September 29, 2007

दिल की बात

प्यार का दरिया बहाओ,तो कुछ बात बने,
वीरान बस्ती को बसाओ,तो कुछ बात बने.

ख़ुद से करते हो क्यूं दिल की हर बात ,
अपना हमराज़ बनाओ तो कुछ बात बने .

पराई रोशनी से करते हो घर को रोशन?,
अपने अंधेरो को जलाओ तो कुछ बात बने .

नफ़रतो की आग में तन जलता है बहुत ,
प्यार हर दिल में बसाओ तो कुछ बात बने.

क्यूं उठाते हो मुठ्ठी की शक्ल में आवाज़ें ,
क़लम हथियार बनाओ तो कुछ बात बने.

सिक्कों की खनक से मुस्कराता नहीं आंसू ,
हँसता हुआ गीत सुनाओ तो कुछ बात बने .

वो फ़र्श जिस पर बहा है लहू मासूमो का ,
गवाह उस को ही बनाओ तो कुछ बात बने.

क्यूं अंधेरे उजालों पर हरदम हावी हों ,
अमावास में चाँद खिलाओ तो कुछ बात बने.

जिसकी पलकें नम ,दिल में परेशानियाँ हैं ,
'अल्प'उसको जो हंसाओ,तो कुछ बात बने .

-Alpana Verma

22 comments:

मोहिन्दर कुमार said...

अल्पना,

खूबसूरत अल्फाज और उतने ही खूबसूरत दिल के जजबात...
लिखते रहिये.


पराई रोशनी से करते हो क्यूं घर को रोशन,
अपने अंधेरो को जलाओ तो कुछ बात बने .

वो फ़र्श जिसपे बहा है लहू मासूमो का ,
गवाह उस को बनाओ तो कुछ बात बने.

Madhur Srivastava said...

ख़ुद से करते हो क्यूं दिल की बात ,
अपना हमराज़ बनाओ तो कुछ बात बने .

Awesome maam...bahut hi khoobsoorat kalaam hai..likhte rahiye

RATIONAL RELATIVITY said...

पराई रोशनी से करते हो क्यूं घर को रोशन,
अपने अंधेरो को जलाओ तो कुछ बात बने .
खूबसूरत एह्शास देती आपकी कविता.

Poonam Agrawal said...

Pyar her dil mein basaao to kuch baat bane...

Bas yahi soch agar harek dil mein paida ho jaye to
nafrat shabd ke maine hi khatam ho jayen...

Bahuut khubsurat alfaaj hai ye....
Keep it up.
All the best.

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' said...

क्यूं उठाते हो मुठ्ठियो की शक्ल में आवाज़ें ,
क़लम हथियार बनाओ तो कुछ बात बने.

सिक्कों की खनक से बनता नहीं हर आँसू मुस्कान,
ख़ुशनुमा एक गीत सुनाओ तो कुछ बात बने .

विपुल said...

अल्पना जी हिंद-युग्म पर की गयी टिप्पणी से आपकी प्रोफ़ाइल देखी और आपके ब्लॉग पर आया .
बहुत अच्छा लिखा है आपने .. वाह.. भाव खुल कर सामने आ रहे हैं!

ख़ुद से करते हो क्यूं दिल की बात ,
अपना हमराज़ बनाओ तो कुछ बात बने .

सिक्कों की खनक से बनता नहीं हर आँसू मुस्कान,
ख़ुशनुमा एक गीत सुनाओ तो कुछ बात बने .


सुंदर रचना के लिए बधाई

विपुल said...

अल्पना जी हिंद-युग्म पर की गयी टिप्पणी से आपकी प्रोफ़ाइल देखी और आपके ब्लॉग पर आया .
बहुत अच्छा लिखा है आपने .. वाह.. भाव खुल कर सामने आ रहे हैं!

ख़ुद से करते हो क्यूं दिल की बात ,
अपना हमराज़ बनाओ तो कुछ बात बने .

सिक्कों की खनक से बनता नहीं हर आँसू मुस्कान,
ख़ुशनुमा एक गीत सुनाओ तो कुछ बात बने .


सुंदर रचना के लिए बधाई

sunita (shanoo) said...

