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November 21, 2009

'एक सुहाना सफर'

१२ तारीख को बच्चों की परीक्षाएँ ख़तम हो गयी थीं..इसलिए १३ -१४ को कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम बनाया जाना था. कहाँ जाएँ ..यह सोचते ही ध्यान आया डिब्बा का .
'डिब्बा 'ओमान देश में एक प्रायद्वीप मुसंदम क्षेत्र का एक शहर है.
यह क्षेत्र यु.ए.ई के बॉर्डर पर ही है,और यहाँ जाने के लिए UAE residents ko वीसा की ज़रूरत नहीं है.अक्सर यहाँ से वहाँ लोग छुट्टियाँ बिताने जाया करते हैं.
हमारे लिए पहली बार वहाँ जाना हुआ.लगभग चार घन्टे में हम डिब्बा पहुचे.
शहर के शोर शराबे से दूर सागर का खूबसूरत किनारा और यह निर्जन स्थान एक अलग ही सुकून सा देता है.बहुत से लोग आगे भी जाते हैं मुसंदम में लेकिन हम वहाँ नहीं जा पाए ,इसलिए सिर्फ़ डिब्बा तक गये.
आप भी देखीए इस यात्रा के कुछ चित्र ... डिब्बा के सागरकिनारे की खूबसूरती ..जो इस रेगिस्तान में प्रकृति से जुड़ने एक अनूठा अनुभव देती है.

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आज का गीत -

'वादियां मेरा दामन' mera ek प्रयास है-फिल्म 'अभिलाषा 'से.

अगर प्लेयर काम नहीं कर रहा तो Click here to Download or Play Mp3

November 7, 2009

समय धीरे चलो...

यू.ऐ.ई का प्राकृतिक दृष्टि से सबसे खूबसूरत शहर अलेन जिसका इतिहास पांच हज़ार साल पुराना बताया जाता है.पुरातत्व के महत्वकी वजह से ही नहीं बल्कि यहाँ की जलवायु ,हरियाली ,पानी के प्राकृतिक झरनों और गरम पानी के चिकित्सकीय गुणों वाले प्राकृतिक सोते के कारण भी इस स्थान को खासा महत्व और प्रसिद्धि मिली हुई है.

इस शहर में रहते हुए हमें १३ साल हो चुके हैं. मगर आज भी ऐसा लगता है जैसे कल परसों ही यहाँ आये थे.यहाँ रहने वाला हर प्रवासी यह जानता है कि यह उसका स्थाई निवास नहीं है.हमेशा एक अनिश्चितता में ही रहते हैं.आज हम यह कह नहीं सकते कि कल हम यहाँ रहेंगे या नहीं।

फिर भी इसी अनिश्चितता में सभी समय गुज़ार रहे हैं और केरल प्रदेश और हैदराबाद आदि के कई ऐसे परिवार तो ऐसे भी हैं जिनका सारा कुनबा ही यहाँ है.

यहाँ के एक नियम के अनुसार चाहे किसी प्रवासी ने यहीं जनम लिया और पला बढा हो ..फ़िर भी उसे यहाँ की नागरिकता नहीं मिलती. बेटे की उम्र १८ होते ही उसको पिता के वीसा पर रहने का अधिकार खत्म हो जाता है.हाँ ,अगर वह स्कूल में पढ़ रहा है तब विशेष परिस्थितियों में उसका वीसा बढाया जाता है अन्यथा उसे अपने मूल देश ही वापस जाना होता है. अन्य रास्ते ये हैं कि किसी कॉलेज से वीसा लेना होगा या किसी व्यवसाय में कर्मचारी का जॉब वीसा लेना पड़ेगा. बेटी के लिए स्थितियां फरक हैं..अविवाहिता पुत्री अपने पिता या माता के वीसा पर कितने भी समय के लिए उनके साथ रह सकती है.मगर , उसके विवाह होने पर उस का यह वीसा रद्द हो जाता है.फिर उसे अपने पति या खुद के वीसा पर रहने की अनुमति लेनी होती है.
खैर, बहुत सी और भी बातें हैं जिनके कारण यहाँ रहते हुए अपने भविष्य को लेकर मन में अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है..मगर फिर भी देखीये साल पर साल गुज़र रहा ही है!
अब आप कहेंगे कि वापस क्यूँ नहीं आ जाते?तो यह उतना आसान भी नहीं है..क्योंकि जब भी छुट्टियों में भारत जाते हैं तब यही विकल्प तलाशते हैं कि वहाँ जा कर क्या और कैसे करें..लेकिन कभी कोई बात जमती ही नहीं. खैर,अब तोयह पराया देश भी अपना सा ही लगता है..

मैं तो उन्हें देख कर अब आश्चर्य नहीं करती जो यहाँ ३०-३५ साल से रह रहे हैं.क्योंकि अब खुद को भी मालूम हो गया है कि वक़्त यहाँ कैसे तेज़ी से गुज़र जाता है .

हम जब यहाँ आये थे..तब किसी को भी जानते नहीं थे, अब बहुतों को हम जानते हैं और बहुत से लोग हमें! तब के 'अलेन' में और आज १३ साल बाद के अलेन में बहुत फरक आ गया है.तब यहाँ रात ९ बजे ही दुकाने बंद होने लगती थीं..मगर आज कई सुपरमार्केट २४ घंटे खुलती हैं.तब यहाँ की आबादी कोई २ लाख भी नहीं थी.अब यहाँ की आबादी लगभग ४ लाख है.वो बातें फिर कभी...
चलते चलते ...यहाँ आने के बाद कोई चार साल बाद मैं भारतीय समाज केंद्र से जुडी और फिर जब भी अवसर मिला केंद्र के लिए काम किया. दो बार महिला फोरम में विशेष पद भी संभाले . इसी २४ अक्टूबर को भारतीय समाज केंद्र की तरफ से मेरी सेवाओं के लिए मुझे विशेष सम्मान दिया गया.
इसी अवसर की तस्वीरें-

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बच्चों के इम्तिहान चल रहे हैं,हर तरफ परीक्षाओं का माहोल है.इसके चलते ब्लॉग्गिंग में आना जाना बहुत कम हो गया है.जल्दी ही दोबारा मिलती हूँ।

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