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March 14, 2013

मेरा खज़ाना /मेरा पुरस्कार


२०१२-१३ का शैक्षिक सत्र समाप्त होने को है,परीक्षाएँ शुरू हुई हैं या समाप्त  होने को हैं  या फिर समाप्त हो चुकी हैं।
यहाँ एमिरात में अप्रैल के दूसरे हफ्ते से नया सत्र शुरू होगा।  गर्मियों की छुट्टियाँ जुलाई- अगस्त में होती हैं।
इस समय  नए दाखिलों का आना ,पुराने छात्रों का जाना लगा रहता है .इसी तरह शिक्षकों को भी अपने नए टाईम  टेबल की प्रतीक्षा रहती ही है,वहीँ पुरानी कक्षाएँ खतम होती हैं तो जिन छात्रों को आप पूरे साल पढाते रहे हैं उनसे जुड़ाव हो जाना सामान्य सी बात है।

खासकर जब आप किसी कक्षा के कक्षा-अध्यापक हों तो उस के हरेक  छात्र  से अपनत्व हो जाता है। मैं जब कक्षा  नवीं की छात्राओं  से पहली बार मिली तो उनमें से अधिकतर मेरे लिए अपरिचित थीं,लेकिन धीरे -धीरे साल गुज़रते -गुज़रते  उन सब का इतना विश्वास मिल पाया  कि हर छोटी-बड़ी बातें मुझ से आकर बताया करती थीं। कमज़ोर छात्राओं पर भी मेरा विशेष ध्यान रहा। इस सत्र के आखिरी दिन उन सब ने मिलकर मुझे यह कार्ड दिया जिस में सब ने अपने हस्ताक्षर किये हैं । यह मेरे लिए एक खुशनुमा सरप्राईज़ था ,जिसे आप के साथ यहाँ बाँटना चाह रही हूँ ...
Card by Grade 9 Students


चाहे शरारती छात्र हों या मेधावी ,साल के आखिर आते-आते सभी से लगाव होना स्वाभाविक है। खासकर जब बात छोटी कक्षाओं की हो,तो आप पायेंगे कि वे बिना लाग लपेट के अपने मन की बात कह देते हैं। शायद उनका निश्चल मन ही इसका उत्तरदायी है।
हर साल के गुज़रते ही आखिरी दिन छात्रों के पत्र मिलने शुरू हो जाते हैं जिस में उनके अपने विचार होते हैं ,शुभकामनाएँ होती हैं ,सादा कागज़ पर लिखे या किसी कार्ड की शक्ल में मिले इन भावों को सहेज कर रखना मुझे बेहद पसंद है।
सब से अधिक मुखर  स्नेह मुझे पाँचवी कक्षा के छात्रों से मिलता रहा  है,जिन्हें मैंने  विज्ञान पढाया . जिनमें अधिकतर  शरारती तो बेशक बहुत  होते हैं लेकिन  उतने ही स्नेह और सम्मान  देने वाले भी उन्हें पाया है। मेरे अनुभव के अनुसार  ये १०-११ साल के बच्चे मोम की भांति होते हैं जैसे चाहो उन्हें ढाल लो ,सिर्फ सही मार्गदर्शन की ही तो इन्हें आवश्यकता होती है।

इस साल भी बच्चों से मिले इन  पत्रों को मैंने अपने खज़ाने में  सहेज लिया है।
इनका स्नेह ,इनका दिया मान ..यही तो मेरा सच्चा पुरस्कार है!
आप भी एक झलक देखना चाहेंगे ?...तो देखिए इस खजाने के कुछ मोती ....
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Letters from Grade 5 (2012-13)students


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27 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, अपनत्व ही अपनत्व पोषित करता है।

सतीश सक्सेना said...

यह मोती कीमती हैं ..
शुभकामनायें !

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

ये हस्ताक्षर युक्त कार्ड आपका बच्चो के प्रति कितना स्नेह है और बच्चों का आपके प्रति कितना लगाव है,,,,,बहुत२ बधाई अल्पना जी,,,

बीबी बैठी मायके , होरी नही सुहाय
साजन मोरे है नही,रंग न मोको भाय..
.
उपरोक्त शीर्षक पर आप सभी लोगो की रचनाए आमंत्रित है,,,,,
जानकारी हेतु ये लिंक देखे : होरी नही सुहाय,

डॉ. मोनिका शर्मा said...

सहेजने योग्य है यह निश्छल स्नेह .....आपको बधाई , शुभकामनायें

mukti said...

एक बच्चा मुझसे संस्कृत में मार्गदर्शन लेने आता है मेरे पास. उसने नए वर्ष के उपलक्ष्य में मुझे हाथ से बना कार्ड दिया, तो मुझे भी बहुत खुशी हुयी :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

bahut baddhiya..

तुषार राज रस्तोगी said...

बहुत सुन्दर चित्र और कमाल का प्रेम दर्शाता आपका लेख | अद्भुत है |


कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Chaitanyaa Sharma said...

:) How Sweet :)

Alpana Verma said...