अल्पना जी आज हिन्द-युग्म पर आपको देखा अच्छा लगा..इन्सान का इन्सान के प्रति प्रेम और अपनत्व का भा्व बहुत जरूरी है...और आपकी रचनाओं में भी वही बात नजर आती है...
खूबसूरत और बेहतरीन रचनायें...

सुनीता(शानू)

Reetesh Gupta said...

क्यूं उठाते हो मुठ्ठियो की शक्ल में आवाज़ें ,
क़लम हथियार बनाओ तो कुछ बात बने.

बहुत सुंदर ...खासकर ये पंक्तियाँ...बधाई

जै बांवरा said...

अल्पना जी, बहुत सुन्दर रचना ।
"अपने अंधेरो को जलाओ तो कुछ बात बने"
क्या बात है। असतित्व झन्झोङ के रख दिया।
बधाई हो।

जै बांवरा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आपकी गजल दिल को छू गयी। खासकर यह शेर तो बहुत ही अच्दा लगा-
जिसकी आवाज़ ख़ामोश,दिल में परेशानियाँ है,
'अल्प' उसको हंसाओ तो कुछ बात बने ।
बहुत-बहुत बधाई।

Sanjeet Tripathi said...

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ!!
तारीफ़ करना ही होगा!!
इस गज़ल का हर शेर अपने आप में शानदार है!!
तारीफ़ कबूल करें!!
शुभकामनाएं

chiraag said...

wow
very sweet voice.
unexpected for me.
congrats and keep it up.
chirag.

amit said...

hi alp !
bahut hee shanddar gazal liki hai aapne...
ख़ुद से करते हो क्यूं दिल की हर बात ,
अपना हमराज़ बनाओ तो कुछ बात बने .

पराई रोशनी से करते हो घर को रोशन?,
अपने अंधेरो को जलाओ तो कुछ बात बने .

सिक्कों की खनक से मुस्कराता नहीं आंसू ,
हँसता हुआ गीत सुनाओ तो कुछ बात बने .

shandaar alfaaz hai...or bahut hee khhbsurat soach hai...i wish ki aap hamesha aisa hee liktee rahey...gazal ka maza hee es baat mai hai ki pehlee line or dusaree line mai jameen or aasmaan sa contrast hoo...tabhee tho dost gzal ke do lineyn hee jameen aasaan ko sametey hue hotee hai..
wish u aal the best

Poonam Agrawal said...

Aapkee sabhi rachnaye padhi ..
sabkaa alad andaaj ..naya rang ..
nayee rachnaa .. nayee umang..
Mujhe sabhee bahut pasand aayee..
Keep it up..
All the best.

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" said...

alpna jee
bahut hi achchhi panktiyan hain
bahut bahut badhai
aapka kislay

Pramod Kumar Kush ''tanha" said...

नफ़रतो की आग में तन जलता है बहुत ,
प्यार हर दिल में बसाओ तो कुछ बात बने.

bahut khoob...sunder rachna...
badhaayee...

pl visit for my ghazals in my voice

http://binnewslive.com

M Verma said...

प्यार का दरिया बहाओ,तो कुछ बात बने,
वीरान बस्ती को बसाओ,तो कुछ बात बने.

अल्पना जी इस ज़ज़्बे को सलाम करता हू

बहुत सुन्दर है आपकी यह गज़ल. बहुत बहुत बधाई

रावेंद्रकुमार रवि said...

इस ग़ज़ल के तो सभी शेर अच्छे हैं!

prerna argal said...

सिक्कों की खनक से मुस्कराता नहीं आंसू ,
हँसता हुआ गीत सुनाओ तो कुछ बात बने .

वो फ़र्श जिस पर बहा है लहू मासूमो का ,
गवाह उस को ही बनाओ तो कुछ बात बने.
bahut sunder sher hain .saari najm hi behatrin hai.bahut hi gharai liye hue saarthak rachanaa,badhaai aapko.


please visit my blog.thanks.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत प्यारी गज़ल है

सादर

Anonymous said...

Thanks for your marvelous posting! I genuinely enjoyed reading it, you are a great author.I will be sure to bookmark your blog and will often come back down the road. I want to encourage yourself to continue your great job, have a nice day!