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January 15, 2008

छोटी कविता- ' अहसास '

किस कहानी का सुरीला आगाज़ हो तुम ?

उड़ चला है मन मेरा न जाने कहाँ ,

क्या कोई परवाज़ हो तुम?


भेदना चाहूँ तो भी खुलता ही नहीं ,

सदियों से दफ़न गहरा

कैसा अजब राज़ हो तुम?


छू जाता है ,बिन आहट

मेरी रूह को अक्सर,

मीठा सा अहसास हो तुम!

-
अल्पना वर्मा

3 comments:

परमजीत बाली said...

बढिया रचना है।
छू जाता है ,बिन आहट

मेरी रूह को अक्सर,

मीठा सा अहसास हो तुम!

mehek said...

xhu jata hai aahat sa,mitha ahsas ho tum sundar

DR.ANURAG ARYA said...

udasiya lagta hai priya hai aapko.