July 20, 2009

रुदाली,रजनीगंधा और अभिलाषा!


अभिलाषा
------------

गुज़रे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

तौलते रहते खुशियाँ अपनी,
लगता एक तमाशा सा है

सौदागर सी बातें करते,
जान न पाए माशा क्या है!

चलता जाए जीवन यूँ ही ,
रुकने की यह भाषा क्या है?

खोज रहे हैं रस्ते सारे,
सच मिल जाए आशा क्या है?

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?
---------अल्पना वर्मा -----------

अब गीतों की ओर --
बहुत दिनों से कोई गीत पोस्ट नहीं किया था...इस लिए वह कमी पूरी करते हुए आज एक नहीं दो गीत प्रस्तुत हैं -
1-
'दिल हूम हूम करे '-फ़िल्म-रुदाली 'मूल गीत' लता जी और भूपेन हज़ारिका जी का गाया हुआ है. यहाँ मैं ने इस गीत को गाने का प्रयास किया है.आप भी सुनिये-:

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'दिल हूम हूम करे ,घबराए'-गीतकार-गुलज़ार ,संगीत-भूपेन हजारिका ।'

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२-vocals--Alpana[cover song].


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'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' [गीत-योगेश,संगीत-सलील चौधरी]


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83 comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

चलता जाए जीवन यूँ ही ,
रुकने की यह भाषा क्या है?
बहुत बढिया. शुभकामनायें.

नीरज गोस्वामी said...

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

वाह अल्पना जी वाह...बेहद कमाल की रचना पेश की है आपने...इसकी जितनी भी प्रशंशा की जाये कम है...और आपके दो गीतों ने तो समां बाँध दिया...क्या गाती हैं आप....गज़ब...
नीरज

दिगम्बर नासवा said...

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है

बहूत ही umda ..........aashaa, niraasha और saty के ehsaas से bhari है आपकी रचना ..........
और आपके gaaye गीत .............. kya kahne, लाजवाब और karioke पर तो और भी jabardast लग रहे हैं..... jadoo है आपकी आवाज़ में

ताऊ रामपुरिया said...

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

बहुत ही सत्य को अभिव्यक्त करती रचना है. इन गूढ शब्दों का संयोजन बहुत ही मुश्किल काम है. आपने एक सुंदर बेहद खूबसूरत रचना प्रस्तुत की. बहुत शुभकामनाएं.

रुदाली का कंसोल नही दिखाई दे रहा है. शायद मेरे क्रोम ब्राऊजर की दिक्कत है. दुबारा से लोड करके सुनते हैं. बहुत धन्यवाद आपका.

रामराम.

अशोक पाण्डेय said...

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

सही बात है। सही अर्थों में जीवन जीना सीख गए तो आशा और निराशा का कोई मतलब नहीं रह जाता।

अच्‍छी कविता और सुंदर गीत।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कविता बहुत अच्छी है.

M VERMA said...

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?
जीवन की परिभाषा -- वो भी गुजरे पल से
बहुत खूब --

महेन्द्र मिश्र said...

चलता जाए जीवन यूँ ही ,
रुकने की यह भाषा क्या है?

बहुत सुन्दर रचना . आभार.

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

बहुत खूब..कविता शानदार रही.. दोनों ही गीत मुझे भी बहुत प्यारे हैं.. फिलहाल हैडफोंस या स्पीकर नहीं होने की वजह से आपकी आवाज़ में नहीं सुन पाया.. आभार

डॉ .अनुराग said...

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?
इंसान सब कुछ जानता है फिर भी इस मरीचिका में फंसा रहता है .....दोनों गीत मुझे बेहद पसंद है...मेरे कलेक्शन में है...भूपेन की आवाज इस गीत में जादू सा करती है.....रजनीगंधा तो खैर अपने आप में एक ऐसी फिल्म है जिसमे सब कुछ है एक स्त्री का अन्तर्विरोध ...भावना ...ओर ऐसे गीत....जो बेमिसाल है .....
कई बार यूँ भी देखा है
ये जो मन की सीमा रेखा है
मन तोड़ने लगता है
अनजानी राह के पीछे ,अनजानी छह के पीछे ......
मुकेश का गाया इसी फिल्म का गीत.......अद्भुत है....

P.N. Subramanian said...

