November 7, 2009

समय धीरे चलो...

यू.ऐ.ई का प्राकृतिक दृष्टि से सबसे खूबसूरत शहर अलेन जिसका इतिहास पांच हज़ार साल पुराना बताया जाता है.पुरातत्व के महत्वकी वजह से ही नहीं बल्कि यहाँ की जलवायु ,हरियाली ,पानी के प्राकृतिक झरनों और गरम पानी के चिकित्सकीय गुणों वाले प्राकृतिक सोते के कारण भी इस स्थान को खासा महत्व और प्रसिद्धि मिली हुई है.

इस शहर में रहते हुए हमें १३ साल हो चुके हैं. मगर आज भी ऐसा लगता है जैसे कल परसों ही यहाँ आये थे.यहाँ रहने वाला हर प्रवासी यह जानता है कि यह उसका स्थाई निवास नहीं है.हमेशा एक अनिश्चितता में ही रहते हैं.आज हम यह कह नहीं सकते कि कल हम यहाँ रहेंगे या नहीं।

फिर भी इसी अनिश्चितता में सभी समय गुज़ार रहे हैं और केरल प्रदेश और हैदराबाद आदि के कई ऐसे परिवार तो ऐसे भी हैं जिनका सारा कुनबा ही यहाँ है.

यहाँ के एक नियम के अनुसार चाहे किसी प्रवासी ने यहीं जनम लिया और पला बढा हो ..फ़िर भी उसे यहाँ की नागरिकता नहीं मिलती. बेटे की उम्र १८ होते ही उसको पिता के वीसा पर रहने का अधिकार खत्म हो जाता है.हाँ ,अगर वह स्कूल में पढ़ रहा है तब विशेष परिस्थितियों में उसका वीसा बढाया जाता है अन्यथा उसे अपने मूल देश ही वापस जाना होता है. अन्य रास्ते ये हैं कि किसी कॉलेज से वीसा लेना होगा या किसी व्यवसाय में कर्मचारी का जॉब वीसा लेना पड़ेगा. बेटी के लिए स्थितियां फरक हैं..अविवाहिता पुत्री अपने पिता या माता के वीसा पर कितने भी समय के लिए उनके साथ रह सकती है.मगर , उसके विवाह होने पर उस का यह वीसा रद्द हो जाता है.फिर उसे अपने पति या खुद के वीसा पर रहने की अनुमति लेनी होती है.
खैर, बहुत सी और भी बातें हैं जिनके कारण यहाँ रहते हुए अपने भविष्य को लेकर मन में अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है..मगर फिर भी देखीये साल पर साल गुज़र रहा ही है!
अब आप कहेंगे कि वापस क्यूँ नहीं आ जाते?तो यह उतना आसान भी नहीं है..क्योंकि जब भी छुट्टियों में भारत जाते हैं तब यही विकल्प तलाशते हैं कि वहाँ जा कर क्या और कैसे करें..लेकिन कभी कोई बात जमती ही नहीं. खैर,अब तोयह पराया देश भी अपना सा ही लगता है..

मैं तो उन्हें देख कर अब आश्चर्य नहीं करती जो यहाँ ३०-३५ साल से रह रहे हैं.क्योंकि अब खुद को भी मालूम हो गया है कि वक़्त यहाँ कैसे तेज़ी से गुज़र जाता है .

हम जब यहाँ आये थे..तब किसी को भी जानते नहीं थे, अब बहुतों को हम जानते हैं और बहुत से लोग हमें! तब के 'अलेन' में और आज १३ साल बाद के अलेन में बहुत फरक आ गया है.तब यहाँ रात ९ बजे ही दुकाने बंद होने लगती थीं..मगर आज कई सुपरमार्केट २४ घंटे खुलती हैं.तब यहाँ की आबादी कोई २ लाख भी नहीं थी.अब यहाँ की आबादी लगभग ४ लाख है.वो बातें फिर कभी...
चलते चलते ...यहाँ आने के बाद कोई चार साल बाद मैं भारतीय समाज केंद्र से जुडी और फिर जब भी अवसर मिला केंद्र के लिए काम किया. दो बार महिला फोरम में विशेष पद भी संभाले . इसी २४ अक्टूबर को भारतीय समाज केंद्र की तरफ से मेरी सेवाओं के लिए मुझे विशेष सम्मान दिया गया.
इसी अवसर की तस्वीरें-

