July 28, 2012

बहरा राजा ,गूंगी प्रजा तो यह बलिदान किसलिए?

Team Anna is fighting for  all of us..give them support!


टी वी देख रही थी तो देखा बार -बार इसी बात पर चर्चा हो रही है या कहिये की आज का मुद्दा ही यही है चेनलों के पास कि अन्ना के अनशन में भीड़ नहीं दिख रही!
लिजीये भीड़ हो तो समस्या ..नहीं है तो समस्या!

आखिर ये सब चाहते  क्या हैं? अनशन हो रहा है किस मुद्दे को ले कर हो रहा है उस पर विचार करें न  कि अन्ना का प्रभाव कम है या अनशन की  महत्ता नहीं  रह गयी या कुछ और?
हाँ ,मीडिया का काम रह गया है बस मसालेदार खबर ढूँढना या बनाना  !


अगर भीड़ होती तो पूछते कि  भीड़ में लड़कियां की संख्या कम क्यूँ है  ?लड़कियां होती तो तो उस पर प्रश्न उठाते !
ज्यादा लोग  हैं  तो  पूछते कि  किसने इतनी बड़ी भीड़ को प्रायोजित किया !
भीड़  है तो भीड़ के होने पर बहस होती.
अब भीड़ नहीं दिखाई दे रही ...
जैसे कि भीड़ के होने न होने पर ही अनशन या प्रदर्शन की  महत्ता है अन्यथा यह सब फजूल है?
क्या भीड़ ही इस अनशन की सफलता को  मापने का यंत्र है? 

कभी सर्कसों में 'मौत का खेल 'दिखाया जाता था और किसी के जीवन -मृत्यु  को खेल बना कर भीड़ पैसे जुटाए जाते थे.
मिडिया ने भी जंतर -मंतर पर अन्ना टीम के अनशन को क्या वही  तमाशा समझ लिया  है?

बाय दी  वे ....पिछली बार भीड़ के होने से क्या हुआ?सरकार ने वही किया जो उसकी मर्ज़ी थी.
क्या आप को लगता है अब भी  केन्द्रीय शासन में बैठे किसी भी व्यक्ति को फर्क पड़ेगा?
Arvind ji with his mother.
Manish ji with his son -Fasting ka 4th day.
These pictures are from Dr.Kumar Vishwas

मेरी तो अपील है अरविन्द जी और मनीष जी से कि वे अनशन ख़तम कर दें.

किस के लिए अपनी ज़िन्दगी  दांव पर लगा रहे हैं?

जो नहीं जानते उनको मालूम होना चाहिये कि अरविन्द जी और मनीष जी दोनों ही मधुमेह के रोगी हैं .
उनके लिए यह अनशन घातक है.
ऐसे राजा जो बहरा है और ऐसी जनता जिसकी याददाश्त कमज़ोर हो गयी है.जो 'चलता है 'attitude    पर जीती है .
उनके सामने अपनी बात कहने या अपनी जान दांव पर लगाने से किस पर फर्क पड़ेगा?

आप का जीवन सभी के लिए कीमती है ,आप जन -जाग्रति के लिए काम करें जब तक यह नहीं होगी तब तक कोई कानून काम नहीं करेगा.
आप का सुझाया कानून भी आना चाहिये लेकिन किस कीमत पर?कम से कम आप जैसे कर्मठ और इमानदारों के जीवन की कीमत पर नहीं.
गुलाम भारत में देश को स्वंत्रता दिलाने के लिए कितने शहीद हुए तब यह सब के दिल में  था कि विदेशी राज है ,
एक न एक दिन ये तानाशाह अपने  मुल्क वापस जायेंगे मगर आज हम अपने ही देश में अपने 
ही अड़ियल  शासकों के आगे मजबूर हैं !

भ्रष्टाचार जो जड़ों में समाया हुआ है..इसे दूर करने के लिए अभी शायद और १०० साल लग जायेंगे .

भारत में कहने  को ही लोकतंत्र है लेकिन सच्चे अर्थों में शायद अब भी नहीं है.
लोकतंत्र के अर्थ को जनता को समझना है और सही उम्मीदवार चुनकर भेजने हैं.
मैं ने आज ही कहीं पढ़ा है कि 'लोर्ड माउन्टबेटन ने जाते समय गांधी जी से पूछा  था कि 
आजादी के बाद क्या करोगे गांधी जी ने कहा लोकतंत्र लाऊंगा तो माउन्टबेटन ने हंस कर कहा था 
कि २०० साल लगेंगे हिंदुस्तानियों को लोकतंत्र को समझने में !

अन्ना टीम से अनुरोध है कि अनशन का रास्ता छोड़ कर अगले चुनावों ले लिए लोगों को तैयार करें और सही उम्मेदवार चुनने में लोगों की  सहायता करें.
आज हम आम जनता को  अन्ना टीम के मार्गदर्शन की सख्त ज़रूरत है .

मीडिया से अनुरोध है कि संवेदनशील बने !

देश के कल के अच्छे भविष्य के लिए आज जनलोकपाल आना ज़रूरी है लेकिन किसी की जान की कीमत पर नहीं ! इस बलिदान की ज़रूरत नहीं है.भारत में  सभी आप सभी के जीवन की आवश्यकता है .
Manish ji,Anna,Arvind ji
हो सकता है मेरी सोच  आप में से कई बुद्दिजीवियों  को अपरिपक्व लगती होगी लेकिन इंसानियत के नाते मेरी जैसी ही सोच बहुत से आम जन की होगी.इसलिए यह अपील यहाँ अन्ना टीम से कर रही हूँ .
पाठकों  का मेरी बात से सहमत होना न होना मेरी इस अपील को प्रभावित नहीं करेगा.

