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October 5, 2009

घूमे आधी रात को चिडियाघर में!

शीर्षक बिलकुल सही है...आधी रात ही नहीं सुबह दो बजे तक घूम सकते थे..कैसे??
यू ऐ ई की राजधानी अबू धाबी है और अबू धाबी में है शहर अलऍन .
फूलों और बागों के इस शहर को यू ऐ ई का सब से सुन्दर शहर माना जाता है.
अबूधाबी में होते हुए भी राजधानी से १६० किलोमीटर दूर है.
यहाँ की हरियाली मुख्य आकर्षण तो है ही.साथ ही यहाँ पूरे मिडल ईस्ट का सब से बड़ा चिडियाघर भी है.
इस चिडियाघर को १९६७-६८ में शेख जायेद के आदेश पर बनवाया गया था। इस समय यहाँ ४००० [चार हज़ार]जानवर हैं.
आज कल यहाँ रिसॉर्ट भी बनाया जा रहा है.
ज्ञात हो अलेन शहर यू ऐ ई के निर्माता और प्रथम प्रेजिडेंट शेख जायेद का जन्म स्थान भी है.
बात कर रही थी आधी रात को चिडियाघर देखने की-जी हाँ बिलकुल सही सुना.
इस साल पहली बार रमजान के पूरे महीने में,रात ९ बजे से सुबह २ बजे तक जानवरों के nocturnal व्यवहार को दिखाने /समझाने के लिए चिडियाघर को पब्लिक के लिए खोला गया.
यह आयोजन अमेरिका के सेन दीअगो जू के सहयोग से किया गया था.

हम भी पहुंचे रात को चिडियाघर देखने..जानवरों के पिंजरों में सब अँधेरा ही था..हलकी रोशनी कहीं कहीं की गई थी। जो बाहर से पिंजरों पर पड़ रही थी.जू बहुत बड़ा है इस लिए जहाँ तक चल कर जा सकते थे बस वहीँ तक गए क्यूँ कि रात को ट्रेन नहीं चलती थी.जानवरों के नाम पर सिर्फ बन्दर और उनकी विभिन्न किस्में,हिरनों की किस्में जागी हुई मिलीं..बन्दर भी ज्यादातर सो ही रहे थे..लगभग हर ३-४ पिंजरे के पास एक गार्ड खडा था..जिस से जानवरों को कोई परेशान न करे..मैं ने भी सिर्फ जहाँ जानवर जागे हुए थे वहीँ की फोटो लीं ..ताकि फ्लेश से सोये हुए जाग न जाएँ.
'बर्ड हाउस 'में सब से ज्यादा चहल पहल थी..पंछी भी रात को आगंतुक देख कर खूब चहक रहे थे.Falcon शो भी हुआ..पहले देखा था इस लिए उस रात हमने नहीं देखा -falcon की तस्वीरें पुराने शो की हैं क्योंकि यह शो सामान्य दिनों में भी हर रोज़ चलता है.
देखीये 18 sept,2009 रात में ली गयीं चिडियाघर की कुछ तस्वीरें-
[चित्रों को बड़ा देखने के लिए उन पर क्लिक करें.]
Al Ain zooDeer[ghazaal]
DeerMonkey again
Bird housemonkey
birdslove birds
Love birdVulture
bird trainerfalcon1
penguineDSCN3308






49 comments:

महफूज़ अली said...

waise aadhi raat ko ghoomne ka mazaa hi alag hai....... mujhe bhi kabhi jab neend nahi aati to car ya bike leke nikal padta hoon..... aise hi..... par yahan Lucknow mein raat ko zoo nahi khulte hain na hi mall na hi main shaher......... bas Ambedkar park Gomti nagar se Hazratganj ka ek chakkar le leta hoon kyyunki speed 100 se upar hoti hai....aam din mein speed 30 se upar ja nahi paati ....isliye tez raftaar ka mazaa raat 1 baje ke baad hi milta ....... hai..... hahahahaha.........

waise apka yeh sansmaran bahut achcha laga........ padh ke .....aur tasveeren bahut khoobsoorat hain........

seema gupta said...

