अभिशप्त माया

ग़लती से क्लिक हुई छाया एक साए की  आज सागर का किनारा ,गीली रेत,बहती हवा कुछ भी तो रूमानी नहीं था. बल्कि उमस ही अधिक उलझा रही थी माया...

August 10, 2016

माही--एक लघु फिल्म-एक प्रयास

अपनी लिखी एक छोटी सी कहानी को फिल्म के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है.
आशा है आपको पसंद आएगा....

अवधि-3 मिनट ४० सेकंड     Time: 3 Minutes 40 Sec

इंटरनेट की स्पीड धीमी है और फिल्म अगर लोड  न हो रही हो तो  विडियो सेटिंग में quality२४० कर लें इससे  फिल्म जल्दी load हो जायेगी.

अपने सुझाव या टिप्पणी अवश्य दीजियेगा.

14 comments:

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    1. सराहना हेतु धन्यवाद विकेश जी.

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  2. वाह...
    इस रिसते घाव के साथ उम्र भर रहना होगा...
    मार्मिक....
    सादर

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    1. धन्यवाद यशोदा जी.
      सादर

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  3. मर्मस्पर्शी प्रस्तुति ..

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    1. धन्यवाद कविता जी.

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 11-08-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2431 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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    1. बहुत -बहुत आभार दिलबाग जी.

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  5. अच्छी प्रस्तुति ... मर्म को छूती हुयी ...

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    1. शुक्रिया दिगंबर जी.

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  6. congrats a very good attempt

    regards,
    Deepak kumar
    naturecarewellbeing.weebly.com

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  7. अल्पना जी ,कहानी ...आवाज़ बहुत बढ़िया है, मनस्थिति बयान हो रही है और मर्मस्पर्शी है। आपने इण्डिया आ कर ब्लॉग पर लिखा ही नहीं। परिस्थितियां बदलते ही बहुत कुछ बदल जाता है। मेरे हज्बैंड के रिटायरमेंट के बाद हम भी अभी सेटलमेंट से जूझ रहे हैं ,ब्लॉग लेखन अनियमित हो गया है। आपकी पोस्ट से आपके अन्दर से हिलने वाली स्थिति बयान हो रही है। दरअसल स्वीकार भाव के साथ उस हॉलोनेस को भरने के लिए कहीं खुद को कुछ मोटिवेशन देना पड़ेगा।और कुछ अच्छे से मित्र जो समझ सकें। वैसे ये यात्रा है तो अकेल की ही ना। मेरी बहुत सारी शुभकामनायें।

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  8. माही की तरह ही है हम सब की हालत।

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आप के विचारों का स्वागत है.
~~अल्पना