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October 21, 2009

'रात ग़मे तन्हाई की --चंदा ओ चंदा '

पेश हैं कुछ शेर ..साथ लिखे हैं तो ग़ज़ल जैसी लग रही है....अब जैसे हैं वैसे के वैसे उनके कुदरती रूप में 'आप के सामने हैं.

'रात ग़मे तन्हाई की'
-----------------------
ग़मे तन्हाई की रात बहुत गहरी है,
बन के ओस मेरे आँसू बिखर जाते हैं.

दिल की चौखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ सँवर जाते हैं.

बादलों  से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

--लिखित द्वारा -अल्पना वर्मा २०/१०/२००९


...आज का गीत...
'चंदा ओ चंदा किसने चुराई तेरी मेरी निंदिया'
फ़िल्म-'लाखों में एक '-[लता जी का version]मेरे स्वर में सुनिए..
संगीत-राहुलदेव बर्मन ,गीत-आनंद बक्षी.


यहाँ क्लिक कर के भी प्ले कर सकते हैं

चित्र गूगल से साभार.'कमेन्ट फॉर्म पर सीधा जाने के लिए यहाँ क्लिक करें.'

71 comments:

Udan Tashtari said...

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.


---



क्या खूब शेर निकाले हैं...आनन्द आ गया..और फिर ये चुनिंदा गीत, ओह्ह!!

Arvind Mishra said...

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.
वैसे तो हर पंक्तियाँ लाजवाब है मगर इसकी मारक क्षमता बस न पूँछिये !

मानसी said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

ये बड़ा अच्छा है।

विनोद कुमार पांडेय said...

बेहद खूबसूरत नज़्म..बहुत अच्छा लगा..धन्यवाद

गिरिजेश राव said...


आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।


आज आप ने बेखौफ टाइप का भावुक बना दिया।

खुशदीप सहगल said...

अल्पना जी,
चंदा ओ चंदा...मेरा भी पसंदीदा गाना है...ऐसे ही दो गाने और हैं जो शायद आपको भी पसंद हो...और अगर आपने सुने न हो तो सुनिएगा ज़रूर...चांद के पास जो सितारा है, वो सितारा हसीन लगता है (स्वीकार किया मैंने) और पुकारो, मुझे फिर पुकारो (बुनियाद)...

जय हिंद...

शरद कोकास said...

अच्छे तो हैं शेर ।

श्यामल सुमन said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

बहुत खूब। अच्छे भाव की पंक्तियाँ।

बारिश चाहे लाख हों याद नहीं धुल पाय।
याद करें उस याद को साहस बढ़ता जाय।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Vivek Rastogi said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

पंक्तियां कहीं से अपनी सी लगीं कि शायद अपनी ही कहानी कह दी हो।

बधाई आपको, इस संवेदनशील रचना के लिये।

कुश said...

चंदा ओ चंदा तो मेरा फेवरेट है.. आपकी आवाज़ में सुनना और भी अच्छा लगा..

mehek said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
waah behad khubsurat,dil azeez sher.aur dilkash geet.behtarin.

seema gupta said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.
"बेहद खुबसूरत शेर...बस मन को भा गये.."

regards

JHAROKHA said...

अल्पना जी ,
हर बार की तरह इस बार भी आपने बेहतरीन गजल पेश की है .हर शेर उम्दा हैं .
पूनम

ताऊ रामपुरिया said...

'रात ग़मे तन्हाई की' पूरी ही सर्वोत्कृष्ट और सुंदर है. डायरी ए नोट करने का लोभ संवरण नही कर पाया और नीचे आपका और आपके ब्लाग का नाम भी लिख दिया है, जिससे भविष्य मे खुद के नाम से ना ठेली जासके.

गीत बहुत ही सुमधुर.

कुल मिलाकर आज की पोस्ट यानि गीत और गजल लाजवाब. शुभकामनाएं.

रामराम.

VIJAY TIWARI " KISLAY " said...

bas ekaadh sher ko kamtar kahaa ja sakat hai, baaki laajavaab sher kahe hain alpna jee aapne. dher saari badhaai.
- vijay

Anil Pusadkar said...