19 comments:

संतोष त्रिवेदी said...

आपसे सहमत हूँ !

वन्दना अवस्थी दुबे said...

सही है अल्पना जी, बहरे राजा से क्या फ़रियाद करना???

Sandeep Ruhela said...

आपसे सहमत हूँ 100%
!

प्रकाश गोविन्द said...

जो बुद्धिजीवी यह बात कह रहे हैं कि अन्ना फेल हो गए .... इस बार फल नहीं हुए ------ उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि अन्ना यह आन्दोलन कर किसके लिए रहे हैं ?

असफल हुयी है देश की संसद !
असफल हुयी हैं राजनैतिक पार्टियाँ !!
असफल अन्ना नहीं बल्कि हम हुए हैं !!!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

चीख निकली तो है होंठों से मगर मद्धम है,
बंद कमरों तक सुनाई नहीं जाने वाली।

रचना दीक्षित said...

अल्पना जी पूरी तरह सहमत हूँ आपके विचारों से. सब मिलकर ही इस प्रयास को सफल कर सकते हैं.

dr.mahendrag said...

Neta jan bhoojh kar bahre ho gayen haen,jo bhrastachar ki seedhi chadh kar shikhar par pahunchen haen woh us seedhi ko kaise mita sakte haen,JAROORAT JANTA KO HAE AUR WOHI APNE PANWV PEECHE KHINCH RAHI HAE,LANAT HAE HUMEN,ANNA NE HAMEN APNA CHERA DIKHA DIYA HAE KI HUM KITNE KAYER,AUR KITNE MATLABI HAEN.

ताऊ रामपुरिया said...

भारतीय इलेक्ट्रोनिक मिडिया चेनलों की हर जरा सी बात ब्रेकिंग न्य़ुज होती है. ये अपना आधा समय इनमें जाया करते हैं. पच्चीस प्रतिशत समय बाबाओं की किरपा जनता पर करवा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं और बाकी बचा पच्चीस प्रतिशत विज्ञापनों से कमाई करते हैं. इनकी तो किसी कहर का कोई मतलब ही नही होता.

अन्ना जी के आंदोलन के बारे में आपकी राय भी सही लगती है. अगर चुनाव सुधार के जरिये कार्य किया जाये तो ये पोलिटिशियन इतने बडे ताऊ हैं कि किसी को टिकने नही देंगे. इसका उदाहरण अभी मिडिया द्वारा कम भीड बताकर आंदोलन की हवा निकालना ही था जो कि इन ताऊओं द्वारा रचा गया षडयंत्र ही होगा.

अन्नाजी और उनकी टीम ने जो रास्ता पकडा है वो दूरुह तो लगता है पर मेरी अपनी राय में शायद कुछ जागृति आये और जनता उठ खडी हो.

इस विचारोतेजक आलेख के लिये बहुत शुभकामनाएं.

रामराम

ताऊ रामपुरिया said...

भूल सुधार :-

कहर = खबर

पढा जाये.

रामराम.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

bahut hee accha sujhab diya hai aape apne is aalekh ke madhyam se..main bhee aapke bicaron se purntaya sahmat hoon..sadar badhayee aaur sadar amantran ke sath

manoj agrawal said...

koshish karo
koshish karo
koshish karo
jine ki
jamin me gadkar bhi.

सदा said...

बिल्‍कुल सही कहा है आपने ... सार्थकता लिए सटीक लेखन .. आभार

anshumala said...

इस बहरे राजा से फरियाद कौन कर रहा है , अब तो इसके कान हर हाल में खोलना है |

Kunwar Kusumesh said...

Don't worry,nature does something when the man becomes helpless. Corruption will come to end one day.

P.N. Subramanian said...

तहे दिल से पूर्ण समर्थन. मुझे गर्व है आप की सोच पर.

राजेश सिंह said...

आपकी अपील से मैं व्यक्तिगत तौर पर पूरी तरह सहमत हूँ ऐसे सभी लोगो को अगले चुनाव की तैयारी करनी अगर सब चलता है जैसी सोच वाले लोग चुनकर आते और सरकार बनाते रहेंगे तब तक ऐसे अनशनों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा.इस सिस्टम के अन्दर घुसकर प्रहार करने ही किले की दीवारों में बंद यह रावन का वध संभव है

निवेदिता श्रीवास्तव said...

समस्या भीड़ का होना अथवा न होना नहीं है ,समस्या तो सिर्फ यही है कि टी . वी . में दिखाया क्या जाए ....... असली मुद्दे को इस तरह की निरर्थक बातों में दफ़न कर दिया जाता है ......

Arvind Mishra said...

बिलकुल सहमत हैं आपके विचार से -यह सरकार और भेड़ जनता एक दूसरे को डिजर्व करते हैं ...
नाहक ही अन्ना .केजरीवाल और अन्य अपनी जान गँवा देगें और सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा ...
चुनाव में आयें ..कांग्रेस को उसकी औकात दिखा दें इस बार

ePandit said...

आपसे सहमति है।

सूचना

मेरी जानकारी और अनुमति के बिना इस ब्लॉग से ली गई मेरी लिखित सामग्री ,मेरी एवं मेरे द्वारा खींची गयी तस्वीरों का उपयोग करना कॉपीराइट का उलंघन होगा.
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-अल्पना