P.N. Subramanian has left a new comment on your post "रुदाली,रजनीगंधा और अभिलाषा!":

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

यौ तो पूरी रचना ही बेहद खूबसूरत है, हमने अंतिम पंक्ति अपने लिए चुन ली. गीत भी अछे लगे. रात में एक बार और सुनेंगे. आभार.

varsha said...

रुदाली,रजनीगंधा और अभिलाषा ke liye shukriya

ताऊ रामपुरिया said...

दोनों ही गीत बेहद खूबसूरत. विडियो को देखते हुये सुनने मे तो एहसास ही नही होता की मूल गायक/गायिका कोई और है. बहुत शुभकामनाए.

मौजिल्ला मे दोनो कंसोल और विडियो दिखाई दे रहे हैं और बहुत अच्छे से प्ले हो रहे हैं. क्रोम मे ही कूछ गडबड थी. धन्यवाद.

रामराम.

mehek said...

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

waah sahi jab jeena sikh jao tho aasha,nirasha koi mayane na rakhe hai,jeevan ki talash magar hamesha insaan ke andar jaari hi rehti hai.sunder kavita.

alpanaji aaj tho dil khushi ke maare 'hum hum' kar raha hai.dono gane fav ar aapki madhur aawaz unhe aur bhi mohak bana rahi hai.rajnigandha bahut hi achha laga.

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह इतने दिनों के बाद भी शब्दों में वही सुन्दरता, वही गहराई।
मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?
जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?
गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

सच जीवन की परिभाषा को खोजते खोजते पूरी उम्र बीत जाती है। पर आपने एक बात बहुत खूब कही।
जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

सच्ची बात। गाने के बारें में क्या कहें। दोनो ही बहुत ही बेहतरीन।

Arvind Mishra said...

बेजोड़ शिल्प की भाव प्रवण कविता और मनोरम गान भी !

ओम आर्य said...

गुज़रे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?
bahut hi sundar bhaw

Parul said...

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

bahut acchhi baat kahi alpna

Nirmla Kapila said...

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?
लाजवाब कलम का जादू सिर चढ्कर बोल रहा है और आपके गीतों ने तो समय बान्ध दिया है बधाई

डॉ. मनोज मिश्र said...

चलता जाए जीवन यूँ ही ,
रुकने की यह भाषा क्या है
खोज रहे हैं रस्ते सारे,
सच मिल जाए आशा क्या है?
मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?...
कितनी खूबसूरत, गहन भाव लिए लाइनों को आपनें लिखा है .उस पर सुमधुर संगीत क्या कहने हैं .बहुत -बहुत धन्यवाद-इसलिए कि आपकी पूरी पोस्ट पढ़ कर मन शांत और प्रसन्न हो गया .

दिलीप कवठेकर said...

आपका बहु आयामी व्यक्तित्व और आपके सृजन के विभिन्न रंग...

दिल और दिमाग का सम्तुलित समन्वय...

दिल से संवेदनशील भीगे भीगे शब्दों को पद्य में पिरोना, और साथ ही भावनाओं का उद्रेक आपके गाये हुए गीतों में आपके स्वरों के माध्यम से..

और बुद्धि और रचनात्मकता का संगम साईंस और टूरिझ्म के लेखों में.

यूंहि लिखते रहें ...

दोनों गीत बढिया , स्निग्धता लिये हुए.
जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

Harkirat Haqeer said...

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

इन दो पंक्तियों में कितनी गहरी बात कह दी अल्पना जी .....बहुत खूब.....!!

दोनों गीत सुने ...कमाल का गातीं हैं आप ....न जाने कितनी खूबियाँ समेटे हुए आप ब्लॉग जगत की शान हैं आप .....बधाई ...!!

Udan Tashtari said...

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

--बिल्कुल सही...एक उम्दा रचना.

अब सुनेंगे. आज समय बहुत देर से मिल पाया.

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर गीत! दोनों गाने सुने। बहुत अच्छे लगे। बड़ी खूबसूरत आवाज है आपकी। खूब सारे गाने गाकर पोस्ट करिये। बहुत अच्छा लगा इनको सुनकर!

तनु श्री said...

आपका ब्लॉग और आपकी रचनाएँ बहुत सुंदर हैं दीदी.

कुश said...

ये गाना मुझे बहुत पसंद है...

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

और ये तो कमाल लिखा है आपने..वाकई

राधिका उमडे़कर बुधकर said...

वाकई सुन्दर गीत हैं

मीत said...

