January 23, 2009

दो त्रिवेणियाँ



हर दिन तलाशती हूँ जीवन -परिभाषा के शब्द ,

मेरा शब्द कोष अधूरा है या तलाशना नही आता ?



वह परिभाषा जो तुमने ही तो बतलायी थी मुझे.


टूट कर जुड़ती रही नीर भरी गगरी,


रिसता रहता है खारा पानी ,

फिर भी छलका जाते हो 'तुम ' आते -जाते!
[अल्पना वर्मा द्वारा लिखित]

61 comments:

विनय said...

बहुत ही सुन्दर हैं दोनों त्रिवेणियाँ

---आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें

limit said...
This comment has been removed by the author.
seema gupta said...

"हर दिन तलाशती हूँ जीवन -परिभाषा के शब्द ,
मेरा शब्द कोष अधूरा है या तलाशना नही आता ?
" जीवन परिभाषा तलाशना शायद उतना आसान ही नही जितना हम समझते हैं....क्यूंकि रोज ही तो परिभाषा कुछ बदल सी जाती है.....और शब्द कभी मौन हो जातें है और जो बोलते हैं वो भी पूर्ण रूप से वाक्यों में ढल नही पाते और हम समझ नही पाते.....दोनों त्रिवेणी बहुत गहरे भाव समेटे है..."
regards

मोहन वशिष्‍ठ said...

टूट कर जुड़ती रही नीर भरी गगरी,


रिसता रहता है खारा पानी ,

फिर भी छलका जाते हो 'तुम ' आते -जाते!

वाह जी बेहतरीन त्रिवेणी हैं अल्‍पना जी बहुत अच्‍छा लगा पढकर
गणतंत्र दिवस की ढेरों शुभकामनाएं

रंजना [रंजू भाटिया] said...

दोनों ही बहुत सुंदर लगी ..पहली कोशिश ही कामयाब है ..खासकर परिभाषा बहुत पसंद आई

अविनाश said...

हर दिन तलाशती हूँ जीवन -परिभाषा के शब्द ,
मेरा शब्द कोष अधूरा है या तलाशना नही आता ?
सुंदर रचना अल्पनाजी, एक सुंदर और सफल प्रयास
धन्यवाद

मनुज मेहता said...

wah!
Shayad isey hi kehte hain Gagar mein Sagar bharna.

हर दिन तलाशती हूँ जीवन -परिभाषा के शब्द ,
मेरा शब्द कोष अधूरा है या तलाशना नही आता ?


वह परिभाषा जो तुमने ही तो बतलायी थी मुझे

itna gehra, bahut shaandaar buna hai aapne.

manuj mehta

सुशील कुमार छौक्कर said...

अल्पना जी हमें तो त्रिवेणी का क ख ग भी नही पता। वैसे तो जी हमें ये दोनो बहुत अच्छी लगी। और पहले वाली तो सच दिल को छू गई। एक हाथ में इतने हुनर, अगले हुनर का इंतजार।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुन्दर रचना. जीवन की परिभाषा... शायद पकड मे नही आ पाती. जीवन प्रतिपल बदलता जाता है. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

बहुत शुभकामनाए.

रामराम.

Udan Tashtari said...

सोनों ही बेहतरीन रहीं..दूसरी वाला लाजबाब!! बधाई, और लिखिये.

दिगम्बर नासवा said...

टूट कर जुड़ती रही नीर भरी गगरी,
रिसता रहता है खारा पानी ,
फिर भी छलका जाते हो 'तुम ' आते -जाते!

आप का लेखन के साथ नए नए प्रयोग करना अच्छा लगता है.............कुछ जानने को मिलता है.
वैसे तो दोनों ही सुंदर हैं, पर मुझे ये ज्यादा अच्छी लगी

makrand said...

bahut sunder rachanayen

रश्मि प्रभा said...

बहुत ही बढिया प्रयास.........
दोनों त्रिवेणियों का अपना रंग है

mehek said...

dono triveni lajawaab,khas karke chalka jaate ho tum aate jaate,atisundar.

प्रकाश गोविन्द said...

काश कि मैं भी साहित्य की
इन जटिलताओं को समझ पाता !
कभी प्रयास नहीं किया !

बस शब्दों में छुपे
अर्थों और भावों को
समझने की कोशिश करता हूँ !

उस लिहाज से जीवन और संबंधों को
रेखांकित करती
उत्कृष्ट पंक्तियाँ हैं !

गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं

डॉ .अनुराग said...

दूसरी त्रिवेणी अच्छी है...बेहद नजदीक ..आपको मेल करूँगा .....कुछ ...बाँटने के लिए

"अर्श" said...

अल्पना जी दूसरी त्रिवेणी तो जैसे चुरा लिया आपने ... मतलब के मैं तो चोरी हो गया इतनी गज़ब की लिखी है आपने इसे .. ऐसा भाव तो पुरी कविता में नही होती जो आपने चन्द अल्फाज़ में मुक्कमल किया है बहोत ही बढ़िया बेहद उम्दा बहोत दिनों बाद आपको पढ़ने को मिला ,सुनने को कब मिलगा ?