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बच्चों के इम्तिहान चल रहे हैं,हर तरफ परीक्षाओं का माहोल है.इसके चलते ब्लॉग्गिंग में आना जाना बहुत कम हो गया है.जल्दी ही दोबारा मिलती हूँ।

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57 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

..".केरल प्रदेश और हैदराबाद आदि के कई ऐसे परिवार to aise भी हैं जिनका अब तो सारा कुनबा ही यहाँ है.यहाँ के एक नियम के अनुसार चाहे किसी pravasi ने यहीं जनम लिया और पला बढा हो ..उसे यहाँ की नागरिकता नहीं मिलती. बेटे की उम्र १८ होते ही उसको पिता के वीसा पर रहने का अधिकार खत्म हो जाता है.हाँ गर वह स्कूल में पढ़ रहा है तब विशेष परिस्थितियों में उसका वीसा बढाया जाता है अन्यथा उसे अपने मूल देश ही वापस जाना होता है. "

इनकी असलियत उजागर करने हेतु आपका शुक्रिया ! अपने देश में तो ये वेसा भी नहीं देते अगर बच्चे ने वहीं जन्म लिया हो तो भी, लेकिन किसी और देश में आज घुस गए तो कल उस पर हक़ जताना शुरू कर देते है !

नीरज गोस्वामी said...

अल्पना जी काश इस खूबसूरत शहर के फोटो भी साथ में दिखा देतीं तो सोने में सुहागा हो जाता...फिर भी इस जानकारी के लिए शुक्रिया...
नीरज

अल्पना वर्मा said...

@ नीरज जी,एक अलग पोस्ट सिर्फ अलेन शहर की ताज़ी तस्वीरों के साथ जल्दी प्रस्तुत करूंगी.
आभार.

"अर्श" said...

achhi jaankari di aapne aur sabse pahale to sammanit hone ke liye bahut bahut badhaayee aapko... tasviren jarur lagayen aur haan ...kuchh geet bhi /.... badhaayee


arsh

गिरिजेश राव said...

अच्छी पोस्ट - रोजमर्रा से निकली हुई। ब्लॉगिंग की यही तो खासियत है। चट मन में आया, पट से लिखा और ठेल दिया।

आप तो भाग्यशाली हैं कि दो दो देशों से अपनापन है। एक समय ऐसा आएगा जब हर व्यक्ति विश्व नागरिक होगा।
__________________

पोस्ट में कई शब्द रोमन लिपि में हैं। ऐसा जानबूझ कर किया है या टूल में कुछ गड़बड़ी है ?

रश्मि प्रभा... said...

shahar ajnabi sa saath chalta hai
bina pahchaan dharti ka ek tukda deta hai
waqt apni jagah beet jata hai
khyaalon kee bangi de jata hai.......
bahut achha laga padhkar, un anubhutiyon ko jana, jo apne desh se door hain

रश्मि प्रभा... said...

aur haan samman ke liye badhaayi aur shubhkamnayen

महफूज़ अली said...

BAhut achchi jaankari di aapne....... aur saaman ke liye aapko bahut bahut badhai........ Momento wali fotograf bahut achchi aur sundar hai.....

My best wishes is always with you..... May god always bless u .... with more respect.... regard n rise....


Thanking u for sharing this article.........

Regards,

MAhfooz.........


रंजना [रंजू भाटिया] said...

सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाई अल्पना जी ..दूर देश की कई बाते यूँ जानते हैं अब यह भी ब्लोगिंग का फायदा है ..वहां के बारे में चित्र के साथ लिखती रहे ...अलेन के बारे में बहुत कुछ जानने की इच्छा बढ़ गयी है ..शुक्रिया और एक बार फिर से बधाई ..

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

एक भारत है, कोई भी आ कर नागरिक बन जाता है ..चलिए ..अच्छा लगा आपके वर्तमान "घर" बारे में जानकर.

ताऊ रामपुरिया said...

आपके कार्यों के लिये आपका सम्मानित होना बहुत सुखद लगा. बहुत बधाई आपको.

अलेन के बारे में बहुत सी जानकारियां पहली बार मिली. नागरिकता से जुडे मुद्दे के बारे मे जानकर दुख और आश्चर्य हुआ.

कुल मिलाकर आपकी यह पोस्ट बहुत आत्मिय लगी. ऐसे ही अपने अनुभव बांटती रहें. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अल्पना जी!
सम्मान के लिए आपको बहत-बहुत बधाई!
खूबसूरत शहर अलेन के बारे में जानकर अच्छा लगा!

Apanatva said...

alpanaji hardik badhai sweekae kare.