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?
बहुत सुंदर भावः हैं इस कविता में....
बहुत अच्छी लगी...
सच में ऐसा ही तो होता है....
मीत

adwet said...

बहुत सुंदर रचना

रश्मि प्रभा... said...

वाह......वाह......वाह......

रंजन said...

रजनीगंधा.. मेरा सबसे पसंदीदा गाना.. हजारों बार सुना है.. आज फिर से मौका मिला आपकी आवाज में सुनने का.. बहुत अच्छा गाया आपने.. बिल्कुल original जैसा.. बहुत सुन्दर.. अच्छा लगा..

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

"मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?"
ये पंक्तियां बहुत अच्छी लगी....
इस सुन्दर रचना और गीत के लिये बहुत बहुत धन्यवाद...

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर रचना !!

महामंत्री - तस्लीम said...

Zindagi ke kareeb le jati hai ye aapki rachna.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अमिताभ श्रीवास्तव said...

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?
जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?
saval aour fir usaka uttar/
mujhe jeevan bhi kuchh isi tarah ka lagta he// pahle savaal khade hote he fir uttar ki talaash, aour jab uttar milate he to fir ek nai abhilasha.....///
kher.., bahut achhi lagi aapki rachna..darshan ki baat hoti he to kisi bhi rachna me jaan aa jaati he/
gaane to ghar pahuch kar hi sun paunga.../

Anonymous said...

गुज़रे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

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खोज रहे हैं रस्ते सारे,
सच मिल जाए आशा क्या है?

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मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

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जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?


वाह ... वाह.
रचना में में समग्र जीवन का सत्य दिखाई पडता है।
बेहद खूबसूरत शब्द-संयोजन !
अनुभूति के स्तर पर कई पंक्तियाँ अत्यधिक ह्रदयस्पर्शी हैं !

रुदाली का गीत :

गीतकार, संगीतकार, साहित्यकार, पत्रकार, फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, चित्रकार, गायक श्री भूपेन हजारिका जी के जादू से तो खैर कोई अछूता रह ही नहीं सकता ! लाखों लोगों के दिल में भूपेनदा का गीत ‘‘दिल हुम हुम करे'' बहुत गहराई से बसा हुआ है ! इस गीत को गाने के बाद उन्होंने कहा था - अगर एब्सट्रेक्ट पेंटिंग्स हो सकती है, एब्सट्रेक्ट फिल्म हो सकती है
तो एब्सट्रेक्ट गीत क्यों नहीं हो सकता ?'


कभी-कभी कुछ गीत हमारे अंतर्मन को इस कदर स्पर्श कर जाते हैं कि उन्हें सुनते ही मन करता है कि बस समय रुक जाए जितनी बार सुनते हैं उतनी बार अनेक यादों में खो जाते है !

फ़िल्म-'रुदाली' के 'दिल हूम हूम करे घबराए ..' को याद कीजिये..नायिका के चेहरे और भाव के साथ जैसे ही लताजी की आवाज़ थोडी ऊँची पिच पर आकर "तेरी ऊँची अटारी ई ई ई ...मैंने पंख लिए कटवाए " सुनते ही दिल बरबस ही भर आता है ... बस मन करता है जी भर के रोये ..... और रोते ही रहे ! कोई इतना बढ़िया कैसे लिख सकता है ... कोई कैसे इतना डूबकर गा सकता है ?

आपने इस गाने को को काफी खूबसूरती से निभाया है ! बड़े-बड़े गायक और गायिकाएं भी इसको गाने से कतराते हैं ...... आप वाकई में तालियों और भरपूर सराहना की हकदार हैं !

रजनीगंधा का गाना अभी सुना नहीं ... इसलिए उसपर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता !

vishnu-luvingheart said...

wah wah....

JHAROKHA said...

गुज़रे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?
तौलते रहते खुशियाँ अपनी,
लगता एक तमाशा सा है
अल्पना जी ,
जीवन को बहुत बारीकी से देखने की कोशिश की है अपने इस रचना में
पूनम

अल्पना वर्मा said...

