February 28, 2010

छलक छलक जाएँ बदरा से रंग


कई
दिनों से धूल भरी आंधियां चल रही थीं.
एक दम से गरमी बढ़ गयी थी लेकिन कल रात हुई बरखा रानी ने मौसम ही बदल दिया.
सुबह भी बादल जैसे थे.

भारत में होली का मौसम है ,माहोल है.मुझ से कल ही एक टिप्पणी में यह पूछा गया था
कि हम यहाँ कैसे होली मनाते हैं?
तो.... यहाँ होली अपने घर में गुलाल लगा कर मना लेते हैं .अगर social सेंटर में सरकारी अनुमति मिल गयी तो वहाँ - घंटा खेल सकते हैं [निर्धारित समय और दिन पर] लेकिन
ऐसा कोई उत्साह या रौनक इस बार नहीं है.
कभी कभी अपने घरों में छोटा सा आयोजन रख लिया तो रख लिया लेकिन इन दिनों बच्चों के एक्साम चल रहे हैं तो इस बार सब शांत हैं!

दुबई में मारवाड़ी /गुजराती समाज के लोग बहुत हैं इसलिए वहाँ फिर भी आप रौनक देख सकते हैं लेकिन अबूधाबी क्षेत्र में स्थिति थोड़ा अलग है .
दुबई में एक पार्क है जहाँ हर साल इस का आयोजन किया जाता है एक साथ मिल कर सामूहिक होली खेली जाती है.दुबई तो दुबई है!:)

****आप सभी को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें ****



छलक छलक जाएँ बदरा से रंग

इसी अवसर पर हलकी फुलकी सी एक कविता प्रस्तुत है-



बरस बाद देखो, फिर होली आई,
सतरंगी घटा, घिर घिर के छाई।
छलक-छलक जाएं बदरा से रंग,
संवर संवर गए देखो फागुन के ढंग !

रंग उड़ें चहुँ दिशा, सूखे और गीले,
लाल ,गुलाबी,हरे ,नीले और पीले।
घूमें डगर डगर , मिलकर सब संग,
नाचे और गायें , बाजे ढोल और मृदंग।

धरती ने ओढ़ ली है रंगों की चुनरिया,
बासंती पवन घूमे इस उस डगरिया!
मस्ताने डोल रहे करते हुडदंग,
सखियाँ भी छोडे़ नहीं, करती हैं तंग।

मीठी प्यार भरी,गुझिया तो खाओ,
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ!
खिलते रहें मधुबन, हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.



-अल्पना वर्मा

70 comments:

विजयप्रकाश said...

छलक-छलक जाएं बदरा से रंग,
संवर संवर गए देखो फागुन के ढंग !
मन को छूने वाली पंक्तियां.
आप सभी को होली की शुभकामनायें

शमीम said...

अच्छी जानकारी. आपको सपरि्वार होली की बधाई और शुभकामनाएं.

बूझो तो जानें said...

होली मुबारक .शुभकामनाएं

M VERMA said...

मीठी व प्यार भरी,गुझिया तो खाओ,
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ!

सुन्दर रचना
होली मुबारक हो

नीरज गोस्वामी said...

मन में रंग भरिये...तन के रंग तो फिर भी छूट जाते हैं...बहुत सुन्दर रचना पढने को मिली है आपकी पोस्ट में...होली की शुभकामनाएं...
नीरज

सुशील कुमार छौक्कर said...

अल्पना जी आप और आपके परिवार को रंगो की होली की ढेरों शुभकामनाएं। होली के दिन रंगो से भरी, शब्दों से खिली, और मीठी गुंजियाँ के संग बहुत सुन्दर और बेहतरीन पोस्ट लगाई है आपने। और इस मौके पर आपकी आवाज में होली का कोई गीत हो जाता तो सोने पे सुहागा हो जाता है। खैर ....। आनंद आ गया जी।

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

अल्पना जी, आदाब

.....धरती ने ओढ़ ली है रगों की चुनरिया
बासंती पवन घूमे इस उस डगरिया...
बेहतरीन रचना.
होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

डॉ. मनोज मिश्र said...

