Search This Blog

February 3, 2013

अनुत्तरित प्रश्न ?




७  दिन हो चुके हैं। 
दो दिन पूर्व उसका पार्थिव शरीर भारत उसके राज्य केरल में ले जाया जा चुका है।
वो ' स्मृति 'थी ,उम्र ३० बरस .मैं उससे नवंबर में दो बार मिली थी.उसके बेटे को जो पाँचवीं कक्षा का छात्र है ,मैं विज्ञान पढाती थी । 
वह अपने बेटे की पढ़ाई के बारे में 'ओपन हाउस' में मिलने आयी थी.अपने एकलौते बेटे की हर अध्यापिका से वह मिली। उसका विवाह 12 वीं  करते ही 18 वर्ष में  हो गया था।12 साल शादी को हो चुके थे।
अपने एकलौते बेटे से उसे बहुत प्यार था,उसकी पढ़ाई का बहुत ध्यान रखती थी। 
उसका बेटा कक्षा में पाठ से सम्बन्धित ,यहाँ -वहाँ के भी बहुत सवाल किया करता था ,इसलिए भी मेरी नज़र में वह एक जिज्ञासु और बुद्धिमान  छात्र था। 
उसके बाद वह दिसंबर में वह  वार्षिक समारोह में हमसे मिली थी,हम कुछ अध्यापिकाओं ने उस से हमारी कुछ ग्रुप फोटो  खींचने के लिए कहा था। 
और हमने उसकी नयी ड्रेस की तारीफ भी की थी.सब से हँसने-बोलने वाली थी। 
इस बार जनवरी ३१ को होने वाले ओपन हाउस के लिए उस ने नयी ड्रेस  तैयार की थी। 
कौन जानता था कि उसे पहनने का मौका उसे कभी नहीं मिलेगा। 

पिछले हफ्ते जब हमें यह खबर मिली कि उस ने ख़ुदकुशी कर ली है ,तो यकीन नहीं हुआ। 
एक आम प्रतिक्रिया स्त्रियों के मुंह से ही  मैंने सुनी --कि क्या ऐसा करने से पहले उस ने अपने बेटे के बारे में भी नहीं सोचा?
मैं यह सोच रही थी कि उस ने ऐसा किया ही क्यों?वे क्या परिस्थितियाँ थीं जिनसे वह मजबूर हो गई ,आर्थिक तंगी या शारीरिक कष्ट तो कोई था नहीं ..फिर ?

बिलकुल उसके पड़ोस में रहने वाली हमारी सहकर्मी से उसकी बातें होती रहती थीं। 
दोनों के बच्चे भी आपस में मित्र थे । 
ख़ुदकुशी करने से महज पाँच मिनट पहले ही उसने अपने बेटे को खेलने के लिए उस के घर छोड़ा था । 
इसका अर्थ यह है कि उसने यह निर्णय बहुत सोच समझ कर पूरी तैयारी कर के लिया था। 

वह  बाहर से तो देखने में उत्साह और जीवन से भरपूर लगने वाली थी !