आभार
अर्श

Gyan Dutt Pandey said...

यह तो बड़ी सुन्दर काव्य विधा है।
बहुत अच्छी लगी ये त्रिवेणियां।

dwij said...

नई विधा से परिचित करवाने और उस विधा में सुन्दर लिखने के लिए
बधाई.
सफल अभिव्यक्ति.

विवेक सिंह said...

ओ जी कमाल कर गए तुसी !

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

सुँदर प्रयास है आशा है आगे भी आपका लिखा, शीघ्र ,
यूँ ही पढने को मिलता रहेगा ..
बहुत स्नेह के साथ,
- लावण्या

अनिल कान्त : said...

बहुत सुंदर काव्य रचना ....

अनिल कान्त
मेरा अपना जहान

राज भाटिय़ा said...

दोनों त्रिवेणियाँ एक से बढ कर एक भाई हम किस त्रिवेणी की तारीफ़ करे किस की नही.... हमे तो दोनो मै ही उदासी लगी, वेसे हमे त्रिवेणियो की इतनी समझ भी नही.कही कुछ गलत कह दिया तो माफ़ करना
धन्यवाद

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) said...

itni gahri cheezon pe apan to kuchh kah hi nahin paate.........bas dub kar rah jaate hain...aur phir baahar bhi nahin aate......alpana ji ab hamen baahar to nikaalo...!!(mujhe nahin pata ki main jo aise khilandre-se comments kartaa hun....vo kitne uchit hain yaa anuchit....bas man men jo aa jata hai....udel deta hoon....sochta hi nahin ki saamne wala kya sochega....mere man men to sadaa yahi bhaav rahate hain...ki sabhi mere dost hain....khuda kee tarah........!!

सचिन मिश्रा said...

Bahut badiya

विक्षुब्ध सागर said...

बहुत अच्छा परिभाषित किया अपनी संवेदनाओं को !
मेरे ब्लॉग पर भी आपकी टिपण्णी के लिए धन्यवाद ! किसी को अपना हम-ख्याल देखना अच्छा अच्छा सा लगता है !
.....ब्लॉग पर आते रहिएगा !

अल्पना वर्मा said...

आप सभी को धन्यवाद..कि आप को त्रिवेणियाँ पसंद आयीं..
@राज जी माफ़ी की कोई बात नहीं क्यूँ कि आप तो सही समझे हैं--ये दोनों उदासियाँ लिए हुए हैं..
@राजीव जी -आप जो जैसे लिखें आप की बात समझ आ गई -आप को त्रिवेनियाँ बहुत पसंद आईं-जान कर अच्छा लगा.आप ने एक बार कहा था कि किसी भी ब्लॉगर की रचनाओं में विविधता होनी चाहिये ,बस वही प्रयास है.
@सुशील जी ,दिगंबर जी--त्रिवेणी लिखने की प्रेरणा डॉ.अनुराग जी की त्रिवेणियाँ है.उन की पढ़ते रहते हैं और कल गुलज़ार साहब की भी पढीं तो लगा क्यूँ न इस विधा में लिखा जाए.सच बहुत कम शब्दों में कह सकते हैं कई बातें.
और हाइकु जैसी कड़ी शर्तें भी नहीं हैं.
@प्रकाश जी आप तो सही भाव समझ गए हैं.आप तो साहित्य का अच्छा ज्ञान रखते हैं.फिर यह जटिल कहाँ रही?

रौशन said...

पहली बार ही लिखी है
और लिखेंगी तो शायद और बेहतर बन सकेंगी त्रिवेणिया.

Atul Sharma said...

Woh jo kuch bhi jo anayaas likha jaata hai, khoobsurat hota hai, aapki kavita bhi aisi hi thi. Badhai.

PN Subramanian said...

लाजवाब. क्या कल्पना है. बहुत ही अच्छा लगा. आभार

vikram7 said...

टूट कर जुड़ती रही नीर भरी गगरी,......

अति सुन्दर रचना बधाई

अवाम said...

सुंदर रचना.

chopal said...

हर दिन तलाशती हूँ जीवन -परिभाषा के शब्द ,


मेरा शब्द कोष अधूरा है या तलाशना नही आता ?




वह परिभाषा जो तुमने ही तो बतलायी थी मुझे.


जीवन जो एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसे सुलझाना शायद साधारण मानव के बस की बात नहीं है। और जो इस पहेली को सुलझा ले फिर वो मानव साधारण नहीं।

www.merichopal.blogspot.com

विक्रांत बेशर्मा said...

आपकी दोनों त्रिवेणियाँ,बहुत अच्छी लगी !!!!!!

मोहन वशिष्‍ठ said...

आप सभी को 59वें गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं...

जय हिंद जय भारत

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah...
बहुत बढ़िया...

hempandey said...

हम जीवन की परिभाषा तलाशने के प्रयास में ही जीते हैं

महेन्द्र मिश्र said...

सटीक
गणतंत्र दिवस के पुनीत पर्व के अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामना और बधाई .

