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September 4, 2009

'आस-एक गीत'

३० अगस्त हमारे बच्चों के स्कूल खुल गए.दूसरे सत्र की पढ़ाई शुरू हो गयी.
सरकारी स्कूलों में ईद तक की छुट्टी है ही..लोग जो छुट्टी गए थे वापस आ गए हैं ,फिर से पुरानी चहल पहल और रौनक लौट आई..
गरमी का वही बुरा हाल है..तापमान दो दिन पहले भी ५० से ऊपर था.

स्वाईन फ्लू के बारे में स्कूल में बताया जा रहा है..फॉर्म भरवाए जा रहे हैं..शौपिंग माल आदि जगहों पर इस विषय में जानकरी देने के लिए काउंटर खुले हैं.बस इस से अधिक हमें इस विषय में जानकरी नहीं है..रामादान जिसे भारत में रमजान कहते हैं वह पाक महिना शुरू हो चुका है चूँकि यह इस्लामिक देश है तो यहाँ रमजान की रौनक अलग ही देखने को मिलती है..यह पूरा महीना बहुत ही अलग होता है..रात में भी दुकाने ,रेस्तरां आदि खुले रहते हैं..सुबह ४ बजे तक दुकाओं में आवा जाही देखी जा सकती है.दिन के समय सभी रेस्तरां बंद होते हैं.ऑफिस और स्कूल के समय में १-२ घंटे कम कर दिए जाते हैं.[यह समय कटोती हर संस्था के ऊपर निर्भर है]कई जगह शामियाने लगे दिखेंगे जहाँ इफ्तार /दवातें [रोजा खोलने के बाद शाम का खाना] मुफ्त दिए जाते हैं.इन दिनों बाज़ार में खरीदारी पूरे जोरों पर रहती है.यहाँ की मार्केट में भीड़ देख कर लगता ही नहीं की स्वाईन फ्लू से किसी को कोई भय है या बाज़ार की मंदी [recession ] का कोई असर किसी पर है!
हर मॉल और दुकाने अपने हिसाब से सजायी गयी हैं यहाँ दो तस्वीरें हैं जो अलएन मॉल के भीतर की हैं.[Click pictures to enlarge]

alain mall ramdan decoralainmall ramadandecor

Sunset ki तस्वीर जून माह के गल्फ न्यूज़ अखबार के रीडर्स pictures में चुनी गयी थी..
[कोई बड़ी बात नहीं है..बस ऐसे ही)
sunsetdubai

तस्वीर को बड़ा कर के देखेंगे तो देख सकते हैं कि सूरज के साइड में दुनिया की सब से बड़ी इमारत 'बुर्ज दुबई' और साथ में दुबई की सारी बड़ी इमारतें नज़र आयेंगी.

'आस-एक गीत'
--------------------
ढूंढ पाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
नहीं मुमकिन अगर मिलना तो इक ख़त लिख दें,

ढूंढ पाओ..

1-है जुदा नींद मेरी रातों की तनहा दिन हैं,
ऐसा कुछ हाल मेरा कहना के उनके बिन है.
जो यही उनका भी हो हाल तो इक ख़त लिख दें...

ढूंढ पाओ ...

2-वो है इक संगदिल ये जानकर भी चाहा है,
क्यों न हो शिक़वा गिला ,ये तो हक़ हमारा है,
ग़र वो समझें मुझे अपना तो इक ख़त लिख दें
ढूंढ पाओ ..

3-ऐ हवाओं जो कहो आज तुमको जाँ दे दूँ,

बाद मुद्दत के ये पैगाम उनका आया है..
मुझको समझा है मेरे प्यार को अपनाया है..
मुड़ के जाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
ठहरो दो पल ..

ठहरो दो पल को ज़रा हम भी उन्हें ख़त लिख दें...
ऐ हवाओं...

--------------अल्पना वर्मा -----------------

अपने लिखे इस गीत को अपनी आवाज़ में पेश करने की एक कोशिश की है-

Download/play MP3


अब सुनाती हूँ मेरी आवाज़ में -गीत-'मेरा दिल ये पुकारे आजा'..फिल्म-नागिन [१९५४] से.इस गीत का काराओके ट्रैक मूल ट्रैक से थोडा अलग है.
Download/play Mp3
[ग़ज़ल 'वो इश्क जो हमसे' को साइड बार में लगा दिया है.]