प्रिय अनामी जी ,
आप ने इतनी अच्छी टिप्पणी दी है की मैं आप को कहना धन्यवाद दूँ,समझ नहीं आ रहा...इस लिए यहीं आप का आभार प्रकट करती हूँ.आप ने मेरे लिखी रचना और गाये गीत को सुना और सराहा ..बहुत बड़ी बात है.'रुदाली 'के इस गीत को गाने का साहस प्रकाश गोविन्द जी के सुझाने पर ही कर पाई अन्यथा इतनी variation वाले गीत को शायद में गाने का प्रयास नहीं कर पाती.
आप ने अनाम रख कर इतनी हौसला हफ्जाई की है.
आप दोबारा यहाँ आये तो इस शुक्रिया को ज़रूर कबूलें.
और आईंदा भी अपने विचार बताते रहें ,आप की आलोचनाओं का भी स्वागत है.
आभार,अल्पना

सैयद | Syed said...

अल्पना दी, बेहद उम्दा रचना पढने को मिली आज.

.... दिल हुम हुम करे..... मेरी फेवरिट गीतों में से एक है, पर इस वक़्त लवी सो रही है और मैं स्पीकर ऑन करने का साहस नहीं कर सकता... सुबह सबसे पहला काम यही करूँगा...

एक उम्दा रचना के लिए शुक्रिया.

दिलीप कवठेकर said...

एक अच्छे गीत के लिये बेहद उम्दा टिप्पणी!!

इस बेनाम साथी को शुभकामनायें...

creativekona said...

सौदागर सी बातें करते,
जान न पाए माशा क्या है!
चलता जाए जीवन यूँ ही ,
रुकने की यह भाषा क्या है?
जीवन के लिए एक अच्छा सन्देश देती पंक्तियाँ .
हेमंत कुमार

Murari Pareek said...

waah aap kaa rajni gandhaa track sunaa achha ga leti hain !! rachanaa bhi laajwaab hai |

गौतम राजरिशी said...

किसी भी गायक/गायिका के लिये रूदाली का ये गीत एक चैलेंज की तरह है...और आपने खूब निभाया है इस चैलेंज को मैम....वाह!

और "अभिलाषा"...एक अनूठी रचना। कुछ गज़ब के काफ़ियों के सामंजस्य में बहुत अच्छी बनी है। बधाई कबूल करें।

sandhyagupta said...

Log kisi ek vidha par maharat haasil karne ko sangharsh karte hain par aap to bahumukhi pratibha ki dhani hain.Shubhkamnayen.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

जीना सिखाती पोस्ट और सुन्दर गायन!

शोभना चौरे said...

alpnaji
bhut sshkt kvita .
aur geet bhi bhut achhe lge .
agr aap film parkh ka geet oo sjna barkha bhar aai ,ankhiyo me pyar lai .gaye to aapki aavaj me achha lgega aur hme bhut khushi hogi .kyoki aapki pasnd ko dekhte huye mai frkaish ka sahs kar rhi hoo .kkrpya anytha n le .
dhnywad.
shubhkamnaye

Harsh said...

yah post nayi raah dikhati ha... lambe samay se aapke blog par najar nahi phair paa raha tha.. ab samaay mila to yah padkar achacha lagaa....

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

चलता जाए जीवन यूँ ही ,
रुकने की यह भाषा क्या है?

खोज रहे हैं रस्ते सारे,
सच मिल जाए आशा क्या है?

वाह्! जीवन संदेश देती एक बेहतरीन रचना। बहुत ही बढिया।
किन्तु पता नहीं हमारे पास ये आडियो, वीडियो क्य़ूँ नहीं काम कर रहा। जब भी चलाने की कौशिश की तो एरर आने लगता है।

Mumukshh Ki Rachanain said...

मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?

जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

जिंदगी शायद नफे नुकसान की गणना में ही फँस कर रह जाती है, और शायद वह जान बूझ कर जीने की अभिलाषा के सच को स्वीकार नहीं करना चाहती.

आपके सारे प्रश्न जायज हैं, पर स्वार्थी मानव नाजायज़ उत्तर ही प्रायः देते आयें हैं, शायद जो थोड़े- बहुत जायज़ उत्तर मिले भी तो आदमी समझ- समझ कर भी उसे समझना/ स्वीकारना जो नहीं चाहता....

पोस्ट बेहद प्रभावी रही और मशहूर गीतों को आपके आवाज में सुनना और भी अच्छा लगा.
काला टीका ज़रूर लगवा लीजियेगा, कहीं नज़र न लग जाये

एक बार पुनः हार्दिक बधाई.

शोभना चौरे said...

alpnaji
dhnywad aapne jo sujhav diya hai mai koshish krugi uspar lod krne ke liye .asl me ye sab meri bahu neha karti hai .
aapne mere sujhav par socha dhnywad

रंजना [रंजू भाटिया] said...