बेहतरीन,सभी शेर एक से बढकर एक हैं।

Nirmla Kapila said...

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.
अल्पना जी एक एक शेर लाजवाब है बधाई और गीत तो क्या कहने शुभकामनायें

महफूज़ अली said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.....

bilkul sahi kaha aapne.... yeh lines dil ko chhoo gayin....

aur geet suna ..... bahut achcha laga......

Mishra Pankaj said...

ग़मे तन्हाई की रात बहुत गहरी है,
बन के ओस मेरे आंसू बिखर जाते हैं.

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

एकदम खरी बात

दिगम्बर नासवा said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
सच कहा जुदाई के आंसू ही होते हैं जो कभी दर्द और कभी अनायास निकल आते हैं बादलों का सीना चीर कर .......

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।
सुभान अल्ला ........ कमल का शेर है ... किसी के एहसास से भी कितना फर्क पड़ता है .......... रास्ते आसान हो जाते हैं .......
बहुत खूबसूरत शेर हैं सब ............ कमाल का लिखा है ........... और आपकी आवाज़ में गाया गीत ....... सुन रहा हूँ और बस गुनगुना रहा हूँ साथ में ............

अनिल कान्त : said...

शेर पढ़ कर तो आनंद आ गया

रंजना [रंजू भाटिया] said...

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

बहुत बहुत सुन्दर लगी हर पंक्ति यह विशेष रूप से पसंद आई गाना तो मुझे भी बहुत पसंद है यह आपकी आवाज़ में और भी अधिक भाया शुक्रिया

मीत said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

वाह किस कदर प्यारा लिखा है...
सच कहा यही तो है डायरेक्ट दिल से....
सुंदर....
मीत

डॉ .अनुराग said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

ये वाला अच्छा लगा.....इस गीत से एक गीत याद आ गया जो मेरे फेवरेट में से एक है .चंदा रे चंदा रे...कभी तो जमीन पे आ बैठेगे बाते करेगे

neelima sukhija arora said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

..अच्छी गजल लिखी है आपने चांद तो वैसे भी सभी शायरों और कवियों की पहली पसंद है और उससे बेहतर कोई रोमानी अलंकार है ही नहीं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अल्पना जी!
गज़ल में सजे सभी मुक्त शेर इतने अच्छे हैं कि यदि तारीफ न करूँगा तो खुद की नजर में बे-ईमान हो जाऊँगा।
बहुत-बहुत बधाई!

ओम आर्य said...

नतमस्तक है हम !

singamaraja said...

Singamaraja reading your blog

वन्दना अवस्थी दुबे said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.
बहुत सुन्दर. और चंदा ओ चंदा......लगभग रोज़ गुनगुनाती हूं इस गीत को. साधुवाद.

alka sarwat said...

ये तो मुझे गीत लगता है
भावपूर्ण भी है

राज भाटिय़ा said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं
बहुत सुंदर शेर, एक से बढ कर एक .
धन्यवाद

Rajey Sha said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.

khoob kaha hai!

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi badhiyaa.......teri aur meri ek kahani .....geet bhi dil ko chhu gaya

गौतम राजरिशी said...

"आसमान से भी बिछड़ गया है कोई / वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं" ये मिस्रे बहुत पसंद आये...

आपकी आवाज सुनने की कोशिश कर रहा हूँ।

योगेश स्वप्न said...

wah
तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

poori rachna dil ko chhooti hui , rishta kayam hai isliye bekhauf hun wah. bahut khoob. geet sunta hun , hamesha ki tarah badhia hi hoga. advance men badhai sweekaren.

रविंद्र रवि said...

Alpanaji
kya khub likha hai. Koi shabd hi nahi tariph ke kabil

रविंद्र रवि said...

Alpanaji
kya khub likha hai. Koi shabd hi nahi tariph ke kabil

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

जितनी सुन्दर गजल...उतना ही सुमधुर गीत भी ।

बहुत ही बढिया..
आभार्!!

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया गजल है।धन्यवाद।

दिलीप कवठेकर said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

खयाल बेहतरीन है.