खुबसूरत चित्रों के साथ आधी रात को चिडियाघर की सैर....वाह क्या कहने......रोमांचक सफ़र लगा...
regards

ताऊ रामपुरिया said...

ये तो बिल्कुल नई बात पता चली? रात दो बजे चिडियाघर में...वाकी ऐसी तस्वीरें या तो डिस्कवरी की साईट पर देखीं हैं या आज आपके ब्लाग पर. बहुत धन्यवाद इस जानकारी के लिये.

रामराम.

संगीता पुरी said...

वाह !! भले ही रात की नींद उडी .. पर बहुत मजा आया होगा आप सबो को .. खैर हमें भी सामग्री उपलब्‍ध करा ही दी आपने .. बहुत सुंदर चित्र हैं !!

डॉ टी एस दराल said...

वाह, रात में चिडिया घर की सैर, अद्भुत रहा होगा.
तस्वीरें बहुत उम्दा हैं.
दिन में दिल्ली के लोदी गार्डन की सैर के लिए हमारे ब्लॉग पर भी पधारें.

रश्मि प्रभा... said...

aapke saath to main bhi ghoom aayi......
waise aadhi raat ka anubhaw alag sa raha

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सोच कर ही मजा आ रहा है। वैसे आप खुशनसीब हैं कि आपको ऐसा मौका मिला।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Pankaj Mishra said...

तस्वीरें बहुत उम्दा हैं.

अनिल कान्त : said...

रात को चिडियाघर में ...अरे वाह ये तो वाकई बहुत रोमांचक बात बतायी आपने

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वाह आधी रात में सैर बहुत बढ़िया .यह तो पिक्चर भी बहुत खूब हैं ..फिर जानवर कब सोते हैं :)

अल्पना वर्मा said...

@Ranjana ji,
Is period mein means Ramjaan ke mahine mein Day time mein Zoo public ke liye close rahaa tha..us samay unhen araam karne diya jata tha.:)

[Waise bhi yahan us mahine din aur raat lagbhga palat se jate hain.
Bilkul alag sa adbhut anubhav.]

Arvind Mishra said...

किसी भी चिडियाघर के सैर का यह एक अलग सा अनुभव -मगर चित्रों में रात का खौफ दिखता है ! फैल्कन शो के बारें में एक पृथक पोस्ट कर पाएगीं ?
वैसे यह पशुओं की जैवीय घड़ियों को निश्चित ही कुछ व्यतिक्रम करता होगा !
पशु व्यवहार विज्ञानियों के लिए यह किसी प्रयोगशाला से कम नहीं है -जहां जैवीय घड़ियों के व्यतिक्रम का ध्ययान हो सकता है .
यह एक रोचक उदाहारण भी है की कैसे मानव कुदरत को बदलने का उपक्रम करता रहता है !

'अदा' said...

Be-hadd sundar tasveerein aur romanchak sanasmaran...ek umda rachna...
badhai..

सुशीला पुरी said...

'हाथ भर के फासले को
उम्र भर चलना पड़ा .''
........... अब अबू धाबी भी आना पडेगा .

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह क्या कहने।"घूमे आधी रात को चिडियाघर में"
ये भी एक अलग ही अनुभव रहा होगा जी। बेहतरीन तस्वीरों को देखकर हमें भी आनंद आ गया जी।

नन्हीं लेखिका - Rashmi Swaroop said...

kash hum bhi aapke saath hote is romanchak zoo ki sair me !
kinnaa maza aata !
:)

sandhyagupta said...

Aapne to ghuma hi, hume bhi ghuma layin.Aabhar.

राज भाटिय़ा said...

बहुत सूंदर, लेकिन हम अपने मजे के लिये रात के समय मै भी इन जानवरो को चेन से नही सोने देते?? अगर यह युरोप मे होता तो लोगो ने विरोध करना था,
धन्यवाद

योगेश स्वप्न said...

alpana ji vakai , adbhut anubhav raha hoga. chitra kafi spasht hain. aabhaar.

aur han latest bhajan kal audio/video ke sath post kiya hai, sunna na bhoolen. dhanyawaad.

Kishore Choudhary said...