फिर कारण क्या रहे होंगे जिसने एक जीवन को हारने पर मजबूर कर दिया ?
  • पति-पत्नी के बीच उम्र का १८ साल का  फासला ?
  •  उन दोनों के  स्वभाव में ज़मीन -आसमान का  अंतर ?
  • पति का अत्यधिक पसेसिव होना ?
  •  स्त्री का अपनी मह्त्वाकांक्षाओं के बोझ को उठा न पाना ?
  • स्त्री का अपने मन की बातों को किसी से बांटे बिना पीते जाना ?इतना कि वे उसके लिए  ज़हर बन गयीं?
  • या फिर दाम्पत्य जीवन में उठे  तनाव को अपनों से भी बताने में  झिझकना?
  • शायद वह किसी अपने को  दुःख को बता कर दुखी न करना चाहती हो?
  • पति-पत्नी के सम्बन्धों के सामान्य न होने पर अगर कोई स्त्री आत्महत्या करती है तो लोगों की यह एक आम   प्रतिक्रिया भी सुनने को मिलती है  [यहाँ भी मिली ]कि अगर दोनों के बीच बनती नहीं थी  तो तलाक ले लेते ,मरने की क्या ज़रूरत थी?
  • कहने वाले कह गए बिना यह सोचे कि क्या हमारे समाज में आज भी  तलाकशुदा स्त्री को सम्मान मिलता है?
  • या तलाकशुदा होने के बाद उसके खुद के घरवाले उसे हेय दृष्टी से नहीं देखेंगे?ऐसे निर्णय भी लेना आसान तो नहीं होता.
  • शायद उस के लिए मानसिक दवाब को झेल  सकने का आसान रास्ता मौत रही होगी।
  • मानसिक दवाब या मन के एकाकीपन को अगर उसे बाँटने का रास्ता मिलता तो शायद ऐसा न होता?
  • वह मन से बीमार थी तो क्या  वह सहानुभूति की पात्र नहीं थी ?मृत्यु के बाद भी ऐसी स्त्रियों को धिक्कारा ही जाता है उनके पक्ष पर कोई एक बार भी क्यों नहीं सोचता?
  • दाम्पत्य जीवन में  एकाकीपन क्या एक ही को  सालता है ?दूसरे की मनः  स्थिति के बारे भी क्या कोई सोचता है?
कारण जो भी रहे हों ,हताशा से  हार कर एक और ज़िंदगी अपने हाथों ही दम तोड़ गई ।

एक खबर के अनुसार  विशेषज्ञ   प्रवासी भारतियों में  बढ़ रही आत्महत्याओं की घटनाओं का  अध्ययन कर रहे हैं ताकि उनके कारणों का पता चल सके।
भारतीय दूतावास ने तो एमिरात में रह रही भारतीय महिलाओं के लिए किसी भी परेशानी में सलाह के लिए एक अलग फोन लाईन ०२४४ ९२ ७००  भी खोली हुई है ।
आप के आसपास भी कोई व्यक्ति डिस्ट्रेस /मानसिक तनाव में हो तो  उस की बात /परेशानी  सुनने के लिए ५ मिनट अवश्य निकालें शायद सिर्फ सुन लेने भर से एक जीवन हारने से बच जाए!

28 comments:

डॉ टी एस दराल said...

सही कहा।
अपने ग़म को किसी के साथ शेयर करने से ग़म कम होता है। प्रवासी भारतियों में भी तनाव के अनेक कारण हो सकते हैं। बस दूर से पता नहीं चलता। लेकिन आत्महत्या कायरपन है। मानसिक कमजोरी भी।

शारदा अरोरा said...

बहुत दुःख हुआ ये पढ़ कर ...मरना भी तो आसान नहीं होता ...जीवन में प्यार और सहजता ..बरदाश्त करने की शक्ति होना लाजिमी है ...एक उम्र लगती है ये समझने में ही ....

Sunil Kumar said...

बहुत से प्रश्नों के उत्तर मांगती हुई सार्थक पोस्ट.....

ताऊ रामपुरिया said...

आपके द्वारा उठाए गये सभी प्रश्न ज्वलंत हैं जो दिमाग को झकझोर देते हैं. वर्तमान सामाजिक ताने बाने में कुछ तो ऐसा बदलाव आना चाहिये जिससे भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से रूबरू ना होना पडे.

रामराम.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यदि‍ कोई कुछ भी बात करना चाहे तो उसे ज़रूर सुनना चाहि‍ए भले ही वह डि‍स्‍ट्रेस में भी न दिखता हो. कि‍स चेहरे के पीछे क्‍या है, बहुत मुश्‍कि‍ल है जान पाना, धीरे धीरे ही पता चलता है. कि‍न्‍तु जीवन की क्लि‍ष्‍टताएं प्राय: इतना समय नहीं देतीं ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

जीवन बहुत जटिलताओं से भरा है.