56 comments:

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

आपके शहर का जीवंत नज़ारा बहुत अच्छा लगा। आपके हमारे शहर में जो चीज़ें फ़िलहाल कॉमन है- वह है स्वाइन फ्लू की सावधानी और मौसम। तस्वीरें अच्छी लगीं। 'आस-एक गीत' के बोल जितने प्यारे हैं, आवाज़ भी उतनी ही मधुर। और पोस्ट के आख़िर में पेश हुई ग़ज़ल तो शाम को फ़ुरसत में एक बार फिर सुनी जाएगी। अभी व्यस्तता के चलते पूरी नहीं सुन पाया।

हैपी ब्लॉगिंग.

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

आपके शहर का जीवंत नज़ारा बहुत अच्छा लगा। आपके हमारे शहर में जो चीज़ें फ़िलहाल कॉमन है- वह है स्वाइन फ्लू की सावधानी और मौसम। तस्वीरें अच्छी लगीं। 'आस-एक गीत' के बोल जितने प्यारे हैं, आवाज़ भी उतनी ही मधुर। और पोस्ट के आख़िर में पेश हुई ग़ज़ल तो शाम को फ़ुरसत में एक बार फिर सुनी जाएगी। अभी व्यस्तता के चलते पूरी नहीं सुन पाया।

हैपी ब्लॉगिंग.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

वाह....।
बहुत मधुर स्वर है आपका।
गीत बहुत अच्छा लगा।
बधाई!

mehek said...

वो है इक संगदिल ये जानकर भी चाहा है,
क्यों न हो शिक़वा गिला ,ये तो हक़ हमारा है,
ग़र वो समझें मुझे अपना तो इक ख़त लिख दें
waah ji waah,kya karen dil ka mamla jo dehera,sangdil se bhi mohobbat hai usko.sunder.
aur aaj doguni gift di hai,geet aur gazal madhurim aawaz mein,lajaeab.
garmi bahut hai 50 deg bahut jyada hai,yaha hum barsaat se pareshan ho gaye ab.

शारदा अरोरा said...

सीधे सादे शब्दों में दिल की भाषा को जुबान दे दी है , वाह , सुनने में भी आनन्द आया

डॉ .अनुराग said...

गजल पहली बार सुनी है ....लगता है अभी कई खजानो के मोती बाकी है

बवाल said...

वाह वाह वाह अल्पना जी! अहा ! जैसा सुन्दर गीत वैसी ही मिठास आपकी आवाज़ में। आज हमारे जन्मदिन पर आपने बड़ा जी ख़ुश कर दिया जी। बहुत बहुत बधाई इस प्यारे से गीत के लिए और साथ में आभार भी।

vikram7 said...

2-वो है इक संगदिल ये जानकर भी चाहा है,
क्यों न हो शिक़वा गिला ,ये तो हक़ हमारा है,
ग़र वो समझें मुझे अपना तो इक ख़त लिख दें
ढूंढ पाओ ..
वाह..अति सुन्दर अभिव्यक्ति

seema gupta said...

है जुदा नींद मेरी रातों की तनहा दिन हैं,
ऐसा कुछ हाल मेरा कहना के उनके बिन है.
जो यही उनका भी हो हाल तो इक ख़त लिख दें...
मन को गुदगुदा गया ये मनमोहक गीत

regards

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने, ओर बहुत सुंदर कविता आप का धन्यवाद

वन्दना अवस्थी दुबे said...

खूबसूरत गीत पढवाने और सुनवाने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद. रमजान का विवरण पढ कर मज़ा भी आया और कई जानकारियां भी मिलीं. ५० डिग्री तापमान पढकर ज़रूर लगा जैसे हम किसी ठन्डे मुल्क में हों.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत बढिया जानकारी दी आपने वहां के रमजान के बारे में. ५० के उपर का तापमान, स्वाईन फ़्ल्यु का डर होने के बावजूद भी पुरी रौनक बरकरार है, यह जानकर बडा अच्छा लगा.

दोनों ही गीत/गजल बहुत ही सुंदर और कर्णप्रिय बन पडे हैं. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

रश्मि प्रभा... said...

ढूंढ पाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
नहीं मुमकिन अगर मिलना तो इक ख़त लिख दें,
geet aur aawaaz dono ne mantramugdh kiya hai

अर्कजेश said...

कविता अच्छी है एक अलग अन्दाज में । अभी सिर्फ़ पढी है ! सुनना बाकी है ।

दिगम्बर नासवा said...