बहुत सुंदर विवरण है आपकी पोस्ट पढ़ते हुए एक जुड़ाव सा महसूस होता है लगता है यहीं कहीं पास बैठ कर ही आप बता रही हैं सब कुछ ....

अल्पना वर्मा said...

@राज sir, यहाँ यह व्यवस्था अंतराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के 'सेन deigo Zoo'के सहयोग से की गयी थी और पशुओं को किसी प्रकार की बेआरामी नहीं होने दी गयी थी.
पशुओं के हितों को ध्यान में रख कर ही सारा इंतजाम था.यहाँ हर काम अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर ही किया जाता है ..व्यवस्था करने वाले Chief अधिकतर यूरोपीय /अमेरिकी/ब्रितानी होते हैं.

दिलीप कवठेकर said...

एक बेहद ही अलग और रोचक अनुभव.

आपने दोनों गीत भी बढिया गाये हैं-

दिल तो है दिल और आजकल पांव ज़मीं पर

प्रकाश गोविन्द said...

नए तरह की रोचक पोस्ट !
आपके दिए विवरण और चित्रों ने पोस्ट को आकर्षक और संतुलित किया है !

किसी भी जगह को रात्रि में देखने का अनुभव और रोमांच अलग ही होता है ..चाहे वो ताज हो ...लाल किला हो या लखनऊ का रेजीडेंसी !

मैंने पशु- पक्षियो को रात में सिर्फ डिस्कवरी में ही देखा है ! मेरा ख्याल है कि भले ही हम उन्हें किसी तरह 'डिस्टर्ब' न करें, लेकिन वो हमारी उपस्थिति मात्र से ही विचलित हो जाते हैं ! ऐसा ही कार्यक्रम चलता रहा तो कहीं वो चिडियाघर प्रशासन के खिलाफ आन्दोलन न छेड़ दें !

तस्वीरें बहुत सुन्दर हैं ! विशेष तौर पर तीसरे नंबर की तस्वीर तो बिलकुल पेंटिंग लग रही है ! (बिना इजाजत मैंने रख भी ली)
कृपया बताएं कि क्या दसवें नंबर की तस्वीर गिद्धराज की है ? "falcon शो" के बारे में कुछ और जानकारी दें ! कृपया आप वहां के दर्शकों के बारे में भी बताएं, जिससे यहाँ वाले भी कुछ सबक लें !

[नोटिस : आपकी पोस्ट दायें तरफ से हलकी सी कट रही है]

शरद कोकास said...

ज़ानवर भी खुश हुए होंगे रात मे इंसानो को देख कर वैसे हमारे यहाँ यह होता तो अब तक कोई कानून लग जाता जानवरो की नीन्द मे दखल देने का अपराध ।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

वाह्! आधी रात में चिडियाघर की सैर। कमाल है!
रात के समय चाँद तारों की छाँव में पशु-पक्षियों के नजारे...जरूर कुछ अलग सा ही अनुभव होता होगा ।
कविता/गजल की चाहे समझ न हो लेकिन चित्रों की समझ तो हममें है ही.....सभी चित्र बहुत ही सुन्दर और सजीव लगे !!

Udan Tashtari said...

बड़ा अच्छा लगा जानकर और जू की तस्वीरें देखकर.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह रात में तो ज़ू का अलग ही नज़ारा रहा होगा. तस्वीरें तो बहुत ही शानदार हैं.

सुलभ सतरंगी said...

शानदार! आपने तो बैठे बैठे पूरा नज़ारा दिखा दिया!

- सुलभ (यादों का इन्द्रजाल..)

रविंद्र रवि said...

अल्पनाजी, आज टहलते टहलते पहली बार आपके ब्लॉग पर पहुच गए. आपका ब्लॉग पढ़कर बहुत ही आनंद हुआ. आपके ब्लॉग का शीर्षक बहुत अलग और आकर्षक लगा.
रात में चिडिआघर घुमे थोडा अजीबसा लगा. फोटो बहुत ही बढ़िया है.

शोभना चौरे said...

aapke sath chidiya ghar me ghoomna bhut achha lga .mujhe to aapki ak bat bahut hi aakrshit karti hai ki prtyek pal ko kitni bariki se jiti hai .chote chote kamo se hi purnta aati hai .
shubhkamnaye

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।
----------
बोटी-बोटी जिस्म नुचवाना कैसा लगता होगा?

