March 24, 2013

फागुन- धुन


हर रिश्ता अपना अलग रूप रखता है ,हर रिश्ते की अलग पहचान तो उसे निभाने के लिए जतन भी अलग -अलग होते है।दिल के भी न जाने कितने चेंबर बनाने पड़ते हैं ...हर रिश्ता अपने लिए प्रयाप्त जगह चाहता है और  उसके फलने फूलने के लिए प्रयाप्त खुराक भी !
हम कितना समय दे पाते हैं किस को ..इसी पर निर्भर करता है हमारा सामाजिक जुड़ाव भी। .
त्यौहार हमें एक दूसरे के इसी जुड़ाव को मजबूत करने का मौका देते है। 
होली का त्यौहार भी आपसी मेल -जोल और प्रेम को बढाने का   त्यौहार है।
  
मैंने आखिर होली १५ साल पहले खेली थी। 
मुझे इस त्यौहार से कोई खास मोह नहीं है उसका एक कारण यह है कि होली में  रंग -बिरंगे होने के बादजो उन रंगों को उतारने की जद्दोजहद करनी पड़ती है वो अक्सर तकलीफदेह होती है। 
होली के त्यौहार को मैं रंगों के साथ साथ गुझिया से जोड़ती हूँ.वही तो खास मिठाई बना करती घरों में और बांटी भी जाती थी।
होली के त्यौहार की एक बात बड़ी अच्छी हैं कि आप किसी को कोई भी बात  बेबाक कह सकते हैं ,
यह कह कर  कि' बुरा न मानो होली है '!कई लोग तो अपने मन की बात अगले व्यक्ति को कह देने के लिए शायद साल भर इस मौके की प्रतीक्षा करते हैं । 

आप सभी जो होली मनाने वाले हैं, तैयारियों में लगे होंगे।
 सभी को होली की रंग बिरंगी शुभकामनाएँ!

फागुन -धुन 
खिली -खिली  है धरती , खिला  गगन है ,
रंगों से रंगा  देखो ऋतुराज  वसन  है ,
महक-महक उठती है बगिया ,
बहती -बहती मदमस्त पवन है ,
लहकी-लहकी   झूमे सरसों 
बहके-बहके से   है टेसू ,
जाने किस की  धुन में अलसी मगन है!

रंगों की कर जंग , मृदंग- चंग गीत सुनाएँ  
मलते  हुए गुलाल ,संग अबीर लगाएँ.,
पिचकारी की धार संग रंग खूब नहाएँ,
दूर करें सब बैर ,हृदय  प्रेम भर  जाएँ.
फागुन - धुन पर  झूम -झूम यूँ होली.मनाएँ। 

-अल्पना वर्मा 

36 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

होली का आनन्द सबके मन को छू जाये, होली की शुभकामनायें।

वाणी गीत said...

मीठी फागुन धुन ...
पर्व की बहुत शुभकामनाएं

Ratan singh shekhawat said...

होली के अवसर पर शानदार रचना

होली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ |

Kalipad "Prasad" said...

रंगीन होली सबके दिल में खुशियाँ भर दें. होली की शुभकामनाएं
latest post भक्तों की अभिलाषा
latest postअनुभूति : सद्वुद्धि और सद्भावना का प्रसार

mukti said...

मेरा तो सबसे मनपसंद त्यौहार है होली. हाँ, रासायनिक रंगों से एलर्जी के चलते इधर थोड़ा रंग खेलना कम हो गया है. जब तक बाऊ जी थे, घर पर होली में गुझिया बनाती थी क्योंकि बाऊ को बहुत पसन्द थी. अब नहीं बनाती. होली भी अब दिल्ली में ही मनती है दोस्तों के साथ. लेकिन आज भी मुझे ये त्यौहार प्रिय है.

डॉ टी एस दराल said...

