January 16, 2008

गीत- ' भूल जायेंगे तुम्हें '

यह गीत मुझ से सबसे ज्यादा सुना गया है ,दो उर्दू अखबारों में प्रकाशित भी हो चुका है.
मुझे भी बेहद प्रिय है.

भूल जाएंगे तुम्हें
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जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,
जब कभी सपने भी हम से रूठ जाएंगे,
भूल जायेंगे तुम्हें हम भूल जायेंगे .

हमने अपनी उम्र का सौदा किया जिससे,
वो मिलेगा फ़िर कभी तो पूछूंगी उस से,
बिन तुम्हारे अपना क्या हम मोल पाएंगे,
भूल जायेंगे तुम्हें हम भूल जायेंगे......

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,

तुमने माना था हमी को प्यार के क़ाबिल,
फ़िर बने क्यों मेरे अरमानों के तुम क़ातिल,
जब कभी आँखों से आंसू सूख जाएंगे,
भूल जायेंगे तुम्हें हम भूल जायेंगे......

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,

संग तुम्हारे कटते थे जो मेरे रात और दिन,
अब कटेगी कैसे कह दो ज़िंदगी तुम बिन,
जब कभी साँसों के बन्धन छूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे.

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,

डूबती कश्ती ने तुमको समझा था साहिल,
लेकिन तुम ने दे दिया गैरों को अपना दिल,
जब कभी धड़कन से रिश्ते छूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे.

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,

एक मुठ्ठी आसमां की चाह थी हमको ,
लेकिन तुमसे नाउम्मीदी ही मिली हमको,
जब फरिश्ते मौत के हम को सुलायेंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे.

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे

-written by Alpana Verma [2003]

14 comments:

mehek said...

sundar geet hai alpanaji,jab jana hi hai duniya se ek din bhula ke sab kuch,ek tujhe yaad rakhu aisa tho nahi ho sakta.

सजीव सारथी said...

अल्पना जी बहुत सुंदर गीत है आपका,

Anonymous said...

wah! wah! wah!bahut khuub likhti hain aap!

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' said...

भावपूर्ण ... !

आपके सतत लेखन के लिए ईश्वर से प्रार्थना

Dr. RAMJI GIRI said...

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,

bahut hi sundar aur laybadh virah-geet .

DR.ANURAG ARYA said...

डूबती कश्ती ने तुमको समझा था साहिल,
लेकिन तुम ने दे दिया गैरों को अपना दिल,
जब कभी धड़कन से रिश्ते छूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे.

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे,

achhe lage ye shabd aapke geet me...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आपके शब्दों ने मन को भाव विभोर कर दिया।

अबरार अहमद said...

bahut kub. dil bhar aaya. likhte rahiye

Anonymous said...

डूबती कश्ती ने तुमको समझा था साहिल,
लेकिन तुम ने दे दिया गैरों को अपना दिल,
जब कभी धड़कन से रिश्ते छूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे.

Oye hoye....kya likha hai...dil bhar aaya yeh kavita padh kar. I think you shud keep writing for all those people who connect with emotions well, aaj kal kahan likhpatey hain log itne gehraiyi se. Excellent piece of work!! Keep writing for kadardaans like me :)
Cheers -Jyoti

Piyush k Mishra said...

baht hi bhaavpoorna kavita hai.saral aur sundar.dard ka ahsas dilaati hui..dukh,shikaayat aur tanj kasti hui kavita.

DR.ANURAG ARYA said...

एक मुठ्ठी आसमां की चाह थी हमको ,
लेकिन तुमसे नाउम्मीदी ही मिली हमको,
जब फरिश्ते मौत के हम को सुलायेंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे.

जब कभी यादों के दर्पण टूट जाएंगे,
भूल जाएंगे तुम्हें हम भूल जाएंगे

hamne bhi sun liya....bahut khoob.

neeraj tripathi said...

bahur sunder..

Anonymous said...

hi Alpana,
I just heard yr Poem 'Bhool jayenge'...i must say.... beautiful khayal... beautiful andaz-e-bayan!
Excellent...
I am glad to know that u are from UAE.. i am here too :)
Take care
SERENE

Anonymous said...

"Tootane waale di, hote hai kuchh khaas"...

Dil naa toote to itanee sundar rachana nahi ban sakegee..

I could not stop sending you these 4 lines..

वो जन्म भी होगा कभी, जिस जन्म में तुझे पायेँगें
एक पल को ही सही, हुम भी तुम्हे याद आयेँगे
देखने की, बात करने की, बुझेगी प्यास हो
तुझे याद करते टूट जायें, ज़िन्दगी की साँस हो