यकीनन बहुत अच्छा लगता है.
जानती हूँ कि आपने भी उसे संभाल कर रखा होगा.

Himanshu Kumar Pandey said...

अनन्य निधि है यह! सदैव संरक्षण योग्य। और अद्भुत है यह स्नेह-अपनत्व। अध्यापन कितना संतुष्टि प्रदान करने वाला बन जाता है इन सबसे।

Anonymous said...

Bacchon ka nishchal pyar, buzurgon aur doston ki be-laus mohabbat .. yehi zindgi ke liye sb se bada tonic hai .. is daulat ko zaroor smabhal kar rakhna cahiye .. congrates .. thnx for sharing...

Maheshwari kaneri said...

वो कीमती पल...

दिगम्बर नासवा said...

बच्चों के साथ बच्चा बन जाने में जो मज़ा है वो कहीं नहीं है ...
बहुत अच्छा लगा इस प्रेम को देख कर ...
आपको अल्प छुट्टियाँ मुबारक ... हम भी छूट गए बच्चों के साथ इन परीक्षाओं से ...

Vinnie Pandit said...


अल्पनाजी,

आप का लेख मेरा खजाना /मेरा पुरस्कार पढ़ा।आप ने तो मेरे को बीते दिनों की याद करा दी।निःसन्देह शरारती बच्चे दुनिया में कुछ कर दिखाते हैं।वास्तव में वह प्रखर बुद्धि होते हैं।तभी तो वह नयी-नयी शरारतें कर सकते हैं।इस लेख के लिखे हर शब्द से मैं सहमत हूँ।

सस्नेह-

विन्नी

ताऊ रामपुरिया said...

शिक्षक के रूप में छात्रों से इतना लगाव और उनसे जुडी यादों को यूं सहेजना, भारतीय परिपेक्ष्य में तो एक अजूबा ही लगता है. आपके आलेख से यह पता चलता है कि आप अपने कर्तव्य से किस कदर जुडी हैं. काश हमारे यहां भी चंद शिक्षक ही ऐसे हों तो काफ़ी बदलाव आ सकता है, बहुत ही प्रसंशनीय कार्य. शुभकामनाएं.

रामराम.

Vikesh Badola said...

आप जैसी अध्‍यापिका का वात्‍सल्‍य ही मोम जैसे बच्‍चों को सही दिशा में अग्रसर कर सकता है। बहुत प्रेरक पंक्तियां।

Shashi said...

Yes it is real treasure to keep it for ever . Liked this post so much .

अल्पना वर्मा said...

नहीं -नहीं..अल्प छुट्टियाँ नहीं हैं..परीक्षाएँ चल रही हैं ..आज भी एक्साम ड्यूटी कर के अभी आई हूँ.
हाँ ,पढ़ाने से थोडा ज़रूर अल्प अवकाश मिल गया है...१० तारीख तक.

अल्पना वर्मा said...

सच कहा आपने,इन भावपूर्ण शब्दों से संतुष्टि होती है और आगे बढ़ने का हौसला और आत्मविश्वास को बल मिलता है .

डॉ टी एस दराल said...

छात्र आते रहते हैं , जाते रहते हैं। लेकिन कुछ समय के लिए ही सही , जो रिश्ता बन जाता है वह जीवन भर याद रहता है।

Arvind Mishra said...

बधाई आपको -इतना प्यार और सम्मान पाने पर -वह भी मासूम बच्चो से ! आप है ही ऐसी !

Arvind Mishra said...

बधाई आपको -इतना प्यार और सम्मान पाने पर -वह भी मासूम बच्चो से ! आप है ही ऐसी !

Prakash Govind said...

ये सुन्दर-सुन्दर कार्ड अनमोल हैं
-
टीचर अपने स्टूडेंट को भूल जाते हैं लेकिन स्टूडेंट कभी नहीं भूलता !
-
बच्चों का यह अपनत्व दर्शाता है कि आप शिक्षक की भूमिका में कितनी सफल रही हैं !

अनन्य शुभ कामनाएं !!!

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

बच्चों के मुखौटे में खुदा सामने खड़ा ...ये बच्चों का नहीं खुदा का आप पर स्नेह है..खुदा अपनी सेवा की कृपा का अवसर सबको प्रदान नहीं करता है ..आपके पत्रों को पढ़कर अन्य शिक्षकों को भी निश्चित रूप से प्रेरणा मिलेगी..बच्चों के प्रेम में वाकई में निश्चलता होती है ..आपके पास ये निश्छल प्रेम एक धरोहर है ..सादर बधाई के साथ

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सच्चा स्नेह ही ऊर्जा देता है...इस समय आप ऊर्जा की धनी हैं.....

अल्पना वर्मा said...

विनी जी आप के गूगल पेज पर आपकी साईट का लिंक नहीं मिल रहा कृपया दिजीयेगा.

avanti singh said...

आप खुशनसीब है जो इतने अकूत खजाने की मालिक है आप ,अनमोल और अद्भुत खजाना मिला है ये ऐसे ही बढ़ता रहे ये ही शुभकामना है