Arvind Mishra said...

महादेवी याद हो आयीं सहसा -नीर भरी दुःख की बदली ......!

मोहन वशिष्‍ठ said...

गणतंत्र दिवस की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं

http://mohanbaghola.blogspot.com/2009/01/blog-post.html

इस लिंक पर पढें गणतंत्र दिवस पर विशेष मेरे मन की बात नामक पोस्‍ट और मेरा उत्‍साहवर्धन करें

Tapashwani Anand said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाए |
इश्वर हम सभी को अपने कर्तव्यों का पालन कराने की शक्ति प्रदान करे .....

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) said...

आप का स्वागत है.'.यूँ तो वतन से दूर हूँ लेकिन इस की मिट्टी मुझे हमेशा अपनी ओर खींचे रहती है..................भगवान् करे कि आखिरी साँस तक ये मिटटी आपको खींचती ही रहे..................!!

vikram7 said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

WaziF said...

Alpana ji I've read your Kavita's and impressed with your creativity... you're a great writer and should keep on writing like that... I like to say keep writing on various aspects of life and bring the beauty or ugliness of anything... keep sharing as well.

sanjay vyas said...

aapki dono rachnaon men amoortan ke karan kai kai paath ho sakte hai, saath hi main ye bhi kahoonga ki is tarah amoort abhivyaktiyan kai bar shabdon ko vyarth hi kho bhi deti hai.

राज भाटिय़ा said...

आप को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

Udan Tashtari said...

आपको एवं आपके परिवार को गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

अविनाश said...

अल्पनाजी
आप को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं
ब्लॉग पे टिप्पणी कर हौसला बढ़ाने का तहे दिल से शुक्रिया.
धन्यवाद

आकांक्षा~Akanksha said...

सुन्दर ब्लॉग...सुन्दर रचना...बधाई !!
-----------------------------------
60 वें गणतंत्र दिवस के पावन-पर्व पर आपको ढेरों शुभकामनायें !! ''शब्द-शिखर'' पर ''लोक चेतना में स्वाधीनता की लय" के माध्यम से इसे महसूस करें और अपनी राय दें !!!

Harkirat Haqeer said...

Alpna ji ,triveni bhot acchi likhti hain aap.......

आप को bhi गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....

manu said...

मेरा शब्द कोष अधूरा है या तलाशना नही आता
आपको तो त्रिवेणी में भी जाने की ज़रूरत नहीं है मैडम,
ये एक ही लाइन काफ़ी है ......और इनके साथ साथ बहुत बधाई उस सीढी पर बैठी लड़की की तस्वीर के लिए ...जो बहुत कुछ कह रही है.............कैमरे की एक क्लिक और चार लाइनों का बड़ा कमाल ...

muskan said...

बहुत सुंदर...

मोहन वशिष्‍ठ said...

फोटू बदल लिया अच्‍छा फोटो है पहचान में नहीं आए

Dilip Gour said...

अल्पना जी,
आपको गणतंत्र दिवस की शुभकामना,
आदाब अर्ज हैं,
कोई न तलाश पाया हैं जीवन की परिभाषा,
जो चला जानने,
वो ख़ुद बन गया एक परिभाषा,
क्या खूब लिखा लेकिन सबसे अच्छा हैं आपके ब्लॉग का शीर्षक,
व्योम के उस पार, बहुत बहुत बढ़िया,
दिलीप गौड़
गांधीधाम

ऋचा जोशी said...

त्रिवेणी पर तो हमारे साथियों ने ही इतना कह दिया है कि कुछ कहने को बचा नहीं लेकिन आपकी आवाज में गीत सुन रहीं हूं। कर्णप्रिय है। आपके ब्‍लाग पर आकर अच्‍छा लगा।

शिवराज गूजर. said...

bahut hi khoobsoorat rachana. triveni pahali baar padi man ko chho gayee. gantantra divas ki bahut bahut badhai.
aap mere blog par aaye bahut achha laga. aap ye avajahi regular banaye rakhen.

Jimmy said...

bouth he aacha post hai ji

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SWAPN said...

behtareen, ati uttam, GAGAR MEN SAAGAR. BADHAAI.

आनंदकृष्ण said...

आज आपका ब्लॉग देखा... बहुत अच्छा लगा. मेरी कामना है की आपके शब्दों को ऐसी ही ही नित-नई ऊर्जा, शक्ति और गहरे अर्थ मिलें जिससे वे जन सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति का समर्थ माध्यम बन सकें....
कभी फुर्सत में मेरे ब्लॉग पर पधारें;-
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शुभकामनाओं सहित सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर

KK Yadav said...

Ati Sundar...!!
गाँधी जी की पुण्य-तिथि पर मेरी कविता "हे राम" का "शब्द सृजन की ओर" पर अवलोकन करें !आपके दो शब्द मुझे शक्ति देंगे !!!

Rohit Tripathi said...

टूट कर जुड़ती रही नीर भरी गगरी,

रिसता रहता है खारा पानी ,

फिर भी छलका जाते हो 'तुम ' आते -जाते!

bahut hi sundar