आपकी सृजनशीलता में विविधता है, जैसे ये शेर. मगर इसके पीछे के एहसासात बडे ही दिल को छू लेने वाले हैं.यहां आकर रश्क होता है, कि काश हम भी कुछ शेर लिख पाते.

वैसे सबसे पहला शेर - (टूटा फ़ूटा,बिना मीटर के))
दिल मे ज़ज़बात की कमी है अभी,
वर्ना हम भी अब तक शायर होते....

दिलीप कवठेकर said...

चंदा ओ चंदा गीत की रवानी और मीठी मधुरता आपके स्वर में परिलक्षित होती है.

बडा ही रिफ़्रेशिंग तरीके से आपने इसे गाया है. अपने पुराने गीत सुनेंगे, और अब सुनेंगे तो आपको आपके सिंगिंग में मेलोडी में इज़ाफ़ा सुनाई देगा.

बढिया ट्रेक है, जिसनें भी प्रभावित किया है. मिल सकेगा?

सुशील कुमार छौक्कर said...

एक से एक बेहतरीन शेर।

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

ये दो शेर कुछ ज्यादा ही पसंद आए जी। गाना तो फिलहाल सुन नही पाऐगे पर बाद में जरुर सुनेने। और हाँ ये पोस्ट में बाक्स कैसे बनाती है आप जरा हमें सीखा दीजिए।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

शेर तो अच्छे हैं ही गीत भी सदाबहार young (हिंदी समानार्थी नहीं सूझ रहा है)गीत है.

शोभना चौरे said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
अल्पनाजी
आसमान के दर्द को खूब पहचाना .बहुत अच्छे शेर है \गीत भी बहुत अच्छा गाया है |मैंने पहले भी फरमाइश कि थी एक गाने कि |अब दूसरी फरमाइश है |
मुझे पता नही है ये गीत कोनसी फिल्म का है ?गीत के बोल है
कजरे बदरवा रे ,मर्जी तेरी है क्या जालिमा
ऐसे न बरस जुल्मी
कहना दू किसी को मै बालमा
कजरे बदरवा रे ...........
आभार

अल्पना वर्मा said...

आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया.
@खुशदीप जी याद मुझे ये दोनों गीत याद हैं.
@वंदना जी ,आप इसे रोज़ गुनगुनाती हैं..कभी हमें भी सुनाएँ प्लीज़ :)...
@दिलीप जी ट्रेक मेल कर दिया है.
@सुशील जी,आप को टेबल बनाने का कोड भेज दिया है.
@काजल जी..वैसे 'सदाबहार 'काफी है..:) सदाबहार जवाँ गीत भी कह सकते हैं.
@शोभना जी,आप का सुझाया गीत याद है.अच्छे से अभ्यास कर के सुनती हूँ जल्दी ही.
कजरे बदरवा रे...फिल्म पति पत्नी का है लता जी का ही गया हुआ.बेहद खूबसूरत संगीत..नंदा -संजीव कुमार अभिनीत फिल्म-मैं अवश्य ही प्रयास करूंगी .
abhaar

अल्पना वर्मा said...
This comment has been removed by the author.
MUFLIS said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

bahut achhee rachnaa hai
ye sher saath liye ja rahaa hooN
din bhar gun.gunaane ke liye

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह... वाह.. अच्छी कविता के लिये साधुवाद स्वीकारें...

'अदा' said...

दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.
behad khubsoorat hain har sher..
aur rawaani ke kya kahne..
Chand ochanda mujhe bahut pasand hai...aapko suna to gaaane ki lalak yun jaagi hai man mein kiya bataun...sochti hun ek baar main bhi gaa hi dun..shayd ek do din mein...daal bhi dun..
bahut accha gaaya aaapne..itna accha to nahi gaa paaungi fir bhi koshish karne mein kya jaata hai...
aapki post para aana sukhd lagta hai...SIGHT AND SOUND ka alam hota hai..
dhanyawaad..

anjana said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।
वाह बहुत खूब अल्पना जी,

Kishore Choudhary said...

