हर तरफ़ आज कल जैसा देश में माहौल है ,लेखों में कविताओं में भारत में वर्तमान स्थिति पर चिंताएँ जताई जा रही हैं.
इसी विषय पर मैं अपने भाई श्री प्रदीप शिशौदिया जी
की कविता जो दिल्ली से प्रकाशित
एक पत्रिका में छपी थी और इस कविता पर उन्हें हिन्दी दिवस पर पुरस्कार भी मिला था..
उन से अनुमति ले कर यहाँ अपने ब्लॉग पर पोस्ट कर रही हूँ.
आशा है, आप भी सकारात्मक सोच की इस कविता को पसंद करेंगे .
'परिवर्तन आएगा '
-------------------
वह कहते हैं परिवर्तन आएगा,
हाँ,शायद परिवर्तन आएगा,
टूटी कड़ियों को फिर से जोड़ा जाएगा,
उन्हें उम्मीद है परिवर्तन आयेगा .
अब परिवर्तन आवश्यक है
विचारों की आवश्यकता से,
अनुशासन की आवश्यकता से ,
स्वच्छ मानसिकता की आवश्यकता से ,
हाँ ,इन सब की आवश्यकता से ,एक भौतिक बदलाव आएगा.
हाँ ,जब वह कहते हैं कि बदलाव आयेगा,
तो आशा होती है कि बदलाव आएगा.
सरकारी दफ्तरों में सही आचरण से जो परिवर्तन की लहर उठेगी.
भ्रष्टाचारियों के मरण से जो परिवर्तित हवा चलेगी .
तो ,चौराहों के मुख बदलेंगे ,
कर्मचारी रिश्वत नहीं लेंगे,
शहीदों का फिर होगा सम्मान,
नेता जनहित कार्य करेंगे.
स्पष्टवादिता का युग आएगा ,
फाईलें भारी नहीं होंगी,
दूध में निरमा नहीं होगा,
आदमी तब निकम्मा नहीं होगा,
नियत खोटी नहीं होगी,
संसाधनों की कमी नहीं होगी,
हँसी खुशी की हर और होगी.
लगता है ना..रामराज्य आयेगा?
हाँ, शायद लगता है की परिवर्तन अवश्य आएगा.
घुमड़ घुमड़ कर फिर प्रश्न यही है
मित्र!परिवर्तन कौन लायेगा?
मैं फिर यही कहता हूँ ,
जो लाया है यह स्थिति,बदलाव भी वोही लाएगा.
हाँ ,हमें ही बदलना होगा,
उतरना होगा खरा
उनकी,अपनी,सब की आशा पर,
संस्कार.संस्कृतमय भारतवर्ष को फिर से ,
ज्ञानमय ,विज्ञानमय विकसित करेंगे.
भ्रष्टाचार मिटा कर, सदैव सत्यमेव जयते कहेंगे.
तब सब वास्तव में यही कहेंगे...
जी हाँ,बदल रहा है भारत !
सच ही तो है...आएगा परिवर्तन आएगा!
इसी विषय पर मैं अपने भाई श्री प्रदीप शिशौदिया जी
एक पत्रिका में छपी थी और इस कविता पर उन्हें हिन्दी दिवस पर पुरस्कार भी मिला था..
उन से अनुमति ले कर यहाँ अपने ब्लॉग पर पोस्ट कर रही हूँ.
आशा है, आप भी सकारात्मक सोच की इस कविता को पसंद करेंगे .
'परिवर्तन आएगा '
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वह कहते हैं परिवर्तन आएगा,
हाँ,शायद परिवर्तन आएगा,
टूटी कड़ियों को फिर से जोड़ा जाएगा,
उन्हें उम्मीद है परिवर्तन आयेगा .
अब परिवर्तन आवश्यक है
विचारों की आवश्यकता से,
अनुशासन की आवश्यकता से ,
स्वच्छ मानसिकता की आवश्यकता से ,
हाँ ,इन सब की आवश्यकता से ,एक भौतिक बदलाव आएगा.
हाँ ,जब वह कहते हैं कि बदलाव आयेगा,
तो आशा होती है कि बदलाव आएगा.
सरकारी दफ्तरों में सही आचरण से जो परिवर्तन की लहर उठेगी.
भ्रष्टाचारियों के मरण से जो परिवर्तित हवा चलेगी .
तो ,चौराहों के मुख बदलेंगे ,
कर्मचारी रिश्वत नहीं लेंगे,
शहीदों का फिर होगा सम्मान,
नेता जनहित कार्य करेंगे.
स्पष्टवादिता का युग आएगा ,
फाईलें भारी नहीं होंगी,
दूध में निरमा नहीं होगा,
आदमी तब निकम्मा नहीं होगा,
नियत खोटी नहीं होगी,
संसाधनों की कमी नहीं होगी,
हँसी खुशी की हर और होगी.
लगता है ना..रामराज्य आयेगा?
हाँ, शायद लगता है की परिवर्तन अवश्य आएगा.
घुमड़ घुमड़ कर फिर प्रश्न यही है
मित्र!परिवर्तन कौन लायेगा?