छलक-छलक जाएं बदरा से रंग..
वाह क्या अभिव्यक्ति है,यहाँ तो धूम मची है.
आपको होली की शुभकामनाएं .

निर्मला कपिला said...

होली के रंगों की तरह खूबसूरत रचना। आपको सप्रिवार होली की हार्दिक शुभकामनायें

महेन्द्र मिश्र said...

होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाये और ढेरो बधाई ...

kavita said...

होली के रंगों की तरह खूबसूरत पोस्ट।
होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

डॉ महेश सिन्हा said...

सुंदर
गुझिया देख के तो मुह में पानी आ गया

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

होली की बधाई.

सुलभ § सतरंगी said...

बहुत सुन्दर फाग कविता है...
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ! Waah Waah!
वाकई खूब रंग बरसा है इस बार ब्लॉग पर...
आपको सपरिवार होली की बधाई.

योगेश स्वप्न said...

मीठी व प्यार भरी,गुझिया तो खाओ,
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ!
खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.

sunder manmohak holi kavita. aur chitron ne to rang doona kar diya. gunjhia kha rahe hain alpana ji, aap bhi khaiye.

योगेश स्वप्न said...

han ek baat aur , jo kahna bhool gaya, holi ki apko aur pariwar ko hardik mangalkaamnayen.

Mithilesh dubey said...

होली के पावन अवसर पर लाजवाब प्रस्तुति , आपको होली की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकानायें ।

Kusum Thakur said...

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई !!

श्याम कोरी 'उदय' said...

धरती ने ओढ़ ली है रंगों की चुनरिया,
बासंती पवन घूमे इस उस डगरिया!
मस्ताने डोल रहे करते हुडदंग,
सखियाँ भी छोडे़ नहीं, करती हैं तंग।
.... बहुत सुन्दर ... होली की हार्दिक शुभकामनाएं!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

होली की रंगभरी शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यहां तो घर की मुर्गी दाल बराबर है. आप ज़्यादा अच्छे से समझ सकती हैं इन त्यौहारों का महत्व. ढेरों मंगलकामनाएं.

पवन *चंदन* said...

भल्‍ले गुझिया पापड़ी खूब उड़ाओ माल
खा खा कर हाथी बनो मोटी हो जाए खाल
फिरो मजे से बेफिक्री से होली में,
मंहगाई में कौन लगाए चौदह किला गुलाल
http://chokhat.blogspot.com/

Alka Ray said...

alpana didi
'Bright colors, water balloons, lavish gujiyas and melodious songs' are the ingredients of perfect Holi. Wish you a very happy and wonderful Holi.
- alka

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर said...

जब कोई बात बिगड़ जाए
जब कोई मुश्किल पड़ जाए तो
तो होठ घुमा सिटी बजा सिटी बजा के
बोलो अल्पनाजी "आल इज वेल"
हेपी होली .
जीवन में खुशिया लाती है होली
दिल से दिल मिलाती है होली
♥ ♥ ♥ ♥
आभार/ मगल भावनाऐ
महावीर
हे! प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई-टाईगर
ब्लॉग चर्चा मुन्ना भाई की
द फोटू गैलेरी
महाप्रेम
माई ब्लोग
SELECTION & COLLECTION
♥ ♥ ♥ ♥
आभार/ मगल भावनाऐ
महावीर
हे! प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई-टाईगर

ब्लॉग चर्चा मुन्ना भाई की
द फोटू गैलेरी
महाप्रेम
माई ब्लोग
SELECTION & COLLECTION

प्रकाश पाखी said...

मस्ताने डोल रहे करते हुडदंग,
सखियाँ भी छोडे़ नहीं, करती हैं तंग।


खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.

अल्पना जी,
होली कि शुभ कामनाओं का निराला अंदाज पसंद आया.बहुत सुन्दर कविता है.
आपको और आपके परिवार को होली की शुभ कामनाएं

Dinesh Dadhichi said...

