Search This Blog

September 11, 2015

छाया-माया

प्रिय माया ,

बहुत दिनों से तुमने मुझे खुद से दूर रखा है पर यह तुम भी जानती हो कि छाया के बिना तुम भी अकेली हो.
छाया तुम्हारी अनुकृति ही तो है..तुम्हारी भावनाओं से अछूती नहीं है फिर भी तुम अँधेरे जा बैठी हो.