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February 13, 2015

प्रेम /प्यार /मोहब्बत ! आह !

प्रेम /प्यार /मोहब्बत !आह!
इस भाव के न जाने कितने नाम हैं ..
कहते हैं ,कभी बेनाम भी रह जाया करती हैं कहानियाँ जिन में ये भाव प्रमुख होते हैं ..
मगर क्या आज इस शब्द का कोई अर्थ बचा है ?क्या आज भी सच्चा प्रेम जैसा कुछ होता है?

February 2, 2015

स्वागतम शुभ स्वागतम

स्वागत गीत 


अथ स्वागतम , शुभ स्वागतम आनंद मंगल मंगलम |
नित प्रियम भारत भारतम ||

नित्य निरंतारता, नवता , मानवता, समता , ममता |
सारथी साथ मनोरथ का, जो अनिवार नहीं थमता ||

संकल्प अविजित अभिमतं | आनंद मंगल मंगलम ||

कुसुमित नई कामनायें, सुरभित नई साधनाएँ |
मैत्रिमत क्रीडांगन में , प्रमुदित बंधू  भावनाएं ||