रंगों में रंग कर जब सब एक जैसे नज़र आते हैं , तो सारे कष्ट भूल जाते हैं।
होली की शुभकामनायें।

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं ..मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं..

आशा जोगळेकर said...

रंगों की कर जंग , मृदंग- चंग गीत सुनाएँ

मलते हुए गुलाल ,संग अबीर लगाएँ.,

पिचकारी की धार संग रंग खूब नहाएँ,

दूर करें सब बैर ,हृदय प्रेम भर जाएँ.

होली का खूबसूरत चित्रण । राधा कृष्ण का चित्र बडा प्यारा ।

आशा जोगळेकर said...

होली हो रंगभरी मीठी प्यारी ।

Vinnie Pandit said...

अल्पना जी,

आप के व्दारा होली की शुभ कामनाएं देने के लिये धन्यवाद।आप का यह कहना सच हैकि होली के रंग खेलने के बाद उतारने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। खास कर आज रंगों में ऐसी मिलावट कर दी जाती है जो स्वास्थय के लिये हानिकारक होते हैं। हर पर्व का अपना बहुत महत्व होता है बशर्ते उस को मनाने वाले शालीनता बनाये रखें।

होली की शुभकामनाओं के साथ।

विन्नी

Vinnie Pandit said...

अल्पना जी,

आप के व्दारा होली की शुभ कामनाएं देने के लिये धन्यवाद।आप का यह कहना सच हैकि होली के रंग खेलने के बाद उतारने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। खास कर आज रंगों में ऐसी मिलावट कर दी जाती है जो स्वास्थय के लिये हानिकारक होते हैं। हर पर्व का अपना बहुत महत्व होता है बशर्ते उस को मनाने वाले शालीनता बनाये रखें।

होली की शुभकामनाओं के साथ।

विन्नी

Rajendra Kumar said...

होली के अवसर पर बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति,आभार.

"स्वस्थ जीवन पर-त्वचा की देखभाल:कुछ उपयोगी नुस्खें"

दिगम्बर नासवा said...

रंगों की कर जंग , मृदंग- चंग गीत सुनाएँ
मलते हुए गुलाल ,संग अबीर लगाएँ.,
पिचकारी की धार संग रंग खूब नहाएँ,
दूर करें सब बैर ,हृदय प्रेम भर जाएँ....

मधुर भाव लिए .. प्रेम को सचमें जगाता है होली का त्यौहार ...
ओर मेरा तो सबसे प्रिय त्यौहार है ... कोशिश रहती है यहाँ भी अड़ोसी पड़ोसियों के साथ मिल के मनाएं ... रंगों के साथ मिठाई का भी आनंद में ...
आपको होली की शुभ-कामनाएं ...

vandana gupta said...

होली की शुभकामनायें।

Mukesh Kumar Sinha said...

bina khele itti pyari si rachna...:)
shubhkamnayen...alpana jee

Vinnie Pandit said...

अल्पना जी,

आप के व्दारा होली की शुभ कामनाएं देने के लिये धन्यवाद।आप का यह कहना सच हैकि होली के रंग खेलने के बाद उतारने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। खास कर आज रंगों में ऐसी मिलावट कर दी जाती है जो स्वास्थय के लिये हानिकारक होते हैं। हर पर्व का अपना बहुत महत्व होता है बशर्ते उस को मनाने वाले शालीनता बनाये रखें।

होली की शुभकामनाओं के साथ।

विन्नी

काजल कुमार Kajal Kumar said...

होली देखने में तो अच्छी लगती है पर मनाने में लभेड़... :)

Vikesh Badola said...

होली के आपके अनुभव और गीत दोनों में एक गहरा दर्शन समाविष्‍ट है। और रही होली पर मन की बात कहने और उस पर आपका बुरा न मानने की तो कहते हुए लाज आ रही..............। वैसे मेरी बात असभ्‍य नहीं है। आपको रंगों की असीम शुभकामनाएं।

Arvind Mishra said...