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

बहुत सुन्दर लिखी है आपने यह रचना अल्पना ..ज़िन्दगी का सार है यही ..फिर भी हर पल यही सवाल है ..गीत बहुत सुन्दर गाये हैं आपने ...दोनों पसंद आये बहुत ..

रंजना [रंजू भाटिया] said...
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भूतनाथ said...

गुज़रे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?
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खोज रहे हैं रस्ते सारे,
सच मिल जाए आशा क्या है?
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मर मर के यूँ रोज़ का जीना ,
जीने की अभिलाषा क्या है?
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जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?
ab ham kahen bhi to kya kahen...aur kahane ko kyaa rah gayaa...!!

सुशीला पुरी said...

alpna ji alpna behad sundar hai, abu dhabi me mere ek mitra hain,bahut bade lekhak hain.....,aap wahan kya kar rahi hain ?

MUFLIS said...

सौदागर सी बातें करते,
जान न पाए माशा क्या है!

waah !!
ek arse ke baad aisa anootha aur sachcha sher padhne/sun`ne ko mila hai....waah !!!
poori rachna prabhaavshaali hai.
abhivaadan svikaareiN.
---MUFLIS---

Neelesh said...

Ek din apne saamne
saaf–sa ek aaina rakhna
phir uske aks par kuch likhana

koi aisi baat
tum usmein kahna
jismein sirf tum rahna

apne har jazbaat ke saath…
sab ujle-maile khwaab ke saath
choo lene waaley ehsaas ke saath

par jab bhi dhoomil ho jaaye…
likhane mein khud ka dikhna
tab kabhi nahin; tum kuch bhi likhna

kyuonki zaroori hai
apne likhe mein dikhate rahna
aur khud ko dekhate huye likhate rahna

tab hi
khud ko achcha lagega
aur duniya ko sachcha lagega.
~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~
…! … Subh Srijan! ... Rahe Anant!!…

Neelesh Jain, Mumbai
http://www.yoursaarathi.blogspot.com/

महफूज़ अली said...

गुज़रे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?




waaqai mein guzre pal yahikahte hain....ki jeevan kya hai?


bahut hi oomda kruti.............

जीवन सफ़र said...

सुंदर रचना!और रुदाली का ये खूबसूरत गाना आपकी आवाज में सुनकर बहुत अच्छा लगा!

BrijmohanShrivastava said...

गीत नहीं सुन सका |कविता ही पढी |गुजरे वक्त से जीवन की परिभाषा पूछना ,अपनी खुशियाँ ही क्या दुःख भी तौलना एक तमाशा ही है ,बिच्छू का मन्त्र याद नहीं और सांप के बिल में हाथ डालते हैं ,जीवन चलता ही रहना चाहिए "जिस दिन से चला हूँ मेरी मंजिल पे नजर है ,आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा ""सच मिलने की आशा क्या है ? न के बराबर |मर मर के जीना क्या मतलब ऐसे जीने का |जीना जिसको वास्तव में आगया उसे तो आशा निराशा से क्या मतलब -गीता भी तो यही कहती है सुख दुःख हानि लाभ शीत उष्ण |आशा और निराशा से कौन बचा है ?केवल मृत व्यक्ति

kavita said...

अल्पना जी ,आप की यह रचना बहुत ही अच्छी लगी.जीवन की सच्चाई कहते हुई अद्भुत रचना.
दोनों गीत भी बहुत ही सुन्दर गाये हैं.
ऐसे ही लिखती रहीये.

सुशीला पुरी said...

mere blog par bhi aaiye........

Anonymous said...

YEH MERA PASANDIDA GAANAA HAI, THODAA SAA MUSHKIL GAANAA HAI, SUNKEY BAHUT "ANAND" AAYAA - AISEY HI GAATI RAHO, LOGO KE DIL KO KHUSH KAR DO, MERI SHUBH KAAMNAAYE TUMHAAREY SAATH HAI
YOUR SINGING IS GREAT

-RAJ K.

Anonymous said...

Dear Alpana Ji

Dil hoom hoom kare......

By listening to this song it does not appear at all that you had been off this work for so long...it has a maturity, feel, touch and originality which is typical of a singer who is continuously in business for long...very nicely sung....you have this extraordinary taste of good songs and your choices are by chance always my favourites....congratulations...my only GUZAARISH is that kindly do sing more frequently...
and yes.....I am waiting for 'Mera sunder sapna beet gaya....'

