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January 25, 2013

पुकार


हर वर्ष की भांति आज 26 जनवरी को हम अपना गणतंत्र दिवस मना रहे हैं । 
हम भारतीय कुछ अधिक ही आशावादी हैं,होना भी चाहिए लेकिन इन कुछ सालों में राष्ट्र का आशानुरूप  उत्थान नहीं हो सका बल्कि पतन ही हो रहा है । इसलिए अब और नहीं !

हाल ही की कुछ घटनाओं,दुर्घटनाओं  और नेताओं के कुछ गैर ज़िम्मेदार बयानों से जो नुकसान देश की छवि को पहुंचा है वैसा पहले कभी नहीं देखने को मिला । 

हम से लोग जब उन खबरों पर  सवाल करते हैं  तो कोई जवाब देते नहीं बनता।आज देश की ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?

न केवल सत्ताधारी बल्कि वे  लोग भी हैं जो चुनाव में  अपने विवेक से मतदान नहीं करते या मतदान अधिकार का प्रयोग ही नहीं करते और बाद में गलत लोगों के हाथ में सत्ता चले जाने पर शोक मानते हैं ,अफसोस करते हैं। आज का भारत युवाओं का  भारत है सारी दुनिया की निगाह इस पर टिकी है ,उनके लिए एक पुकार है क्योंकि देश को गणतंत्र बने इतने  साल गुज़र गए मगर आगे ले  जाने की बजाए  देश को  नैतिक, मौलिक व सांस्कृतिक पतन की ओर धकेला जा रहा है। 

अब भी समय है जागने का ,युवाओं को अपनी शक्ति पहचानने का ,अपना स्वाभिमान जगाने  अन्यथा फिर से गुलाम होते देर नहीं लगेगी ।
 और इस बार गुलाम हुआ तो अगले 500 सालों तक भी कोई आज़ाद नहीं करा सकेगा। पाश्चात्य रंग में पूरा रंगने पर भी आप उनके देश में गैर ही हैं और अपनी धरती तब भी आप को अपना ही कहेगी। 

हमें आज भी खुद के भारतीय कहने पर गर्व है ,आनेवाला कल भी इस मान को बनाए रखे इसके लिए  मन से भी हरेक को पहले  स्वयं को  'भारतीय' स्वीकारना  होगा।

पुकार 

मना रहे शुभ पर्व ,ये सन्देस कहना है तुम्हें  ,
आज ही नहीं , हर दिन सजग रहना है तुम्हें  , 

जो फैला रहे घृणा जन-जन में, उनको ढूंढ लो,
कर दो निर्मूल उसको, जिसमें ये विषफल फले ,

बाँटने को देश ,बढ़ रहे फिर से कई जो हाथ हैं ,
अपनी चतुराई  और बाहुबल से उनको तोड़ दो । 

चलने लगी हैं  आँधियाँ,  नीड़  उजड़ने लगे  ,
कर के काबू इन  हवाओं के रूखों  को मोड दो । 

माफ़ी की जगह नहीं , इस बार जो चुके कहीं ,
ये समझ लो आखिरी है युद्ध, फिर दूजा नहीं । 

हो चुका अन्याय बस ,और अब सहना नहीं ,
टूटने लगा  है जो विश्वास, उसको जोड़ दो । 

 खो रही है आस ,और कराहती है भारती ,
 है बहुत  अधीर मन , पुकारती है भारती । 
...........

.............अल्पना वर्मा  ................

20 comments:

RC Mishra said...

गणतन्त्र दिवस की शुभ कामनायें!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सुंदर

काश समय रहते चेत जाएं लोग

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वन्देमातरम् ! गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ!

रविकर said...

प्रभावी प्रस्तुति ||
गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें-

विजय राज बली माथुर said...

अच्छा संदेश है।
गणतन्त्र दिवस की शुभकामनायें-
http://www.divshare.com/download/13868491-5ae

प्रवाह said...

अल्पना जी नवीं पंक्ति में मेरे ख्याल से चूके की जगह चुके होना चाहिये,बहुत अच्छी रचना ,सुंदर भावाभिव्यक्ति ,

शारदा अरोरा said...

bahut badhiya..

Arvind Mishra said...

पुकार ही नहीं यह आह्वान भी है ! गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं!

डॉ टी एस दराल said...

युवा शक्ति में बहुत ताकत है। बस मार्गदर्शन की ज़रुरत है।
गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें स्वीकारें।

सतीश सक्सेना said...

बढ़िया सन्देश और आवाहन ...
शुभकामनायें !...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

देश के 64वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-01-2013) के चर्चा मंच-1137 (सोन चिरैया अब कहाँ है…?) पर भी होगी!
सूचनार्थ... सादर!

प्रवीण पाण्डेय said...

माँ न कहे कि बेटे मेरे, वक़्त पड़ा तो काम न आये।

रचना दीक्षित said...

आपकी पुकार कुबूल हो.

आपको ६४ वें गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

प्रभावी सुंदर प्रस्तुति,,,,

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,
recent post: गुलामी का असर,,,

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

उम्दा प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई...६४वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं...

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक ढंग से संदेश दिया आपने, जितनी जल्द जाग जायें उतना ही बेहतर होगा. हार्दिक शुभकामनाएं.

रामराम.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

अति सुन्दर ,भावपूर्ण रचना ...

kumar zahid said...

बहुत अच्छे विचार एवं भाव

Pallavi saxena said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा है ... अब समय आ गया है इन हवाओं का रुख मोड़ने का समय आ गया है ...