Ashok Pandey said...

यह जानकर अच्‍छा लगा कि आपकी सेवाओं के लिए आपको सम्‍मान मिला। शुभकामनाएं।

Ashok Pandey said...

यह जानकर अच्‍छा लगा कि आपकी सेवाओं के लिए आपको सम्‍मान मिला। शुभकामनाएं।

शोभना चौरे said...

har desh ke apne niym hote hai .in sbke bavjood aap apne logo se judkar
vaha kary kar rhi hai aur logo ko apna bna rhi hai ye kya kam hai?
vsudhev kutumbkam isi ko to khege na ?
apko smman milne ki bahut bahut badhai aur shubhkamnaye .

दिगम्बर नासवा said...

IS SAMMAN KE LIYE BAHOOT BAHOOT BADHAAI ...... AAPKI POST PADH KAR LAG रहा है की आपने अपने दिल का NAHI ..... SABHI PRAVAASIYON KE दिल का HAAL LIKH DIYA है ....... DEKHTE DEKHTE SAMAY KAISE BEET JAATA है PATA ही NAHI CHALTA .........

योगेश स्वप्न said...

alpana ji , achchi jaankari di, dhanyawaad, sochta tha ye padhne ke baad neeche koi rachna ya geet hoga, lekin .......nirasha.....han aapka chitra samman lete hue........bahut bahut badhaai. agli post ki prateeksha.

Arvind Mishra said...

अल्पना जी ,दीपक जहाँ भी प्रदीप्त हो जाय वही भू भाग आलोकित हो जाता है -यह हमारी बदनसीबी है की हमने बहुत से योग्य लोगों को वतन से दूर कर रखा है -मगर फिर सोचता हूँ यह कितना संकीर्ण चिंतन है -मनुष्य का आविर्भाव मानवता के लिए हुआ है वह कहीं भी रहे इस मन्त्र को याद रखे और विश्व कितना सिकुड़ता जा रहा है न ? और नेट पर तो सारी भौगोलिक सीमायें मिट गयीं है ! हम सब कितने करीब तो हैं !
अयं निजः परोवेति गणना लघु चेतसाम
उदार चरितानाम तू वसुधैव कुटुम्बकम
यह मेरा है यह तेरा है यह संकीर्ण मन वाले कहते हैं
उदार /उदात्त के लिए यह पूरा संसार ही एक परिवार है
यही है मानवता(हिताय ) चिंतन ..सो जहाँ भी रहें उदात्त बन कर रहें !
आप वस्तुतः vaisee hain bhee !

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सम्मान के लिए बधाई. यही त्रासदी है खाड़ी-देशों की...जब तक अपने नाम का रेज़ीडेंस वीज़ा नहीं तो यूं ही चलता है...मेरे एक पारिवारिक मित्र हैं जिन्होंने ताउम्र खाड़ी-देशों में रहते हुए भी, इसी के चलते, बेटे को कालेज भारत से कराया, बेटा अब भारत ही में पत्रकार है पर मां-बाप से मिलने तभी जा पाता है जब-जब वीज़ा का जुगाड़ बनता है..

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

अलेन शहर की तस्वीरों का हमें भी इंतजार है..

हैपी ब्लॉगिंग

डॉ .अनुराग said...

अच्छा लगा ऐसी जानकारिया जान कर भला लगता है .पुरूस्कार प्राप्ति की खबर कोई हैरानी वाली नहीं रही..आपके पास कई मैडल ओर पड़े होगे

Harkirat Haqeer said...

वाह ...अल्पना जी इस विशेष सम्मान की बहुत बहुत बधाई ......सफ़ेद साडी में बहुत खूबसूरत लग रहीं हैं आप .....!!

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, आप को बहुत बहुत बधाई,भी चित्र बहुत अच्छे ओर सुंदर लगे.
धन्यवाद

M VERMA said...

सम्मान की शुभकामनाए
प्रवास की क्सक भी है आलेख मे

सुलभ सतरंगी said...

आपको सम्मान मिलता देख मुझे बहुत ख़ुशी हुई. आप आगे भी अच्छे सम्मानों की हकदार बनेंगी ऐसा मेरा विश्वास है.
नागरिकता और वीसा सम्बन्धी आपकी पोस्ट ने ज्ञानवर्धन किया है.

मोहन वशिष्‍ठ 9988097449 said...

aapko mila samman bahut achcha laga aapko bahut bahut badhai

सुशील कुमार छौक्कर said...