Thanx for sharing...best regards

Dr Sridhar Saxena

abdul hai said...

खोज रहे हैं रस्ते सारे,
सच मिल जाए आशा क्या है?


Bahut khub

Kishore Choudhary said...

अभिलाषा बेहद सुन्दर है

गीत मस्त लगे कभी मूड हो तो समय ओ धीरे चलो भी पहुंचा दीजिये आपकी आवाज़ में.

Alka Ray said...
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Shobhna Choudhary said...

kavita bahut achhi lagi
kavita ke bhaavon ne bahut prabhaavit kiya....
humko bhi milagi manjil
humari bhi puri hogi abhilasha..
ye hi hai dua humari...

योगेन्द्र मौदगिल said...

बेहतरीन प्रस्तुति के लिये आभार-साधुवाद

अल्पना वर्मा said...

@ OKay Alka ...main ne aap ki baat maan li...ab theek hai.??

aap nakali nahin hain..main maan gayee.
aap jawab dekhne yahin aaogi ,mujhe maluum hai.is liye yahin jawab de rahi hun.
pahle bhi ek sawaal aap ne poochha tha..main uska kahaan jawab deti?na aap ka blog hai..na email..us ka jawab nahin diya to aap ne mujhe proudy kahlawa diya..koi bat nahin..
yahan bahut se bachchon ne blog khole hue hain ..aap bhi ek blog khol lijeeye ya apna common sa email address banalijeeye.
jis se aap se communication me suvidha hogi.

aap ke school kaise chal rahe hain?
aur haan--main online sirf jewel khelti hun..wh solo hota hai.
thnx for invitation.take care.

shikha varshney said...

Bahut khubsurat hai "Abhilasha"
or aapki aawaz bhi ..bahut achcha laga aapke blog par aakar.

योगेश स्वप्न said...

VANDANA JI BAHUT HI PYARI, KHOOBSURAT RACHNA, EK EK SHABD SALEEKE SE GUNTHA HUA.
जिस पल जीना सीख गए फिर,
आशा और निराशा क्या है?

गुजरे पल से पूछते रहते
जीवन की परिभाषा क्या है?

BAHUT KHOOB , BADHAI SWEEKAREN. GEET SUNTA HUN.

श्याम कोरी 'उदय' said...

... khoobasoorat rachanaa, behatreen abhivyakti !!!

~PakKaramu~ said...

Pak Karamu reading your blog

रंजना said...

वाह वाह वाह !!!!! क्या बात कही.......

कितनी सुन्दर बात कही आपने अपनी इस कविता के माध्यम से......यदि जीवन जीने की वास्तविक कला का पता लग जाय तो फिर आशा और निराशा महत्वहीन हो जायेगी...

माता ने आपको कितना सुन्दर स्वर दिया है,उन्हें नमन...

आकांक्षा~Akanksha said...

Jiwan ke sach ko sarthak shabdon men bandhti adbhut bhavon se bhari khubsurat kavita..badhai.

फ्रेण्डशिप-डे की शुभकामनायें. "शब्द-शिखर" पर देखें- ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे !!

वजूद said...

जिए जा रहे जिन्दगी को गमे-अहसास से दूर,
पूछते भी हैं खुदी से, बता इसकी दवा क्या है???

अबू धाबी में रहकर भी लिखती अच्छा हैं.

~PakKaramu~ said...

Pak Karamu reading your blog

Vijay Kumar Sappatti said...

alpana ji , kavita ki tareef karun ya aapki aawaz ki , samajh nahi aa raha hai , aapne mera priy geet , rajni gandha phool tumhare jo ga diya ..

kavita bahut sundar ban padhi hai .. shabd ji uhte hai ..


regards

vijay
please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

"लोकेन्द्र" said...

वाह बहुत ही सुन्दर रचना निकली है आपकी कलम से.........

आकांक्षा~Akanksha said...

Adbhut...lajwab prastuti.

स्‍वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं.

स्वतंत्रता रूपी हमारी क्रान्ति करवटें लेती हुयी लोकचेतना की उत्ताल तरंगों से आप्लावित है।....देखें "शब्द-शिखर" पर !!

अर्शिया अली said...

कृपया इस कारवां को आगे बढाएं।
( Treasurer-S. T. )

गौतम राजरिशी said...

मैम, बहुत दिन हो गये...नयी पोस्ट कोई?