मीत said...

काश हमें भी घुमने मिलता आधी रात को चिडिया घर...
पर आपने तो हमें अपने ब्लॉग के जरिये दिन ही घुमा दिया...
मीत

Mumukshh Ki Rachanain said...

इस साल पहली बार रमजान के पूरे महीने में,रात ९ बजे से सुबह २ बजे तक जानवरों के nocturnal व्यवहार को दिखाने /समझाने के लिए चिडियाघर को पब्लिक के लिए खोला गया.

काश ऐसा ही कोई "आदमी घर" भी खोला जाये, जिसमे उसके आज के बदले हुए व्यवहार को सही तरह से दिखाया और समझाया जाये........

आपने एक अनोखी और बेहतरीन सैर रात अँधेरे में में करके चित्रों के साथ जिस तरह से पेश किया है निश्चय ही कबीले तारीफ है.

हार्दिक बधाई.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

vikram7 said...

रात में चिडिया घर की सैर, के आपके अनुभव के साथ चित्र भी सुन्दर लगे

मीत said...

मेम मुझे अपनी रचना पार आपसे प्रतिक्रिया चाहिए...
मेरी गलतियों को बेहतर ढंग से आप ही बता सकती हैं...
बताइए न...
मीत

मीत said...

बहुत बहुत शुक्रिया मेम.....
क्या आप अपनी अगली पोस्ट मुक्तक के बारे में दे सकती हैं... मुझे याद है एक बार आपने हाइकु के बारे में लिख कर बहुत अच्छे ढंग से उसके बारे में बताया था...
मैं और शायद मुझ जैसे काफी होंगे जो मुक्तक के बारे में जाना चाहेंगे...
मीत

दिगम्बर नासवा said...

सुन्दर चित्रों के साथ सजी है आपकी पोस्ट .......... आबूधाबी के इस चिडिया घर के बारे में सुना तो बहुत है पर कभी देखा नहीं ........... मौका मिला तो अगली बार देखने आएंगे ...........

Harkirat Haqeer said...

अल्पना जी ,

चित्र बहुत ही प्यारे लगे ....इतनी मनमोहक सैर मुबारक हो .....!!

Dhol Ki Pol said...

bahut achaa likha hai ji

dwij said...

बहुत अच्छा लगा चिड़िया घर में घूमना और यह जान कर और भी राहत मिली कि यहाँ के जानवरों के साथ भी जानवरों-सा व्यवहार नहीँ होता.

mehek said...

aare waah ye zoo ki sair bhi badhiya rhai,wo bhi raat mein,bahut khub.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

माफी चाहूँगा, आज कोई कमेन्ट नहीं, सिर्फ एक निवेदन करने आया हूँ. आशा है, हालात को समझेंगे. ब्लागिंग को बचाने के लिए कृपया इस मुहिम में सहयोग दें.
क्या ब्लागिंग को बचाने के लिए कानून का सहारा लेना होगा?

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

वाह.. आपके शहर का जवाब नहीं

हैपी ब्लॉगिंग

काजल कुमार Kajal Kumar said...

विचार तो अच्छा है यदि जानवरों के रात्रि-जीवन में हस्तक्षेप न करे.

Murari Pareek said...

तस्वीरें बहुत सुन्दर हैं ! पर नींद में किसी की तस्वीर लेना अच्छी बात नहीं कहीं मामला मुकदमा न करदें जानवर !!

योगेन्द्र मौदगिल said...

बेहतरीन जगह पर कैमरे का बेहतरीन इस्तेमाल..... वाह...

Science Bloggers Association said...

आज आपके ब्लॉग का हेडर देखा, तो कमेंट किये बिना रूका नहीं गया। बधाई स्वीकारें।
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JHAROKHA said...

अल्पना जी,
बहुत रोचक जानकारी दी है आपने वह भी इतने सुन्दर मन्भावन चित्रों के साथ्। हार्दिक बधाई।
पूनम

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

"...सुन्दर संकलन...यकीनन..."