अल्पना जी .......... आपके द्बारा लिए चित्रों को गल्फ न्यूज़ में भी पसंद किया ये बधाई की बात है ......
इस लाजवाब रचना ने बीते समय की, पुराने घर की, गुजरी हुयी तनहाइयों की याद करा दी ......... फिर उनके पैगाम आने की ख़ुशी का एहसास भी सिमटे हुए है आपकी रचना ....... इस सब के अलग आपकी आवाज़ का जादू भी कमाल कर रहा है ........
बहुत दिनों बाद आपका ब्लॉग महका है और कमाल का महका है ..........

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

बहुत सुन्दर लग रही हैं रमजान की तस्वीरें।

इस्लाम में इण्ट्रा-रिलीजन भाईचारा प्रचुर है; पर विश्वबन्धुत्व के प्रति उसमें पर्याप्त स्पेस और सहिष्णुता है - इस पर मन शंकित रहता है। और इसी कारण उचाट भी।

Atmaram Sharma said...

वो है इक संगदिल ये जानकर भी चाहा है,
क्यों न हो शिक़वा गिला ,ये तो हक़ हमारा है,

बहुत गहरे तक असर करती है.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बाद मुद्दत के ये पैगाम उनका आया है..
मुझको समझा है मेरे प्यार को अपनाया है..
मुड़ के जाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
ठहरो दो पल

बहुत खूब लिखा है आपने अल्पना चित्र भी वहां के बहुत अच्छे लगे ...गीत अभी सुन नहीं पायी अच्छा ही होगा सुन कर फिर आते हैं यहाँ

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अल्पना अभी अभी आपका गीत सुना बहुत ही बढ़िया ..

Science Bloggers Association said...

गीत के भावों ने मन को छू लिया। इस रूमानी गीत के लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

अल्पना जी ,
नमस्कार,
आप के इस सचित्र वर्णन से हम अपने आप को भी वहाँ उपस्थित महसूस करते हैं।इन सभी जानकारियों के लिये आप को बहुत बहुत धन्यवाद,आशा है आप ये सिलसिला जारी रखेंगी।आप के गीतोख के बारे में बस इतना ही कहूँगा कि आप के कई गीत तो मेरे मोबाइल में भी हैं जिसे मैं अक्सर सुनता हूँ,इस गीत को डाउनलोड कर के बाद में सुकून से सुनूंगा।आप का यह संगीतमय प्रयास बहुत ही सराहनीय है और इसके लिये आपको विशेष धन्यवाद.......

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

अल्पना जी ,
नमस्कार,
आप के इस सचित्र वर्णन से हम अपने आप को भी वहाँ उपस्थित महसूस करते हैं।इन सभी जानकारियों के लिये आप को बहुत बहुत धन्यवाद,आशा है आप ये सिलसिला जारी रखेंगी।आप के गीतो के बारे में बस इतना ही कहूँगा कि आप के कई गीत तो मेरे मोबाइल में भी हैं जिसे मैं अक्सर सुनता हूँ,इस गीत को डाउनलोड कर के बाद में सुकून से सुनूंगा।आप का यह संगीतमय प्रयास बहुत ही सराहनीय है और इसके लिये आपको विशेष धन्यवाद.......

ओम आर्य said...

अतिसुन्दर .......

रंजना said...

वाह !! वाह !! वाह !!

सीधे सच्चे कोमल भावों को आपने जो शब्द और स्वर दिए हैं......पचास डिग्री तापमान में लगता है ठंडी फुहारें पड़ रही हैं...वाह !!

बहुत बहुत सुन्दर...

योगेश स्वप्न said...

surili manmohak awaz men manbhavan geet, alpana ji dheron badhai sweekaren.

अर्चना तिवारी said...

बहुत सुन्दर

Arvind Mishra said...

भावनाओं के इन्द्रधनुषी कोलाज !

क्रिएटिव मंच said...

भावपूर्ण सुन्दर रचना
मनमोहक सुन्दर चित्र
कर्णप्रिय सुन्दर गायन
सार्थक सुन्दर पोस्ट
आकर्षक सुन्दर ब्लॉग

ग्रेड - * * * * *

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

अल्पना जी खूबसूरत गीत को मधुर स्वर में सुनवाने से मज़ा और बढ़ गया !
ऐसे ही प्रयास करतें रहें और तस्वीरे सुन्दर लगीं - ख़ास कर के आकाश और सूर्य की
पसंद कर चाप जाने की बधाई -
- अच्छा कार्य जारी रखें

- लावण्या

अमिताभ मीत said...