ये सितारे भी तो...
अल्पना जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है. हर शब्द जैसे आपकी इन पंक्तियों के लिए ही बना हो. आपकी कमाल की लेखनी यूं ही चलती रहे.

आकांक्षा~Akanksha said...

बहुत खूब अल्पना जी...बेहद खूबसूरत नज़्म..कमाल की लेखनी ...बहुत अच्छा लगा..आभार !!

BAD FAITH said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
बहुत खूब.

KAVITA RAWAT said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
Bahutjaandar gajal ke liye badhai sweekaren.

P.N. Subramanian said...

सुन्दर रचना. चंदा ओ चंदा मधुर लगी. आभार.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
बहुत खूब अल्पना जी...बहुत सुंदर शेर !!

kumar zahid said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,


तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,

-----दर्द का एक झरना है जो अंदर ही अंदर झर रहा है...और जो गूंगे का गुड़ नही रह गया है । शेर के डलों में ढलकर लोगों तक पहुंच रहा है। बेहतरीन सोच.....मुबारकें

kumar zahid said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,


तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,

-----दर्द का एक झरना है जो अंदर ही अंदर झर रहा है...और जो गूंगे का गुड़ नही रह गया है । शेर के डलों में ढलकर लोगों तक पहुंच रहा है। बेहतरीन सोच.....मुबारकें

Harkirat Haqeer said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.

वाह.....अल्पना जी ...बहुत खूब ....!!

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

और ये तो कयामत ढा रहा है ......आल राउंडर हैं आप तो ....!!

हाँ ये C. M Quize trofi jitane की भी हार्दिक bdhai ...!!

रंजना said...

तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।

WAAH ! WAAH ! WAAH ! Kya baat kahi aapne...Waah !

Bhaavbhari bhut hi sundar rachna...

Aapke kalam aur kanth dono ko hi mata saraswati ka aashirwaad prapt hai....

आपके सवाल said...

har khyaal ka jawaab hai humare paas.... just visit http://yourquestionanswer.blogspot.com/

creativekona said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

अल्पना जी ,
बहुत अच्छी संवेदनात्मक रचना--पढ़कर आनन्द आया।
हेमन्त

RAJ SINH said...

व्यस्तता के चलते अरसे बाद आया .वैसी ही गीत ग़ज़ल स्वर की महफ़िल.
ग़ज़ल कहिये या कुछ और .भावनाएं तो मन को छूती ही हैं .
बधाई .

POTPOURRI said...

Bhut badhiya.

अर्शिया said...

गजल वाकई सुन्दर बन पडी है। लेकिन गजल से ज्यादा अच्छी लगी वह बात जो आपने गजल के सम्बंध में कही है। यानी की कुदरती रूप में। यह ईमानदार अभिव्यक्ति बहुत कम देखने को मिलतीहै।
--------
स्त्री के चरित्र पर लांछन लगाती तकनीक।
चार्वाक: जिसे धर्मराज के सामने पीट-पीट कर मार डाला गया।

Apanatva said...

bahut sunder vichar aur takkar letee abhivyaktee .badee sunder rachana . Badhai

Science Bloggers Association said...

गमे तनहाई का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है आपने।
------------------
हाजिर है एक आसान सी पक्षी पहेली।
भारतीय न्यूक्लिय प्रोग्राम के जनक डा0 भाभा।

सुलभ सतरंगी said...

# दिल की चोखट पर कभी तो कोई आए,
ये सितारे भी मुख्तलिफ डगर जाते हैं.

# आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.

# तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।


बहुत खूब और बेहतरीन शेर हैं.

Murari Pareek said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
waakai bahut hi sundar aur mundar rachanaa hai,

R. Venukumar said...

लम्हों में कट जाएगी ज़िन्दगी मेरी,
तेरे आने से ये पल यूँ संवर जाते हैं.

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.



आशा से आकाश टंगा है
श्वांस तंतु कब टूटे...
_गुप्त जी की इस मंत्रणा मे बहुत से प्रतीक्षुओं की राहत छुपी है

हम ही प्रतीक्षा में हैं इधर भी आएं..

Jyoti Verma said...

bahut sundar!!!