ये सच है जहाँ आप काफी दिन से रहने लगते है तो आपको उस जगह से लगाव हो जाता है। नागरिकता के बारें जानकारी अच्छी थी। पुरस्कार की बात पर तो मुँह मीठा होना चाहिए। और नीरज जी की बात पर भी गौर किया जाए।

गौतम राजरिशी said...

ये सुनकर सचमुच बड़ा अजीब लगा, ये वीसा के कायदे-कानून यहाँ के। कितना विचित्र होगा ये अनिश्चितता का आलम...?

सम्मान के लिये दिल से बधाई!

दिलीप कवठेकर said...

सबसे पहले आपको इस सन्मान के लिये बधाईयां. एक गृहिणी होते हुए भी आपका समाज के प्रति जवाबदेही, और सृजन का अपना स्वयं का स्थान निर्मित करना वाकई सराहनीय है, और दूसरों के लिये सबक. यूंहि सफ़लता के सोपान चढते जायें.

आपके निवासी देश के कानूनों के बारें में नई जानकारीयां मिली. जानकर इस बात पर दिल में ठेस पहुंची, कि हम अपने बेटे के बडे होने पर खुशियां मनाने की बजाय परेशानी में पड जाते हैं.

अक्सर कई प्रवासी भारतीय , हर बार भारत आते ही यहां बसने की संभावनायें ज़रूर धूढते है, क्योंकि अनिश्चितता की तलवार लटकने की पीडा आप ही मेहसूस कर सकते हैं.

चित्रों की राह देख रहें है हम.

Kishore Choudhary said...

पढ़ते समय विचित्र सी भावनाएं घेर रही थी
फिर सोचता हूँ कि इसे ही इंसान का जीवट कहा जा जाता है.

rashmi ravija said...

यही खासियत है,हम भारतीयों की. जमीन का कोई भी टुकडा हो उसे हम अपनी पहचान दे देते हैं...वो कहते हैं,ना...जहाँ पर सवेरा हो बसेरा वहीँ है....सम्मान के लिए बधाई...घर गृहस्थी की जिम्मेवारियों के साथ ये मैडल तो.. icing on cake hai

मीत said...

हमें बहुत ख़ुशी होगी अगर आप फिर से भारत वापस आयेंगी...
मीत

अर्शिया said...

भारतीय समाज केन्द्र द्वारा सम्मानित किये जाने पर मेरी और जाकिर की ओर से बधाई स्वीकारें।
------------------
और अब दो स्क्रीन वाले लैपटॉप।
एक आसान सी पहेली-बूझ सकें तो बूझें।

अक्षय-मन said...

हाँ शायद समय हमारे अनुसार चल पता तो कितना अच्छा होता................
आपने जो कुछ भी कहा बताया बहुत अच्छा लगा आप इस मुकाम तक पहुंची उसके लिए जितना कहीं कम है शुभकामनाय

माफ़ी चाहूंगा स्वास्थ्य ठीक ना रहने के कारण काफी समय से आपसे अलग रहा

अक्षय-मन "मन दर्पण" से

kumar zahid said...

अलेन में अपनी अल्पना

आपका आत्मविश्वास भरा आलेख पढ़कर अक्ष्छा लगाा। हमारी ऐषणा किन विपरीत परिस्थियों में भी अपनी अस्मिता को संवार लेती है यह आपकी भावनाओं से लगा।
आपने अपनी सृजनात्मकता से और अपनी क्रियाशीलता से भी अजनबियत में जो सकारात्मकता घोली है वह स्तफत्य और श्लाघ्य है। जाने कितने लोग होगे पूरे विश्व में जो अपनी जमीन छोड़कर कर्ࢩाव्य भाव से विदेशों की सराय में जैसे रह रहे हैं मगर ऐसी ही स्थितियां फिर अपनों की सुधियों में पलत है।
आप जीती जागती दो दो स्क्रहीन वाला लैपटाप हो गई है अर्शिया जी ने ठीक पहेली बनाई आप पर ..उस दरीचे की तस्वीरें भेजती रहेंकृ


आपको अपनी सक्रियता के लिए सम्मान पर ढेर सारी बधाई।

MUFLIS said...

आप प्रवास में हो कर भी
भारतीय हैं ...शुद्ध भारतीय
आपको नमन
और ....
आपको मिले सम्मान के लिए हार्दिक बधाई

वन्दना अवस्थी दुबे said...

इतनी अच्छी और नयी जानकारियां देतीं हैं आप, कि मन खुश हो जाता है. आपको सम्मान मिला ,बहुत-बहुत बधाई.

