July 9, 2012

गर्मी की छुट्टियाँ !



आखिरकार वो दिन आ ही गए जिनका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था ..जी हाँ

इस तपती दुपहरी में स्कूल जाने वाले बच्चों और शिक्षकों के लिए सुकून के दिन !

कल रविवार जुलाई ८ से गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो गयी ..पूरे ६० दिन की!


सितम्बर ४ से स्कूल फिर खुल जायेंगे और फिर इंतज़ार करना होगा सर्दियों के ब्रेक का क्योंकि इस बीच कोई भी अवकाश नहीं होगा.
इस साल ईद भी इन्हीं छुट्टियों में ही पड़ रही है ..पूरे ३६५ दिन में देखा जाए तो स्कूल के अवकाश गिनती  के ही हैं गर्मी और सर्दी के ब्रेक निकाल दें  तो ...साल के ५-६ बस !

न तो यहाँ 'रैनी डे' होता है न कोई बंद..न ही प्रोटेस्ट आदि...स्कूल को अपनी  कोई छुट्टी [जैसे  दिवाली की एक दिन की ] घोषित करनी हो तो अबूधाबी सरकारी शिक्षा विभाग से अनुमति लेनी होती है .



स्कूलों में छुट्टियों के विषय में पिछले दिनों कुछेक  पोस्ट पढ़ीं जिन में भारत के स्कूलों में  'जब देखो तब छुट्टियाँ' होने पर चिंता व्यक्त की गयी थी.

प्रमुख पत्रकार और लेखक राजेश कालरा जी ने तो यह भी लिख दिया 'जब गर्मी पड़ती है तब स्कूलों को बंद कर दो या छुट्टियां बढ़ा दो।  यही सर्दी में करो। ......इस तरह तो बच्चों को पोंगा बनाने की तैयारी है.

राजेश जी ने एक और अच्छी बात कही जिससे मैं भी सहमत हूँ,उनके अनुसार -:
 ' हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी नींव है जो इस सख्ती से ही बनती है। अच्छा-बुरा तो पता नहीं, लेकिन जो इस सख्ती की आग से तप कर निकलते हैं वे उच्च शिक्षा के दबाव को बहुत अच्छी तरह संभाल पाते हैं। ऐसे ही नहीं हमारे टॉप कॉलेजों से पढ़ने वाले स्टूडेंट दुनियाभर की यूनिवर्सिटियों में अव्वल आते।

पिछले दिनों अबूधाबी एडुकेशनल मंत्रालय ने जब सख्ती से जुलाई ५ तक बच्चों के स्कूल  चलाने की बात कही ,बढ़ती गर्मी की दलीलों को स्वीकारा नहीं तब सभी को बुरा तो बहुत लगा लेकिन अब राजेश जी की बात से उनकी सख्ती समझ आती है कि अगर हमें भावी पीढ़ी को चुनौतियाँ सहने की आदत डालनी है तो  शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और नियमबद्धता भी ज़रुरी है.

भारत में बिजली ,पानी की किल्लत है लेकिन यहाँ बिजली ,पानी की कोई दिक्कत नहीं है ,एक कक्षा कक्ष में दो ऐ सी ,दो साइड के पंखे ,एक बीच में पंखा लगा हुआ होता है ३३ से अधिक छात्र एक कक्षा में नहीं होते. इसलिए यहाँ ऐसी  सख्ती से काम चल जाता है .
भारत के सम्बन्धित अधिकारियों को अवश्य ही मूलभूत सुविधाएँ स्कूलों को मुहय्या कराने के लिए जल्द जल्द से कदम उठाने चाहिए.

एमिरात में लगभग पूरा साल ही पढते -पढ़ाते बीतता है तब जा कर हर कक्षा में समय  से सिलेबस खतम कर पाते हैं और रिविशन का समय भी  मिल जाता है.भारत के स्कूलों में इतनी अधिक सरकारी -गैरसरकारी  छुट्टियाँ होने के बाद उनके सिलेबस कैसे खतम हो पाते हैं ,मेरी समझ में नहीं आता !
क्या भारत  के शिक्षा अधिकारी इस समस्या से अनजान हैं?

यही आनेवाली  पीढ़ी आने वाले देश की  कर्ता -धर्ता होगी  ,इनका आज से ही ध्यान रखना  होगा  अन्यथा भविष्य 'अपने देश और इस के सिस्टम से' प्रेम करने वाले कितने बचेंगे ,यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है.


खैर बात कहाँ से निकली और कहाँ तक पहुँची!
'छुट्टियाँ शुरू हैं'...बस कुछ दिन यही याद रखना है!

23 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाह आज यहाँ स्कूल खुल गए वहां बंद :) अच्छा है एन्जॉय करो ..और यहाँ आओ तो मिलना न भूलना :)

काजल कुमार Kajal Kumar said...

छुट्टि‍यां मुबारक. हमारे यहां तो छुट्टि‍यां भी राजनैति‍क हथि‍यार हैं /:-)

वन्दना अवस्थी दुबे said...