प्रवीण पाण्डेय said...

मन में मन का रोष न फैले,
जीवन त्यागे स्वाद कसैले,
एक आस है, जीवन जीना,
क्यों पलते घर दंश विषैले।

Chaitanyaa Sharma said...

देश से दूर आ बसे लोगों में , खासकर महिलाओं में अवसाद और अकेलापन बहुत होता है | जो महिलाएं कामकाजी भी नहीं होतीं उनका वक्त तो काटे नहीं कटता| ऊपर से कोई बोलने बतियाने को भी नहीं..... बाकि जो कारण आपने दिए हैं वो तो पड़ताल करने योग्य हैं ही......

डॉ. मोनिका शर्मा said...

देश से दूर आ बसे लोगों में , खासकर महिलाओं में अवसाद और अकेलापन बहुत होता है | जो महिलाएं कामकाजी भी नहीं होतीं उनका वक्त तो काटे नहीं कटता| ऊपर से कोई बोलने बतियाने को भी नहीं..... बाकि जो कारण आपने दिए हैं वो तो पड़ताल करने योग्य हैं ही......

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

दुखद ! असामान्य उम्र फासला, महत्वाकांक्षाये ( जिसमे दम्पति परस्पर सोचता है कि दूसरा पक्ष उसके हिसाब से चले ) एकाकीपन इत्यादि जो कारण आपने गिनाये, अत्यधिक स्ट्रेस की स्थिति में कोई सा भी कारण इसकी वजह बन गया होगा ! क्या कहें हमारा पुरुष समाज तो पहले से ही ग्रेट है लेकिन महिलाये अगर बुरा न माने तो यह भी कहूँगा कि आधुनिक समाज में युवतियों में भी त्याग की भावना, जोकि same times गृहस्थी की गाडी खीचने के लिए मोबेल आयल का काम करता है उसमे गिरावट आई है।

अन्नपूर्णा said...

आत्महत्या का कदम उठाना मुझे कभी भी सही नहीं लगा .... जीवन में संघर्ष करना चाहिए .. हल अवश्य निकलेगा .... वैसे अल्पना जी आपको बहुत दिन बाद नेट पर देखा, आशा हैं आप बनी रहेगी और फेसबुक पर भी सक्रिय हो जाएगी

Anonymous said...

आत्महत्या का कदम उठाना मुझे कभी भी सही नहीं लगा .... जीवन में संघर्ष करना चाहिए .. हल अवश्य निकलेगा .... वैसे अल्पना जी आपको बहुत दिन बाद नेट पर देखा, आशा हैं आप बनी रहेगी और फेसबुक पर भी सक्रिय हो जाएगी
annpurna

दिगम्बर नासवा said...

दुखदाई खबर ... सच में गल्फ में रहने वालों का मानसिक तनाव बढ़ता ही जा रहा है ... वजह कुछ भी हो ... ओर किसी का दुःख बाँट लेने से, उसकी बात सुन लेने से दूसरे का दुःख कुछ कम हो जाता है ...

vandana gupta said...

आत्महत्या जैसा कदम इंसान तभी उठाता है जब उसे सारे दरवाज़े बंद नज़र आते हैं ऐसे मे उसे एक गहरे संबल की जरूरत होती है ।

Shashi said...

The only way to stay well is stay connected with friends and family . I think this girl was given less love , less education ,early marriage and non cooperation from husband . Money is not every thing . A girl should never get married with unknown boy I mean arranged marriage is failure sometimes if both husband and wife cannot adjust even after marriage .

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

मेरे ख्याल से आत्महत्या करना कायरपन और मानसिक कमजोरी है,,,,,

RECENT POST बदनसीबी,

स्वप्न मञ्जूषा said...