होली के अवसर पर हार्दिक शुभकामनायें

सतीश सक्सेना said...

अल्पना जी !
आपको सपरिवार शुभकामनायें !

ताऊ रामपुरिया said...

अपने बहुत अच्छी जानकारी दी. अक्सर लोग दुबई को ही सब मान लेते है. जबकि दुबई और अबुधाबी मे काफ़ी फ़र्क है. जैसा कि आपने बताया ..शायद अबुधाबी मे उत्तर भारतीय समाज कम है इसलिये होली की कोई रौनक नही हो पाती.

कविता बहुत ही सुंदर. आपको होली की घणी रामराम.

रामराम

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

कविता बहुत अच्छी लगी....
आपको सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!

मनोज कुमार said...

हैप्पी होली।

ज्योति सिंह said...

मीठी व प्यार भरी,गुझिया तो खाओ,
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ!
खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.
gujiyaan to aesi sajai hai ki wahi se swad de rahi hai ,is pavan parv ki haardik shubhkaamnaaye .

mukti said...

वाह!!! होली के शुभ अवसर पर आपने एक साथ कई तोहफ़े दे दिये. एक अच्छी सी पोस्ट, एक प्यारी सी कविता, एक नटखट सा कार्टून और कई मीठी-मीठी गुझिया.
आपको भी होली की ढेर सारी शुभकमनाएँ !!

Udan Tashtari said...

बढ़िया जानकारी मिली..अच्छा गीत!!


ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.


आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

शरद कोकास said...

यह जानकर अच्छा लगा .. होली की शुभकामनायें ।

हिमांशु । Himanshu said...

सुन्दर प्रस्तुति ! आभार ।
होली की हार्दिक शुभकामनायें ।

शुभम जैन said...

होली की हार्दिक शुभकामनायें!

राजकुमार ग्वालानी said...

होली में डाले प्यार के ऐसे रंग
देख के सारी दुनिया हो जाए दंग
रहे हम सभी भाई-चारे के संग
करें न कभी किसी बात पर जंग
आओ मिलकर खाएं प्यार की भंग
और खेले सबसे साथ प्यार के रंग

Priya said...

Wish you a very happy colourful Holi Alpana..

अमिताभ श्रीवास्तव said...

holi ke saahityik rang me rangna bahut achha lagtaa he.., bahut sundar rachna jab mil jaati he to is rang ka nashaa aour chadne lagtaa he..., aapko hili ki aatmiya shubhkamnaye/

अमिताभ श्रीवास्तव said...

hili- holi*

रंजना [रंजू भाटिया] said...

टूट जाए हर बन्ध
शब्दों का रचे छंद
महके महुआ की गंध
छलके फ्लाश रंग
मिटे हर दिल की दूरी
आओ खेले होली ..

होली की बधाई अल्पना जी बहुत पसंद आई रचना शुक्रिया

दिगम्बर नासवा said...

SUNDAR KAVITA HAI HOLI PAR .. HAMAARE DUBAI MEIN TO HOLI KE RANG BIKHARTE HAIN PAR HOLI WAALE DIN NAHI ... 5 MARCH KO 2-3 JAGAH HOLI KA TYOHAAR MANAAYA JAAYEGA .. APNE HI ANDAZ MEIN ...

AAPKO AUR AAPKE SAMAST PARIVAAR KO HOLI KI BAHUT BAHUT MANGAL-KAAMNAAYEN ..

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

आपको रंगपर्व की हार्दिक शुभकामनांए.

SURINDER RATTI said...

aLPANA jI,

RANG BIRANGI HOLI KI SHUBH KAAMNAYEIN
Kavita Ke Madhyam Se Holi Ka Shandaar Chitr Khicha Hai.

SurinderRatti

गर्दूं-गाफिल said...

