

सरिता भाटिया said...

शब्दों को पिरो करके,रचना हो तैयार
गुण अवगुण सब भूल के ,मीत से होत प्यार
'मैया का चोला'[लखबीर सिंह लख्खा]

jyoti khare said...


गहन अनुभूति
सुंदर रचना
उत्कृष्ट प्रस्तुति
शुभकामनायें

आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों

दिगम्बर नासवा said...

अर्थ होते बुए भी बिन-अर्थ ही हैं ये सब ...
ये आजन्मी नहीं रोज़ रोज़ की कविता है ...

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर रचना,आभार.
"महिलाओं के स्वास्थ्य सम्बन्धी सम्पूर्ण जानकारी
"

Anonymous said...

Bahot achhe comments aaye hain .. In bikhre motiyon ko ek rangeen dhage mein tarteeb se piroya jaye to kitni khubsurat mala ban jayegi .. ye ajanmi nazm sochne ki dawat deti hai .. regards
SA Feroz

Shashi said...

so sweet specially the unborn poem and picture as well .

Arvind Mishra said...

चिरन्तन प्रतीक्षा!

सतीश सक्सेना said...

धुंध स्वप्न

शून्य नैन !

शुभकामनायें आपको ...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

सुंदर शब्दों की उत्कृष्ट रचना,आभार,
RECENT POST : क्यूँ चुप हो कुछ बोलो श्वेता.

ताऊ रामपुरिया said...

इस रचना का तो एक एक शब्द ही अपने आप में संपूर्ण कविता है. बहुत ही सुंदर शब्दों को संयोजित किया आपने, शुभकामनाएं.

रामराम.

शिवनाथ कुमार said...

चाह से शून्यता (जो विशाल है) की ओर बढती जिन्दगी ....
बहुत ही सुन्दर
आभार !

Vikesh Badola said...

इस छोर से उस छोर।

Rashmi Swaroop said...

wow.. jaise sabkuch samet liya.. :)

Manav Mehta 'मन' said...

बहुत बढ़िया

अवनीश एस तिवारी said...

एक बेहतरीन अभिव्यक्ति !

कम शब्दों में सुन्दर प्रस्तुति है ।

अवनीश

आनन्द विक्रम त्रिपाठी said...

संक्षेप में बहुत कुछ कहा ....सुंदर |

डॉ .अनुराग said...

नींद से उठी हो जैसे उदासी

P.N. Subramanian said...

हमारे जैसे मूढ़ के लिए तो यह महाकाव्य है

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर

expression said...

वाह......
सम्पूर्ण कविता....

अनु

आशा जोगळेकर said...

वाह, कितने कम शब्दों में कितनी बडी बात।