क्या दुःख था उसे क्या पता !
बहुत आसान है कह देना, किसी के लिए, कुछ भी, लेकिन आत्महत्या के लिए भी हिम्मत की ही ज़रुरत होती है ..जान देना भी इतना आसान नहीं होता
हँसते हुए चेहरों के पीछे ही उदासी लिए चेहरे होते हैं।

आपने कहा तो है कि अगर कोई स्ट्रेस में नज़र आये तो उसे 5 मिनट देकर उसकी बात सुने, लेकिन उन चेहरों का क्या होगा ...तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो, क्या ग़म है जिसको छुपा रही हो ??

आपलोगों को भी कहाँ पता चला, मुस्कुराते चेहरे का सूनापन ...और यकीन कीजिये अब ऐसे चेहरों की ही भरमार है ...
कितना आसान है कहना जीवन में संघर्ष करना चाहिए, लेकिन जीवन ही अगर संघर्ष बन जाए और जीवन का एक क़तरा भी नज़र न आये तो ??
बहुत दुखद !

सतीश सक्सेना said...

आत्महत्या कायरता की निशानी है , जीवन में संघर्ष और उतार चढाव न हों तो जीवन क्या ??

Arshad Ali said...

MAINE EK ADDHYAN ME PAYA KI AATM HATYA KA PRAYAAS EWM AATM HATYA UN LOGON NE KIYA HAI JINKE AAS PAAS EK BHI INSAN ,INSANI SAMVEDNAAON KO SAMJHNE WALA NAHI THA...

MUJHE DUKH HOTA HAI...KI MAI HAR US JAGAH PER NAHI PAHUNCH PATA JAHAN AATM HATYA KI SAZIS RACHI JATI HO..

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

उपयोगी जानकारी, सार्थक लेख

समाज की असल तस्वीर भी ऐसी ही है..

प्रवाह said...

आपा- धापी जीवन का हिस्सा बन गयी है ,किसी के पास किसी दूसरे के लिये समय ही नहीं बचा काम -काजी पति के पास ना पत्नी के लिए समय है ना पत्नी के पास पति की परेशानिया जानने का ,एइसे में मन की उलझनों में उलझा व्यक्ति आत्महत्या जैसे कृत्या करने पे मजबूर हो जाता है ,अकेलापन हरी - भरी जिंदगी को बर्बाद कर देता है ,सार्थक चर्चा प्रवासी लोगो के जीवन के दुःख दर्द से परिचित कराने का प्रयास ,बहुत बहुत साधुवाद

Ankur Jain said...

कुछ प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाते हैं.... :(

Madan Mohan Saxena said...

बेह्तरीन अभिव्यक्ति

P.N. Subramanian said...

हम भी अवसाद के घेरे में आ गए यह सब पढ़ कर. ना मालूम क्यों भारत में केरल ही एक्मात्र रज्य है जहाँ की महिलाये आत्म हत्या की तरफ़ उन्मुख हो जाती हैं जब की वे पढ़ी लिखी होती हैं.

Arvind Mishra said...

ओह -आपके सावालों के उत्तर अब कौन देगा ?मन सहसा बहुत दुखी हो गया

Vinnie Pandit said...

प्रस्तुतीकरण प्रभाव पूर्ण है और देर तक दिलो-दिमाग पर प्रभाव छोड़ जाता है।सोचने को मजबूर करता है।

विन्नी

महेन्‍द्र कुमार said...

आज ही पत्रिका मे पढ़कर आपके ब्‍लॉग मे लघु कथा पढ़ी एक आशा की किरण नजर आई कि आपनें महिलाओं की समस्‍याओं को विनम्रता के साथ कथा के माध्‍यम से लिखा । शायद यही प्रयास समाज को बदलने के लिये मील के पत्‍थर साबित होंगे।

अल्पना वर्मा said...

नमस्ते महेंद्र जी,

आप की टिप्पणी मे 'पत्रिका 'का ज़िक्र है.
क्या मुझे बता सकते हैं कि किस पत्रिका में क्या ज़िक्र हुआ है?
क्या मेरे ब्लॉग के बारे में लिखा है या मेरे इस लेख के बारे में?

जानने को उत्सुक हूँ,कृपया जानकारी दिजीए.

साभार,