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December 25, 2010

वक़्त कब किस का हुआ?

गीत गाता आ रहा हूँ,तुम नए विश्वास भरना,
गर्व से मैं सर उठाऊं ,तुम नया इतिहास रचना.’
कुछ ऐसे ही गुनगुनाता हर बरस नया साल आता है और जाते जाते अनगिनत कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें देता चला जाता है.
साल २०१० की विदाई भी अब नज़दीक है यह साल भी कुछ दिनों के बाद इतिहास का एक हिस्सा बन जायेगा.बीतते साल का हिसाब किताब देखूं तो लगता है इस साल में मैंने अपेक्षाकृत बहुत कुछ घटते देखा है शायद इसी ‘देखने ‘ को अनुभव पाना कहा जाता है.
कहते हैं कि हर किसी को ‘वक़्त'से डरना चाहिए ‘ऐसा लोग क्यों कहते हैं कुछ हद्द तक यह भी समझ में आया..और सच कहूँ तो पहले ही जब हम सब अनिश्चतता से घिरे रहते हैं और ऐसे में इस का बदलता बिगड़ता रूप आस पास देखने को मिले तब इस 'वक़्त 'से भी डर लगने लगता है.