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''यूँ तो वतन से दूर हूँ लेकिन इस की मिट्टी मुझे हमेशा अपनी ओर खींचे रहती है''

April 25, 2012

बहुमुखी प्रतिभासंपन्न होना एक शाप ...

चित्र-गूगल से साभार.
जब आप के किसी ख़ास गुण की तारीफ़ की जाती है तो सुन कर खुश होना स्वाभाविक है.
लेकिन जब आप बहमुखी प्रतिभासंपन्न हों तो आप के गुण ,आप की काबीलियत आप के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकती है!
ये मुसीबतें  इस हद्द तक बढ़ जाती हैं कि ऐसा गुणवान होना आप को एक शाप लगने लगता है.
मेरे विचार में किसी संस्था में नौकरी हेतु आप जब अपना सी.वी. देते हैं तो ध्यान रखिये ..सिर्फ उतना ही बताएँ जितना ज़रुरी है.अपनी हर उपलब्धि का बखान करना भविष्य में मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

अगर आप ने ऐसा किया तो अचानक आप को ऐसा अहसास दिलाया जाने लगेगा कि आप से अधिक योग्य और कोई नहीं ..अधिक से अधिक जिम्मेदारियाँ दी जाने लगेंगी..कहते हैं ' न' कहना भी एक कला है.अगर आप हर काम के लिए 'मैं कर लूंगा' कहते हैं तो समझिये...कि यह स्थिति अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारने से अधिक कुछ नहीं होगी!