बहुत बढ़िया लिखा है ....

सुशील कुमार छौक्कर said...

सुन्दर फोटो को देख कर वहाँ का कुछ अंदाजा लग गया। वैसे आजकल खत कौन लिखता है पर ये खत वाला गीत बहुत ही पसंद आया।
ढूंढ पाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
नहीं मुमकिन अगर मिलना तो इक ख़त लिख दें,

बहुत बेहतरीन। भावों को बहुत ही सुन्दर शब्दों से कह दिया। अफसोस की गीत आज नही सुन पाऐगे जी।

महफूज़ अली said...

tasveeren bahut hi khoobsoorat hain.....

1-है जुदा नींद मेरी रातों की तनहा दिन हैं,
ऐसा कुछ हाल मेरा कहना के उनके बिन है.
जो यही उनका भी हो हाल तो इक ख़त लिख दें...

ढूंढ पाओ ...

bahut hi touchy lines hain.....

Regards....

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

अल्पना जी, हम तो अभी तक आपको लेखिका, कवियत्री और गायिका के रूप में ही देखते थे लेकिन आपके द्वारा लिए गए इन चित्रों को देखकर तो मानना पडेगा कि आपको तो फोटोग्राफी में भी दक्षता हासिल है..... सूर्यास्त वाली तस्वीर तो लाजवाब है!
गीत और गजल भी बेहद कर्णप्रिय्!! एक निवेदन है कि यदि हो सके तो कभी कोई भजन इत्यादि भी आपकी मधुर आवाज में सुनने को मिल सके!!
शुभकामनाऎँ......

हिमांशु । Himanshu said...

"है जुदा नींद मेरी रातों की तनहा दिन हैं,
ऐसा कुछ हाल मेरा कहना के उनके बिन है".

आपकी लिखी इन पंक्तियों ने प्रभावित किया । सहजता की बानगी दिख रही है आपकी पूरी रचना में ।

चित्र तो बेहद खूबसूरत हैं । आभार ।

Kishore Choudhary said...

आपकी आवाज़ में इतना मधुर गीत सुनना सुखकारी है. पोस्ट में विलायत के मौसम की महक भी बखूबी घुली हुई है. वैसे आपके यहाँ जो भी सुनता हूँ उसमे ये गीत अब तक का सबसे प्रिय गीत लग रहा है.

अर्शिया said...

भावनाओं का इन्द्रधनुष उग आया हो जैसे।
{ Treasurer-S, T }

kavita said...

Sunset aur Mall ke tasveeren aapke ankhon se dekhen ,mera ahobhagya hai.....apke blog se parichay hua,bahut accha laga....thank you for visiting my blog and leaving such kind words.

संगीता पुरी said...

वाह !!
क्‍या खूब !!
आनंद आ गया !!

दिलीप कवठेकर said...

सूर्यास्त का चित्र बहुत ही मनोहारी है, और artistic value लिये हुए है.आपके चतुर्मुखी प्रतिभा का एक और पहलू... लाजवाब.

शायद यह चित्र अल मख्तूम पुल के आस पास से लिया हुआ है?

बडे दिनों बाद आपका गीत सुना. काफ़ी सुरीला और रवानी भरा गीत गाया है, और मधुरता लिये हुए है. इस बार देर से आया यह गीत. कृपया अगले गीत में देरी नहीं करें.

गीत भी बडा भावुक है.संवेदना का इज़हार भी मौलिक है.

raj said...

ढूंढ पाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
नहीं मुमकिन अगर मिलना तो इक ख़त लिख दें, ...kitni masoom si khwahish hai...very emotional...milna mumkin nahi to bus ek khat likhde....i hv no words...really nice.....baat muddat ke jo unki yaad aayee dil me thhahri bhi nahi dil se juda bhi na huee...

गर्दूं-गाफिल said...

गीत बहुत ही सुन्दर है

सीधी सरल सपाट
दिल से दिल की बात

आयेगी जरूर चिट्ठी तेरे नाम की

बधाई

सुशीला पुरी said...

आपका गीत मन को छूने वाला है ..........आवाज और भी पुरकशिश ,..........साथ में आपने अपने शहर की जिन हरारतों को कलम
की नोक से उकेरा है वह अनुपम है ........बधाई

मीत said...

