स्वदेश वापसी /दुबई से दिल्ली-'वन्दे भारत मिशन' Repatriation Flight from UAE to India

'वन्दे भारत मिशन' के तहत  स्वदेश  वापसी   Covid 19 के कारण असामान्य परिस्थितियाँ/दुबई से दिल्ली-Evacuation Flight Air India मई ,...

June 22, 2008

'खामोशी'

खामोशी
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'अंजलि भर


खामोशी समेटती हूँ,


बिखरा देती हूँ चारों और ,


क्यूँ कि -


इस भीड़ में,


जी नहीं लगता


तुम बिन...


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June 16, 2008

'ज़िंदगी'

पिछली कविता के कमेंट्स में किसी अनाम व्यक्ति ने रोमांटिक कविता लिखने का आग्रह किया मगर करूँ क्या? मेरी कलम ऐसी ही कवितायें लिखती है जो उस श्रेणी में आती नहीं.
यह कविता भी कई साल पहले की लिखी हुई है--अभी कुछ नया नहीं लिखा है सो पुरानी डायरी से यह कविता आप की नजर करती हूँ-

ज़िंदगी
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क़तरा क़तरा छंटती जाती है ज़िंदगी

मायूसी के धागों में बटती जाती हैज़िंदगी

जब कभी आँख से मोती टपके
दरया बनके बहती जाती है ज़िंदगी

तनहाइयों के देश में अकेली ही
खुद में सिमटती जाती है ज़िंदगी

यूँ तो पहले ना थी उदास इतनी
जाने क्यों गुमसुम रहती है ज़िंदगी

गीत उनका गाती हूँ अगर
पायलें छनकाती है ज़िंदगी

साथ बिते पल जो याद आते हैं
हँसती है खिलखिलाती है ज़िंदगी

और क्या कहूँ....

यूँ ही लम्हा लम्हा कटती जाती है जिंदगी

हाँ ,कटती जाती है जिंदगी।

-अल्पना वर्मा