January 29, 2017

वीरांगना रानी पद्मिनी - कल्पना नहीं इतिहास का सच है !

वीरांगना रानी पद्मावती - कल्पना नहीं इतिहास का सच है !
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फिल्म 'जागृति' का एक लोकप्रिय गीत है -'आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झांकी हिन्दुस्तान की ' ...उसमें भी राजस्थान की धरती का परिचय रानी पद्मिनी के बलिदान से दिया जा रहा है.


जिन राजपूतों के शौर्य और पराक्रम की गाथाएँ दुनिया गाती है ,आज उनके इतिहास से छेड़छाड़ की बात बहुत दुःख देती है और इस समाज की लाचारी  भी दर्शाती है कि लोकतंत्र में अपनी कुर्सी  बचाने वाले  रीढ़विहीन    प्रतिनिधि और कला के नाम पर मात्र व्यवसायिक पहलुओं को देखने वाला बड़ा वर्ग इनके स्वर को अनसुना कर रहा है.

और इसी देश में  वे लोग हैं जिन्हें इतिहास के तथ्यों से  मतलब नहीं है वे मात्र विरोधियों की हाँ में हाँ मिलाना जानते हैं.'घर फूँक तमाशा देखने वालों की तरह !'




रानी पद्मिनी जिसके बारे में आज कुछ लोग कह रहे हैं कि वह एक काल्पनिक कहानी है तो उनसे विनती  है कि जाकर राजस्थान में  चितौडगढ़ के जयगढ़ किले में देखें जहाँ भारत का प्रथम जौहर हुआ था.
यह तो सभी को ज्ञात होगा कि पहले समय में यायावर कवि काव्य -ग्रन्थ के रूप में ही गाथाएँ लिखा करते थे या लोग उनकी कही बातों को लिखकर सुरक्षित रख लिया करते थे .


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सबसे ज्यादा जौहर और साके/शाके चित्तोड़ के दुर्ग में हुए.

जिन्हें जौहर और साका के बारे में नहीं मालूम उन्हें  बताती हूँ कि जौहर और साका क्या होते हैं और ये कब -कब हुए----

जौहर -जब भी युद्ध के अनिष्ट परिणाम की आशंका होने लगती थी तब विपक्षी सेना के  व्यभिचारों से बचने हेतु अपनी पवित्रता को बनाये रखने के लिए स्त्रियाँ अपने कुल देवी देताओं कि पूजा -अर्चना के बाद तुलसी पात्र के साथ गंगाजल ग्रहण कर आग में कूद पड़ती थीं .


साका /शाका - स्त्रियों के इस बलिदान के बाद पुरुष मन में विजय की कामना करते हुए केसरिया वाटर पहनकर अपनी अंतिम साँस तक दुश्मन से लड़ते रहने का प्रण लेते हुए 'दुश्मन को मारकर मरो '  निभाते हुए अपनी जान न्योछावर कर दिया करते थे.पुरुषों का यह आत्मघाती कदम 'शाका' कहलाता था .

राजस्थान भ्रमण  के दौरान ,जहाँ यह  प्रथम जौहर हुआ वह  स्थान मैंने भी  देखा है.
राजस्थान के जौहर और साके

१,चितौडगढ़ -

यहाँ तीन साके हुए -
अ) सन १३०३ में  महाराणा रतन सिंह के शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय जब 6 महीने के लगातार युद्ध के बाद किले में खाद्य सामग्री समाप्त हो रही थी और युद्ध में अनिष्ट की आशंका थी.

रानी पद्मिनी ने १६ हज़ार क्षत्राणियों के साथ जौहर किया

आ)  सन १५३४ में राणा विक्रमादित्य के शासनकाल में जब गुजरात के सुलतान बहादुरशाह ने आक्रमण किया था .

रानी कर्मवती के नेतृत्व में जौहर हुआ.

इ)सन १५६७ में राणा  उदयसिंह के शासनकाल में जब अकबर ने उनपर आक्रमण किया था.
इस समय भी जौहर हुआ था.

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2. जैसलमेर के दो साके और जौहर हुआ लेकिन तीसरी बार जौहर नहीं मात्र साका हुआ जिसके कारण ..ये साके जैसलमेर के ढाई साके कहे जाते हैं.

पहला साका और जौहर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय  हुआ ,
दूसरा फिरोज शाह  तुगलक के  आक्रमण के समय ,
तीसरा आधा साका- १५५० ईस्वी  में  राव लूणकरण भाटी के शासनकाल में कंधार के बादशाह अमीर अली के आक्रमण के समय हुआ था.
[राव बीका के बाद  रावल  लूणकरण शासक बने ,अत्यधिक दानी प्रवृति का होने के कारण उउनको  कलियुग का कर्ण भी कहा जाता है। ]

आधा साका होने का कारण स्त्रियों के लिए जौहर की तैयारी का प्रयाप्त समय न मिल पाना ,अमीर अली ने छल से अपनी बेगमों का बहाना  बनाकर कि वे रानी से मिलना चाहती हैं ,धोखा करते हुए बेगमों के स्थान पर अपने सैनिकों को पालकी में रानियों के महल के द्वार तक पहुंचा दिया और वहां यह राज़ खुल गया ...स्त्रियों की पवित्रता की सुरक्षा करते हुए राजपूत सैनिकों ने पहले क्षत्राणियों को बलिदान किया उसके बाद स्वयं शाका किया.]

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3.रणथम्भोर  का साका -
सन १३०१ में अलाउद्दीन खिलजी ने जब हम्मीर देव  चौहान पर धोखा देकर हमला किया तब हम्मीर देव वीरगति को प्राप्त हुए एयर उनकी रानी रंगदेवी ने जौहर किया था.
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4. जालौर का साका -

सन १३११--१२ में रजा कान्हड़ देव् के शासनकाल में अला उद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ.
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5.गागरोण

  • -पहला साका -सन १४२३ में  अचलदास खिंची के शासनकाल में मांडू के सुल्तान होशंगशाह के आक्रमण के समय हुआ.
  • दूसरा साका-सन १४४४  में मांडू के सुलतान महमूद खिलजी के आक्रमण के समय हुआ.


Rani Padmawati रानी पद्मिनी  की शौर्य गाथा पढ़िए 


भंसाली की टीम को कोर्ट का नोटिस भी दिया गया था, करणी सेना ने तीन महीने का समय भी दिया था परन्तु  उनको अनदेखा कर के भंसाली टीम ने अपना काम जारी रखा क्योंकि [शायद ] उन्हें विश्वास है कि  पैसे और अपने दबदबे  के बल पर वे कोई  भी फैसला अपने पक्ष में ले सकते हैं. 
यह किसी भी भारतीय के लिए बेहद निराशाजनक और दुखद घटना है.








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=============जय राजपूताना-जय भारत ============================

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