POTPOURRI said...

samman ke liye badhai, बच्चों ko exams ke liye best of luck.

Nirmla Kapila said...

देर से आयी हूँ बहुत अच्छी पोस्ट धन्यवाद्

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

इस सम्मान के लिए हमारी ओर से भी बधाई स्वीकारें।
--------
बहुत घातक है प्रेमचन्द्र का मंत्र।
हिन्दी ब्लॉगर्स अवार्ड-नॉमिनेशन खुला है।

mark rai said...

अल्पना जी इस विशेष सम्मान की बहुत बहुत बधाई

ज्योति सिंह said...

samman ke liye aapko dhero badhai saath hi itni khoobsarat jaankari dene ke liye shukriya .

रंजना said...

Sach kaha aapne...itna aasan nahi hai basera badalna..jabtak ki koi bahut badi kathinai na ho kisi doosre jagah jakar basna bada hi kathin lagta hai....baat sirf vaas ki nahi,jahan ham rahte hain wahan sukh dukh me saath nibhate jo riste bante faile pasarte hain,unse katkar fir se naya sambandh banana bada hi kathin kaam lagta hai,isliye sthanantaran saral nahi lagta...fir rojgaar kee samasya to hai hi...

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

बहुत-बहुत बधाई।

Pratik Maheshwari said...

achha laga jaankar u.a.e ke baare mein..
par desh ki mitti to desh mein hi milegi..

baaki aapke gaane aur post dono hi kam ho gaye hain..
agli post ka intezaar rahega..


aabhaar..

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह.. वाह.. बधाई... अल्पना जी..........

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aapke maadhyam se jo jaankaari di jaati he, vah behad mayane rakhti he, khaas kar mujh jese ghummakdo ke liye...
aapka samman blog jagat ka samman he...yah aapke liye aour adhik jimmedaari ki aour ishara kartaa he, aap kaamyaab ho, shubhkamnaye

creativekona said...

अल्पना जी ,
यह तो प्रकृति का नियम है। मनुष्य कहीं भी रहे उसे ही अपना घर मानना ही पड़ता है। और यही उसके लिये ठीक भी है।शुरू में नयी जगह नये लोग्……ऐडजेस्ट करना मुश्किल लगता है पर धीरे धीरे आदमी उसी में रम जाता है।
आप अपने लेखों के माध्यम से इतनी रोचक जानकारियां यू ए ई की देती रहती हैं ।पढ़ कर अच्छा लगता है।
शुभकामनाओं के साथ।
हेमन्त कुमार

sandhyagupta said...

zeevan me kahan kuch nischit hai? Har din nayi chunotiyan lekar ata hai..

Samman ke liye bahut bahut badhai.

Harsh said...

bahut harddik badhayiya.....

KAVITA RAWAT said...

अब आप कहेंगे कि वापस क्यूँ नहीं आ जाते?तो यह उतना आसान भी नहीं है..क्योंकि जब भी छुट्टियों में भारत जाते हैं तब यही विकल्प तलाशते हैं कि वहाँ जा कर क्या और कैसे करें..लेकिन कभी कोई बात जमती ही नहीं. खैर,अब तोयह पराया देश भी अपना सा ही लगता है..

मैं तो उन्हें देख कर अब आश्चर्य नहीं करती जो यहाँ ३०-३५ साल से रह रहे हैं.क्योंकि अब खुद को भी मालूम हो गया है कि वक़्त यहाँ कैसे तेज़ी से गुज़र जाता है .

Aaj ka samay hi aisa ho gaya hai, Jeene ka liye kashkash, bhagambhag. Sach mein pardesh ke baare jo suna tha aaj aapke madhyam se jana aap-beeti, Na jaane kitne hi log pradesh mein apna dard dabai apni jeevika chala rahe honge apne desh chhodhkar....

shikha varshney said...

Sammanit hone ke liye bahut bahut badhai...
achchi jankari di aapne.
or han blog par jarra nawazi ka bahut shukriya.

श्याम कोरी 'उदय' said...

... बधाईयां !!!!!!

BrijmohanShrivastava said...

आपको सम्मानित किया गया हमे खुशी भी है और हम गौरवान्वित भी है

अल्पना वर्मा said...

Aap sabhi kee badhaayeeOn aur shubhkamanOn ke liye tahe dil se Abhaar.

mridula pradhan said...

apki baaten kafi jancari de gayin .

paanch saal sudan men rah chuki hoon isliye abudabi se bhi apnapan lag raha hai.