पिछले महीने ही एक नया मॉल हमारे शहर 'अलैन'में खुला,पहले यहाँ बड़े शौपिंग मॉल दो ही थे -एक अलैनमॉल ,दूसराअलजिमीमॉल.
यह अब तक का सब से बड़ा मॉल है जहाँ ४०० +दुकाने हैं और ११०० लोगों तक के खाने का फ़ूड कोर्ट ,८ सिनेमा थिएटर हैं जिस में एक VIP थिएटर होगा जो यहाँ अपनी तरह का पहला सिनेमा हॉल होगा और पार्किंग स्पेस 3,५०० की है .[Built Up Area-145,000 m² (1,561,000 ft²)-(excluding Parking)
इस मॉल के प्रमोशन के लिए इस बार यहाँ'Around the world in 80 days' एक स्कीम चलायी जा रही है जहाँ विभिन्न देशों के लोक कलाकार परफोर्म कर रहे हैं.
जुलाई ४ से जुलाई १० तक के दिन भारतीय कलाकारों के लिए हैं,शाम ६ से ९ बजे तक कार्यक्रम चलता है.
इन लोक कलाकारों को भारत से बुलवाया गया है.अलैन में अपनी तरह का यह अनूठा प्रोग्राम है.
मैं वहां से उस कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें और रिकॉर्डिंग ले कर आई हूँ,आशा है आप को पसंद आयेगी.
स्कूलों में गरमी की छुट्टियाँ शुरू,कल बच्चों का ओपन हाउस था...मतलब उनकी परीक्षा के परिणाम आए थे। और इन छुट्टियों के साथ शुरू हुआ लोगों का अपने अपने देश जाने का सिलसिला.हम तो इस बार भारत नहीं जा रहे हैं। बस अब सिलसिला शुरू होगा मिलने मिलाने का...गल्फ का जीवन ही ऐसा है..बच्चों के जन्मदिन पर मिल लेते हैं नहीं तो मिलने मिलाने के अवसर ढूढने पड़ते हैं - सब अपने में व्यस्त हैं.कोई किसी के यहाँ बिना पूर्व सूचना दिए नहीं आता जाता..इस बार तो हमारी मित्र मंडली पूरे ६ महीने बाद इकट्ठा होंगी.. यहाँ हमारे रिश्तेदार नहीं हैं सो हमारे मित्र ही रिश्तेदार से भी बढ़कर हैं।कई साल हो गए यहाँ रहते हुए और कुछ बहुत अच्छे नए-पुराने मित्र भी मिले..हम ६ परिवार हैं जो बहुत घनिष्ठ मित्र हैं.इनमें से दो परिवार तो अब ओमान में ट्रान्सफर हो गए..अब हम ४ बचे हैं.नए साल पर सब एक साथ मिल कर बैठे थे...और अब बच्चों की छुट्टियाँ शुरू हुई हैं तो आजसे मिलना मिलाना शुरू...शुरुआत है हमारे घर से..संक्षेप में--आज हमारे घर में शाम को सब आ रहे हैं..और बच्चे तो बहुत उत्साहित हैं और मैं भी! १-२ दिन सब के साथ कैसे बीत जायेंगे पता ही नहीं चलेगा..और जब जाने का समय आता है.. तब सब से ज्यादा बच्चों को तकलीफ होती है..यही है गल्फ की सामाजिकजिंदगी का एक पहलू ...सभी अपने घरों में बहुत हद्द तक सिमित ! अब मिलवाती हूँ हमारे मित्र परिवार के सब से छोटे सदस्य -आर्यन से -
और अब एक कविता-
जेठ दुपहरी -------------
जेठ दुपहरी जलते हैं दिन, और झुलसती हैं रातें , इस दावानल में जल , मुरझाई मन की बातें.
अलसाया आँगन है, और तपीं सारी भीतें, द्वार थके धूप में तपते, ताल सभी दिखते रीते.
वहीँ आम की अमराई, खिलखिल के मुस्काती है, धर अमियाँ का रूप, विजय मौसम पर पा जाती है!
चलें धूल से भरी आंधियां, झुलसायी धरती बोले, बीते जल्दी जेठ महीना, बरखा आये रस घोले! -अल्पना वर्मा
एक युगल गीत फ़िल्म-अभिमान से -'तेरी बिंदिया रे'- इस गीत में मेरा साथ दिया है राजा पाहवा ने - download MP3- Play-