जीवन में घटने वाली छोटी -छोटी घटनाएँ भी कितना कुछ सिखा जाती हैं ,यह पिछले तीन दिनों में अनुभव किया।
बीमार पड़ना या मरीज दिखना/कहलाना मुझे कतई पसंद नहीं ,बहुत खराब लगता है।
मंगलवार को खेल के मैदान में एक खेल के दौरान एक छोटी- सी दुर्घटना में मुझे भी थोडा चोट लगी।
हाल-चाल पूछने वालों का तांता लग गया ! शुभचिंतकों द्वारा हाल-चाल पूछने पर कैसे लगता है इसका अनभव हुआ।
[मुझे याद नहीं कि इस से पहले बीमार ऐसी कभी पड़ी थी कि इतने लोग हाल-चाल पूछें !]