कविता तो अच्छी है लेकिन गुजियों की टोकरी
जी ललचा गया


रंग लेकर के आई है तुम्हारे द्वार पर टोली
उमंगें ले हवाओं में खड़ी है सामने होली

निकलो बाहं फैलाये अंक में प्रीत को भर लो
हारने दिल खड़े है हम जीत को आज तुम वर लो
मधुर उल्लास की थिरकन में आके शामिल हो जाओ
लिए शुभ कामना आयी है देखो द्वार पर होली

Kishore Choudhary said...

धूल भरी आंधियां चल रही थी...
इस पंक्ति को पढ़ते ही मैंने पाया कि आप मेरे आस पास ही हैं कहीं. मौसमों की भी ये अजब आदत हुआ करती है कि वे अपने साथ जिन लम्हों को लाते हैं उन्हें हमेशा के लिए छोड़ जाया करते हैं.
आपका गीत बहुत अच्छा है मीठा सा...

रचना दीक्षित said...

धरती ने ओढ़ ली है रंगों की चुनरिया,
बासंती पवन घूमे इस उस डगरिया!
मस्ताने डोल रहे करते हुडदंग,
सखियाँ भी छोडे़ नहीं, करती हैं तंग।
धरती ने ओढ़ ली है रंगों की चुनरिया,
बासंती पवन घूमे इस उस डगरिया!
मस्ताने डोल रहे करते हुडदंग,

प्रेम से सराबोर, मनोहारी, भीगी भीगी सी कविता
किशोर की टिप्पणी भी अच्छी लगी


Read more: http://alpana-verma.blogspot.com/2010/02/blog-post_28.html#ixzz0h0jk5F6c
Under Creative Commons License: Attribution Non-Commercial No Derivatives

Manish said...

अच्छी जानकारी
आपको और आपके परिवार को होली की शुभ कामनाएं

डॉ .अनुराग said...

इन दिनों अजीब सी ख़ामोशी है आपके ब्लॉग पे ...मसरूफियत ....या कुछ ओर .कुछ मन के भीतर गुजरा हुआ लिखे ..बड़े दिन हुए ...

JHAROKHA said...

धरती ने ओढ़ ली है रंगों की चुनरिया,
बासंती पवन घूमे इस उस डगरिया!
मस्ताने डोल रहे करते हुडदंग,
सखियाँ भी छोडे़ नहीं, करती हैं तंग।
Alpana jee,
Bahut sundar geet---idhar blogs par holee par jo kuchh padh pai un sab men apaka yah geet ekadam alag hai----apko evam parivar ke sabhee sadasyon ko Holee kee mangalkamnayen.
Poonam

Arvind Mishra said...

ये आपका गुझिया हैम्पर तो गजब ढा रही है -बहुत शुभकामनायें .
कविता प्यारी है !

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

बरस बाद देखो, फिर होली आई,
सतरंगी घटा, घिर घिर के छाई।
छलक-छलक जाएं बदरा से रंग,
संवर संवर गए देखो फागुन के ढंग !

अल्पना जी, आपने इस गीत में तो प्रकृति और रंगों की बेजोड़ जुगलबन्दी प्रस्तुत की है---बहुत ही खूबसूरत गीत्। आपको एवम परिवार के सभी सदस्यों को होली की शुभकामनायें। हेमन्त कुमार

लता 'हया' said...

shukria,
holi ki rachana rochak lagi.

kumar zahid said...

बरस बाद देखो, फिर होली आई,
सतरंगी घटा, घिर घिर के छाई।
छलक-छलक जाएं बदरा से रंग,
संवर संवर गए देखो फागुन के ढंग !

अल्पना जी होली के अपने रंग हैं और जिन्दगी के अपने।
अपनी मिट्टी के विरह का जो रंग आपकी मुट्टी में है वह मला जा सकता है उड़ाया नहीं जा सकता है। जब अगली छुट्टियों में आप आयेंगी तो आपकी मुट्ठियां तरबतर होंगी और आपके अपनों के गाल।
होली की बधाइयां। डोली में सजे रंग और ललचाती हुई गुझियां ..आह !..और वाह भी!!!

kunwarji's said...

bahoot achchha lga aapka blog padh kar......

anjana said...

