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March 30, 2013

छूटते हाथ...


मैं ढूँढती हूँ तुम्हारे भेजे  पन्नों पर उन शब्दों को जिनसे तुमने मुझे खरीदा था।
हाँ,खरीदा ही तो था तुमने मुझे  उन शब्दों से  ,
किश्त दर किश्त मेरा मन उन शब्दों के बदले बिकता चला  गया था 
हार गयी थी मैं खुद को तुम्हारी  बिछायी शब्दों की बिसात पर




जब भी मैं अकेला पाती थी खुद को, तो उन्हीं शब्दों में तुम को पाया करती थी।
खुद को माला के धागे सा बना कर उन शब्दों को पिरो लिया था ।

सोचा था ,मुझ में पिरोये गए इन मोतियों को मुझ से बेहतर कौन संभाल पायेगा ,कौन सुरक्षित रख पायेगा?
लेकिन आज असहाय मन  ,धागा तो है पर सारे मोती न जाने कहाँ गुम हो गए?
उन पन्नों को सहेज रखा था जिनमें उन  शब्दों का कभी रहना होता था।
वहीं से तो चुने थे मैंने ....वे   भी तो सभी कोरे लग रहे हैं.।
शब्द वहाँ  वापस नहीं लौटे!

याद आता है ,उस सांझ के धुंधलके में ,न जाने कैसे हलकी सी आँख लगी और
 उन कुछ पलों में ही  सारे दृश्य  बदल गए थे ।
बदल गया आकाश ,बदल गयी फिज़ा..
बादलों का रंग भी स्याह हो गया था ,ज्यूँ-ज्यूँ अँधेरा गहरा हुआ , बादल पानी बनते गए।
लगता है शायद उसी बरसात में  वे  मोती पिघल कर  बह  गए हैं ।

34 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

शब्द नि:शब्द

वाणी गीत said...

गोया कि शब्द भी समय के साथ अपना रूप दिखाते हैं !

Brijesh Singh said...

बहुत सुन्दर!

Himanshu Kumar Pandey said...

अद्भुत! ऐसी रचनाओं को बस महसूस कर पीया जा सकता है..कुछ खोजना, चुनना और कहना बेमतलब की बात है।
बहुत आभार।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर भावों की अभिव्यक्ति

RECENT POST: होली की हुडदंग ( भाग -२ )

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मन के भाव ब्लाग पर.

vandana gupta said...

बेहद उम्दा भाव

Kalipad "Prasad" said...


बहुत सुन्दर एहसास
latest post कोल्हू के बैल
latest post धर्म क्या है ?

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर एहसास,बेहतरीन प्रस्तुति.

Ratan singh shekhawat said...

अद्भुत !!

Ratan singh shekhawat said...

अद्भुत

Anonymous said...

No words .. too deep to find bottom .. Pani m ghol ker pee lene wali rachna .. suna hai mann ke panne per likhe shabd anmit hote hain .. keep up the good work .. Regards...

Vikesh Badola said...

खामोश सा अफसाना पानी पे लिखा होगा

ना तुमने सुना होगा ना हमने कहा होगा

अरुन शर्मा 'अनन्त' said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (31-03-2013) के चर्चा मंच 1200 पर भी होगी. सूचनार्थ

Tanuj arora said...

बहुत अच्छा लिखा आपने.एक अंतहीन गहराई में जैसे उतर गयी ये पंक्तियाँ खासकर शुरुआत इस कविता की "मैं ढूँढती हूँ तुम्हारे भेजे पन्नों पर उन शब्दों को जिनसे तुमने मुझे खरीदा था।"

Shashi said...

so beautifully written a beautiful creation of words ! Words which have deep meaning.

ताऊ रामपुरिया said...

भावों को यूं शब्दों में बांध लेना आसान नही है, बेहद अदभुत शब्द संयोजन, जो पाठक पर सटीक छाप छोडता है, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

डॉ टी एस दराल said...

गहन अभिव्यक्ति।

प्रवीण पाण्डेय said...

शब्द, प्रतिशब्द,
चाप, निष्ताप।

Maheshwari kaneri said...

गहन अभिव्यक्ति।बहुत सुन्दर!

jyoti khare said...

वाह बहुत सही और सार्थक सच को व्यक्त
करती रचना
बहुत बहुत बधाई

आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
jyoti-khare.blogspot.in

तुषार राज रस्तोगी said...

वाह बहुत सुन्दर |


कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

डॉ. मोनिका शर्मा said...

गहन..... शब्दों के रूप अनेक ...

P.N. Subramanian said...

पढ़कर उमादेवी (टुन टुन) का यह गाना यादआगया "अफसाना लिख रही हूँ"

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... शब्द भी तो जिंदगी की तरह बदलते रहते हाँ आपना रूप ओर अंत में बरस जाते हैं उम्र की तरह ... फिर नहीं मिलते कभी ...
खयालात की अजनबी रास्तों पे उड़ान ऐसी ही होती है ...

Kailash Sharma said...

गहन भावमयी अभिव्यक्ति..बहुत सुन्दर

सुमन कपूर 'मीत' said...

भावमयी ..निशब्द हूँ

Ankur Jain said...

भावपूर्ण..सुंदर प्रस्तुति।।।

Arvind Mishra said...

मन को गहरे छू लेती अद्भुत शिल्प की गद्य कविता !

शिवनाथ कुमार said...

शब्दों ने निःशब्द कर दिया
बहुत खूब, लाजवाब
साभार!

P.N. Subramanian said...

"मोती पिघल कर बह गए हैं" बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.

PRAVESH said...

bahut pyara likha hai.... adbhut....

PRAVESH said...

bahut pyara likha hai ....Adbhut...........

Shashi said...

touching and beautifully expressed .