आपकी भी होली बहुत शुभ हो !

Arvind Mishra said...

आपकी भी होली बहुत शुभ हो !

ताऊ रामपुरिया said...

होली तो बस होली है. ना कोई छोटा ना बडा...ना जात ना पांत. सबके अपने अपने माध्यम हैं. शायद इस फ़ाल्फ़ुन मास की महिमा ही ऐसी है कि सभी आम के पेड की तरह बौरा जाते हैं.

आपने बहुत खूबसूरती से होली त्योंहार को अभिव्यक्त किया है. होली की बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

Shashi said...

nice poetry and colors . Happy holi to u and family .

Prakash Govind said...

मैंने भी लगभग पिछले पंद्रह वर्षों से होली नहीं खेली
मुझे होली का त्यौहार पसंद नहीं लेकिन भागता भी नहीं ... :-)
शर्त ये है प्रेम और शान्ति से हल्का सा गुलाल लगाओ गले मिल लो .. बस !!
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आपको होली की बहुत बहुत बधाई / शुभ कामनाएं

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बसंत फागुन और होली,,,बसन्ती बयार और उपर से होली का त्यौहार हो तो रंगों में गुल तो खिलेगा ही,,,बहुत उम्दा ,,,

होली की हार्दिक शुभकामनायें!
Recent post: रंगों के दोहे ,

वन्दना अवस्थी दुबे said...

सुन्दर फ़ागुनी गीत है अल्पना. शुभकामनाएं.

Anonymous said...

Holi Ki bahot bahot shubhkamnayein aapke liye ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...सादर!

Madan Mohan Saxena said...

बहुत सराहनीय प्रस्तुति.बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में. दिल को छू गयी. आभार !

ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज
यारों कब मिले मौका अब छोड़ों ना कि होली है.

मौसम आज रंगों का , छायी अब खुमारी है
चलों सब एक रंग में हो कि आयी आज होली है

Naveen Mani Tripathi said...

महक-महक उठती है बगिया ,
बहती -बहती मदमस्त पवन है ,
लहकी-लहकी झूमे सरसों
बहके-बहके से है टेसू ,
जाने किस की धुन में अलसी मगन है!
bahut sundar rachana .....holi pr hardik badhai Alpana ji

विजय राज बली माथुर said...

होली मुबारक

अभी 'प्रहलाद' नहीं हुआ है अर्थात प्रजा का आह्लाद नहीं हुआ है.आह्लाद -खुशी -प्रसन्नता जनता को नसीब नहीं है.करों के भार से ,अपहरण -बलात्कार से,चोरी-डकैती ,लूट-मार से,जनता त्राही-त्राही कर रही है.आज फिर आवश्यकता है -'वराह अवतार' की .वराह=वर+अह =वर यानि अच्छा और अह यानी दिन .इस प्रकार वराह अवतार का मतलब है अच्छा दिन -समय आना.जब जनता जागरूक हो जाती है तो अच्छा समय (दिन) आता है और तभी 'प्रहलाद' का जन्म होता है अर्थात प्रजा का आह्लाद होता है =प्रजा की खुशी होती है.ऐसा होने पर ही हिरण्याक्ष तथा हिरण्य कश्यप का अंत हो जाता है अर्थात शोषण और उत्पीडन समाप्त हो जाता है.

सुज्ञ said...

होली की हार्दिक शुभकामनायें!!!

शोभना चौरे said...

होली तो "होली "। लिए इस सुन्दर गीत के लिए आभार ।

Manav Mehta 'मन' said...

बहुत बढ़िया

P.N. Subramanian said...

होली की शुभकामनायें with Gujia Made in India.

perolain said...

Dear Alpana,

Wonderful composition...
I am truly impresssed and never miss your blog. you write very well and in the most simplest manner..
Keep up the good work.
Its what we can all relate to in this over ambitious world... and get down to reality sometimes..right?
good luck! and great work!!