बरसात का मौसम किसे नहीं भाता?
अमीरात में पिछले दो साल से बारिश नहीं हुई थी..कुछ महीने पहले हलकी सी हुई थी लेकिन पिछले दो दिन से यहाँ ऊपरवाले की ऐसी मेहरबानी है कि बादलों से ढके आसमान ने रूक- रूक कर अभी तक बरसाना जारी रखा है।
न जाने कितने सालों बाद सूरज देवता को ऐसी लंबी छुट्टी मिली है!लगता है ही नहीं है कि अप्रैल का महीना है। ऐसा सीला -सीला मौसम बार-बार भारत की याद दिला रहा है!
आप भी देखें इन चित्रों में हमारे इस शहर की एक झलक...
एक ऑफिस में वहाँ काम करने वाली कुछ महिलाएँ बातें करने में मशगूल हैं।
सबसे अधिक उम्र वाली महिला की उम्र ६१ साल और सब से कम उम्र वाली महिला ३२ वर्षीय है.
सभी विवाहित हैं । तीन तो दादी /नानी भी बन चुकी हैं। कुछ के बच्चों की शादी हाल ही में हुई है तो कुछ की होने वाली है।
सभी की आर्थिक स्थिति लगभग एक सी है। उसमें बहुत अंतर नहीं है ।
सभी की आय में भी बहुत अधिक अंतर नहीं है।
अचानक एक ४० वर्षीय महिला कर्मी ने उठकर कहा मैं आप सब से एक प्रश्न पूछना चाहती हूँ.
बुजुर्ग महिला कर्मी ने कहा, " हाँ पूछो,पूछो!"
प्रश्नकर्ता ने कहा कि आप सभी कृपया ईमानदारी से जवाब दिजीयेगा ,कि क्या किसी व्यक्ति को वसीयत अपने जीते हुए लिखनी चाहिए ?
एक को छोड़ कर सभी ने एक स्वर में कहा ," हाँ बिलकुल ,अपने जीते जी ही लिखनी चाहिए.
लेकिन वह एक जिन्होंने कहा 'नहीं,जीते जी वसीयत नहीं लिखनी चाहिए।
वही इस समूह की सब से अधिक उम्र की महिला थीं। भय की छाया उनके मुख पर देखी जा सकती थी।
उन्हें सब ने समझाते हुए अपने तर्क दिए तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर बात न करो क्योंकि वसीयत का संबंध मृत्यु से है और अभी से उस के बारे में क्यों सोचना ??जब वक्त आएगा तब देखेंगे।
उनके भावों का सम्मान करते हुए फिर किसी ने उस बात पर अधिक बात नहीं की।
मृत्यु एक सच है जिसे जानते हुए हम सभी जीवन जीते हैं ,योजनाएँ बनाते और कार्यान्वित करते हैं।फिर भी इसका नाम सुनकर भय उपजना स्वाभाविक है।
लेकिन प्रश्न अब भी वहीँ है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी वसीयत कब लिखनी चाहिए?
क्या तब जब उसे आभास हो कि वह अधिक दिन नहीं जियेगा या सामान्य जीवन के दिनों में?
आप की क्या राय है ?
[लिखी तो मैंने भी अभी तक नहीं है ,न ही ' हाँ ' कहने वालों में से किसी ने !]
पोस्ट को १४ अप्रैल को सम्बंधित विषय के जानकार एडवोकेट दिनेश राय द्विवेदी जी की टिप्पणी के साथ अपडेट किया गया है.
उन्होंने कहा कि-: कोई भी व्यक्ति जिस की आयु 18 वर्ष या उस से अधिक हो गई है वह अपनी वसीयत करने के लिए सक्षम है। इस कारण से जो भी व्यक्ति संपत्ति रखता है उसे अपनी वसीयत जल्दी से जल्दी कर देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर दूसरी वसीयत की जा सकती है जिस से पहले वाली निरस्त हो जाती है। मेरी राय में 18 वर्ष या उस से अधिक आयु के मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्तियों को जिन के भी संपत्ति हो या जिन का धन बैंक में जमा हो या जीवन बीमा पॉलिसी अथवा अन्य सीक्योरिटीज हों उन्हें तुरन्त अपनी वसीयत आवश्यक रूप से लिख देना चाहिए। अब आप क्या सोच रहे हैं? यदि अब तक आप ने अपनी वसीयत नहीं बनाई है तो तुरन्त बना दें।
नीचे की लिंक पर पूरा आलेख पढ़ा जा सकता है। वसीयत कब और किस आयु में कर देनी चाहिए ?
इस खबर के प्रकाशित होने की सूचनाश्री महेंद्र शर्मा जीने दी है।उन्होंने लघुकथा पोस्ट पर एक टिप्पणी में बताया था कि 9 मार्च , Saturday,२०१३ को राजस्थान पत्रिका के Entrepreneurship पेपर पर 'सोच और जीवनदृष्टि' के अन्तगर्त इस blog का परिचय दिया गया था।वहीँ से लिंक ले कर वे मेरे ब्लॉग तक पहुंचे ......मेरे अनुरोध पर उन्होंने उस पेपर की कटिंग भेजी। उनको विशेष धन्यवाद।
मैं इस पोस्ट के माध्यम से पत्रिका के संपादक एवं इस लेख के लेखक को धन्यवाद देना चाहती हूँ
और आभार प्रकट करना चाहती हूँ कि उन्होंने मेरे कार्य को सराहा और प्रोत्साहन दिया।