मीठी व प्यार भरी,गुझिया तो खाओ,
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ!
खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.

अल्पना जी होली की ये कविता बहुत अच्छी लगी ।

मीत said...

सबसे पहले देर से आने के लिए माफ़ी.. उसके बाद ढेर सी बधाई होली की... और इतनी सुंदर, हजारो रंग वाली कविता के लिए बहुत बहुत शुक्रिया...
मीत

सुमन'मीत' said...

अल्पना जी
होली के रंगों से सरोबर बहुत प्यारी सी रचना 1आपकी नई पाठक बनी हूँ 1आशा करती हूँ ये शब्दपथ मीलों की दूरी होते हुए भी हमें साथी बनाएगा 1
शुभकामनाओं सहित
सुमन कपूर ‘मीत’

mehek said...

रंग उड़ें चहुँ दिशा, सूखे और गीले,
लाल ,गुलाबी,हरे ,नीले और पीले।
घूमें डगर डगर , मिलकर सब संग,
नाचे और गायें , बाजे ढोल और मृदंग।

alpanaji bahut sunder rang bhara geet hai.aapko der se holi ki shubkamnaye. itane mahino se kuch likh nahi paye nahi padh paye.ghar mein kuch problems hai aur phir comuter bhi nahi tha.jaldi hi blog par laut anne ki koshish karungi.mein bhi aap sabhi ko bahut miss karti hun,aur yaad bhi.aap sabse dur hun isliye maafi chahungi.jaldi anne ke wade ke saath vida leti hun,mehek.

BrijmohanShrivastava said...

सतरंगी घटा से घिरे बादल से फागुन सज संवर गया |लोगों के नाचने गाने व अनेक रंग में रंगे होने की कल्पना एक जगह बैठ कर करना ,इसने सुखद अनुभूति के साथ एक टीस भी पहुंचाई होगी | हुडदंग और गुझियो की याद भी सताई होगी |यह तो पता नहीं आबू धाबी में कब से हैं मगर यहां की होली का कभी आनंद लिया होगा तो इस दिन को बहुत याद किया होगा

Mrs. Asha Joglekar said...

खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.

सच ही कहा ।
गुझिया की डलिया तो बहुत ही लुभावनी है ।

"अर्श" said...

kuchh sunane bhi aaya tha aapke blog par .... :) kab aaun... :)


arsh

रंजना said...

खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.

Kya baat kahi aapne....waah !!!

रश्मि प्रभा... said...

der hui aane me lekin bina aaye kaise rahte .......kitni mithaas hai

सतीश सक्सेना said...

आपकी सार्थक टिप्पणी पर धन्यवाद ! यहाँ बहुत कम लोग किसी के लिखे को पढ़ पाते हैं !यहाँ कोई किसी की लेखनी की तारीफ नहीं करता , आपमें अपवाद क्यों ??
खैर आपका शुक्रिया अल्पना जी ...औरों से अलग है आप कुछ कुछ...
शुभकामनायें !!

kshama said...

मीठी व प्यार भरी,गुझिया तो खाओ,
याद रहे बरसों ,ऐसी होली मनाओ!
खिलते रहें मधुबन, न हो कई जंग
दुःख रहें दूर , छायें खुशियों के रंग.

Behad sundar rachana hai!

RAJWANT RAJ said...

aaj holi dubara kheli .aakhe band kr ke gulal udaya gughiya bhi khai thanks
es shbd snsar me phir mulakat hogi .aagt ke liye shubhkamnaye

संजय भास्कर said...

कविता बहुत ही सुंदर.

डॉ.कुमार गणेश 369 said...

ALPANA JI,AAP KA PRASTUTIKARAN BAHUT HI DILKASH HAI.ISE AISE HI BANAYE RAKHIYE.AB AKSAR YAHAN AATA RAHUNGA...SAPREM