खामोशी
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'अंजलि भर
खामोशी समेटती हूँ,
बिखरा देती हूँ चारों और ,
क्यूँ कि -
इस भीड़ में,
जी नहीं लगता
तुम बिन...
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'अंजलि भर
खामोशी समेटती हूँ,
बिखरा देती हूँ चारों और ,
क्यूँ कि -
इस भीड़ में,
जी नहीं लगता
तुम बिन...
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