अल्पना जी, यहां भी सरकार ने सख्ती बरती और स्कूल बन्द नहीं हुए, दिल्ली या यू.पी. की तर्ज़ पर :) अब आप छुट्टियां मनाइये, और बाद में हमें शानदार संस्मरणों से लाभान्वित कीजिये :)

संगीता पुरी said...

भारत के स्‍कूल विभाग के लोगों के पैसे कमाने के साधन है .. पढाई के लिए तो बच्‍चों को प्राइवेट स्‍कूलों में डालने को अभिभावक मजबूर हैं ..

सागर नाहर said...

यहाँ अक्सर सिलेबस पूरा नहीं हो पाता अल्पना जी। छुट्टियों का आनन्द लीजिए।
बधाई :)

Mired Mirage said...

वहाँ के बच्चों को छुट्टियाँ मुबारक. सिलेबस तो वैसे ही खत्म होता होगा जैसे हमारे समय में होता था या आपके समय में.
घुघूतीबासूती

संतोष त्रिवेदी said...

हम तो अब फिर से काम पर लग गए...छुट्टियाँ खतम !

काश,कुछ दिनों के लिए ऑन-डेपुटेशन आपके यहाँ आ जाता !!

छुट्टियों का मजा बच्चों के लिए अलग ही है !

अल्पना वर्मा said...

@संतोष जी,
बिलकुल बच्चे तो बच्चे ..बड़े भी छुट्टियों में रिलेक्स हो ही जाते हैं ,खासकर शिक्षक लोग!

अनूप शुक्ल said...

छुट्टी मुबारक हो!

दर्शन लाल बवेजा said...

तख्ती पे तख्ती
तख्ती पे दाना
कल की छुट्टी
परसों को आना ...
हमारी तो बस ये वाली ही बची हैं अब

प्रवीण पाण्डेय said...

हमारे देश में पढ़ाई कम, छुट्टियाँ अधिक होती हैं।

expression said...

मौज मस्ती मुबारक हो.....
खूब लिखिए...
:-)

अनु

दिगम्बर नासवा said...

ओहो .. आप टीचर हैं तभी आप ८ को छूटीं .... नहीं तो स्कूल तो २८ से बंद हो गए थे दुबई में तो ... लेकिन जकल गर्मी इतनी ज्यादा हो रही है की कहें आना जाना आसान काम नहीं है ... कभी दुबई की तरफ आना हो तो जरूर आइयेगा हमारे गार्डन में ... इब्न बतूता माल के बगल में है ...

अल्पना वर्मा said...

Dubai mei school jaldi band ho gaye the..
hamare yahan [Al ain mei] FA2 tests 24 th ko khatam hue the aur Open house 4th ko tha.

Yahan authorities ne July 5th se pahle school band karne ki permission nahin di thi.
Buraimi mei to Schools 12th july tak khule hain.:)

Shashi said...

I want to share some thing . I like your blog so much . Every article and song shows how good person you are .You manage to spend time on personal development and of course you are a good writer . I just want to know school education is free over there . I was amazed to know the rising cost of education in India specially in Delhi . I live in US .

अल्पना वर्मा said...

@Shashi Thanks for your sweet comment.
..
In private schools education is not free here.
Public school where only Emiratis and arabs can enroll ,is having free education.
same goes for degree colleges.
But in degree colleges it is much lesser than US [depends in which college you take admission]

Rakesh Kumar said...

आपकी पोस्ट और उस पर हुई टिप्पणियों से शिक्षा
सम्बन्धी अच्छी जानकारी मिली.

छुट्टियों में आप परिवार सहित आराम और स्वस्थ
मनोरंजन के साथ साथ खूब सैर सपाटा करें ऐसी
शुभकामनाएँ हैं मेरी.

बहुत बहुत आभार अल्पना जी.

Arvind Mishra said...

ये छुट्टियां क्यों भारत में बीतें -प्रतीक्षित शुभागमन!
बाकी मसले अकादमीय जगत के जिम्मे!

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

"यही आनेवाली पीढ़ी आने वाले देश की कर्ता -धर्ता होगी ,इनका आज से ही ध्यान रखना होगा अन्यथा भविष्य 'अपने देश और इस के सिस्टम से' प्रेम करने वाले कितने बचेंगे"

बहुत अच्छी लगी आपकी बात
सुन्दर पोस्ट है

mridula pradhan said...

maza lijiye chuttiyon ka.....

आशा जोगळेकर said...

छुट्टियों का लुत्फ उठाइये ।

प्राइवेट में तो सिलेबस ठीक सेे खत्म करते होंगे पर सरकारी स्कूलों में तो घरेलू परीक्षा के लिये जितना खत्म हुआ वही सिलेबस ।

P.N. Subramanian said...

भारत आ जाईये.

Vinnie Pandit said...

In teaching we simply wait for holidays not only children but even teachers every household task waits for holidays to start.
vinnie