बाद मुद्दत के ये पैगाम उनका आया है..
मुझको समझा है मेरे प्यार को अपनाया है..
मुड़ के जाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
ठहरो दो पल ..

ठहरो दो पल को ज़रा हम भी उन्हें ख़त लिख दें...
ऐ हवाओं...
touch my heart...
meet

काव्या शुक्ला said...

दुनिया आपको एक अच्छी कवियत्री मानती है, पर मेरी दृष्टि में आप उससे भी अच्छी गायिका हैं। इस प्रतिभा को मांजती रहें, आगे बहुत सम्भावनाएं हैं।
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

Mumukshh Ki Rachanain said...

शहर, माल, स्कूल का जिवंत चित्रमय वर्णन दिल को छो गया

आपके गीत तो बेहतरीन होते ही हैं.
निम्न पंक्तियाँ दिल को छो गई.............

ढूंढ पाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
नहीं मुमकिन अगर मिलना तो इक ख़त लिख दें,

आकी मधुर, दिलकश आवाज़ ने तो इस गीत में चार चाँद ही लगा दिए.

बधाई ही बधाई.........................

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर

मीत said...

जल्द ही पढने को मिलेगी आपको मन के ऊपर एक रचना...
और जानकर बेहद ख़ुशी हुयी की मेरी रचनाओं का किसी को तो इंतज़ार है...
मीत

क्रिएटिव मंच said...

*******************************
C.M. is waiting for the - 'चैम्पियन'
प्रत्येक बुधवार
सुबह 9.00 बजे C.M. Quiz
********************************
क्रियेटिव मंच
*********************************

शरद कोकास said...

मुझे रमज़ान के दिनो यानि रातों का यह दृष्य बहुत हांट करता है यहाँ भी मै कभी कभी रमज़ान मे रात को उन मोहाल्लों मे निकल जाता हूँ जहाँ खाने की दुकाने सजी होती हैं । यह जीवंत विवरण पढकर अच्छा लगा । और गीत के बारे मे क्या कहूँ इस मेटेलिक आवाज़ का तो मै दीवाना हो गया हूँ । आज शाम से ही आपकी शागीर्दी मे एकलव्य बना हुआ हूँ और लगभग सफल हो गया हूँ कल आपको पहला क्लिप भेजूंगा । लेकिन आपका गीत तो .. अब यह जो भी बिखरा बिखरा है उसे एक जगह इकठ्ठा कर ही लीजिये -आपका शरद कोकास

भूतनाथ said...

vaah........!![yah ek shabd bhi kyaa kisi vaahya se kam hai....???]

मोहन वशिष्‍ठ 9988097449 said...

ढूंढ पाओ ऐ हवाओं तो कहना उनसे ,
नहीं मुमकिन अगर मिलना तो इक ख़त लिख दें,

very well alpna ji nice and sorry for late
your wellcome at my blog

अनूप शुक्ल said...

कविता मैंने पढ़ तो ली थी लेकिन सुनी अब । गीत भी। बहुत अच्छा लगा आपकी आवाज में ये गीत सुनना! शुक्रिया।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

गीत के बहाने प्रेम की अनुभूतियों का साक्षात्कार हो गया।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aapke shahar ki garmi 50 se upar he, aour is garmi me aapaka geet ynha hame sookun de rahaa he/ bahut khubsoorat bol he,
वो है इक संगदिल ये जानकर भी चाहा है,
क्यों न हो शिक़वा गिला ,ये तो हक़ हमारा है,
aapki koshish mujhe hamesha abhyast jaan padti he..kyoki aapki aavaz bhi geeto ki tarah surili he/

कमलेश शर्मा said...

सुन्दर गीत .....बहुत अच्छा लगा आपकी आवाज में ये गीत सुनना

Nirmla Kapila said...

लेट आना भी सफल रहा बहुत सुन्दर आवाज़ है आपकी आवाज़ के जादू मे गुम हैं और तस्वीरों का आनन्द ले रही हूँ बहुत सुन्दर बधाई

सुलभ सतरंगी said...

क्यों न हो शिक़वा गिला ,ये तो हक़ हमारा है,
ग़र वो समझें मुझे अपना तो इक ख़त लिख दें...

सीधे दिल से मालूम पड़ते हैं.

आप जरा इधर भी तशरीफ़ लाये... (यादों का इंद्रजाल)

शुक्रिया!!