मैं फिर यही कहता हूँ ,
जो लाया है यह स्थिति,बदलाव भी वोही लाएगा.
हाँ ,हमें ही बदलना होगा,
उतरना होगा खरा
उनकी,अपनी,सब की आशा पर,
संस्कार.संस्कृतमय भारतवर्ष को फिर से ,
ज्ञानमय ,विज्ञानमय विकसित करेंगे.
भ्रष्टाचार मिटा कर, सदैव सत्यमेव जयते कहेंगे.
तब सब वास्तव में यही कहेंगे...
जी हाँ,बदल रहा है भारत !
सच ही तो है...आएगा परिवर्तन आएगा!
[--श्री प्रदीप शिशौदिया द्वारा लिखित ]

55 comments:
परिवर्तन अवश्य ही आएगा. इसी आशा में तो हम जी रहे हैं. अत्यधिक प्रभावशाली कविता. आभार.
http://mallar.wordpress.com
हाँ ,हमें ही बदलना होगा,
उतरना होगा खरा
उनकी,अपनी,सब की आशा पर,
संस्कार.संस्कृतमय भारतवर्ष को फिर से ,
ज्ञानमय ,विज्ञानमय विकसित करेंगे.
प्रभावशाली कविता
श्री प्रदीप शिशौदिया जी ने जो कविता के मध्यम से एक सपना देखा और पढ़ने के बाद हर वो शख्स देखेगा परिवर्तन केलिए जो जरुरी है एक विकाश शील देश के लिए जहाँ भ्रस्ताचार ब्याप्त है ,बहोत खुलke लिखा है प्रदीप जी ने उनके साथ साथ आपको भी ढेरो बधाई जो आपने इतने बढ़िया कविता पढ़वाया ...बहोत ही उम्दा लेखन
हाँ ,जब वह कहते हैं कि बदलाव आयेगा,
तो आशा होती है कि बदलाव आएगा.
सरकारी दफ्तरों में सही आचरण से जो परिवर्तन की लहर उठेगी.
भ्रष्टाचारियों के मरण से जो परिवर्तित हवा चलेगी .
तो ,चौराहों के मुख बदलेंगे ,
कर्मचारी रिश्वत नहीं लेंगे,
शहीदों का फिर होगा सम्मान,
नेता जनहित कार्य करेंगे.
sach badi sahi baat kahi hai kavi ne kavita mein,aashavadi rachana,ek nayi umang si bhar deti hai dil mein.ek behtarin kavita se rubaru karane ke liye shukran
हम भी इंतजार कर रहे हैं भाई इस परिवर्तन का। सकारात्मक दृष्टिकोण युक्त अच्छी कविता।
परिवर्तन आएगा!
काश ऐसा होता..सुंदर कविता
संस्कार.संस्कृतमय भारतवर्ष को फिर से ,
ज्ञानमय ,विज्ञानमय विकसित करेंगे.
श्री प्रदीप शिशौदिया जी की कल्पना का भारत अवश्य बनेगा ! उनको इस सपने के लिए हार्दिक बधाई और उनकी इतनी सशक्त रचना पढ़वाने के लिए आपका आभार ! शुभकामनाएं !
Change ...has begun Alpana jee ..nice poem Thanx for sharing it.
warm rgds,
- L
लेकिन कब आयेगा, अभी तक तो कोई आश की किरण नही दिखाई देती, ओर ना ही निकट भविष्या मै,आये गा नही जब हम सब मिल कर लायेगे तभी आयेगा.
कविता बहुत सुन्दर है, एक उम्मीद जगाती है, लेकिन जिन्दगी उम्मीद के सहारे नही चलती, मेहनत तो करनी ही पडती है.
धन्यवाद
परिवर्तन के लिए जितने जतन से अपने लेखन किया है , उस के लिए आप बधाई की पात्र है / आप का परिवर्तन का सपना कभी न कभी पूरा जरुर होगा /
आप की अमूल्य सलाह से अपने ब्लॉग से वर्ड वेरिफिकेशन हटा दिया है आप पुनः आमंतरित है
वाकई आपने बहुत बढिया रचना प्रस्तुत की .
आशा का संचार होगा और परिवर्तन का सपना साकार होगा
अल्पना जी आपको श्री शिशौदिया जी की इस सुंदर आशावादी कविता पढ़वाने के लिए धन्यवाद।
अल्पना जी मैं चाहता हूं कि इस कविता को अपनी आवाज़ दूं।
मैं इसे बोलता चिट्ठा ब्लॉग में प्रकाशित करना चाहुंगा। कृपा कर मुझे बताएं कि लेखक जी से कैसे संपर्क किया जा सकता है। उनसे पत्र व्यवहार के लिए उनकी ई-मेल आइडी देने की कृपा करें या अन्य समाधान बताएं।
आप उनकी मेल को aadarshrathore@gmail.com पर मेल करें।
धन्यवाद
shabdo ka ganit ...bahut achcha likha hai apne aur aap achcha gati hain.-
dr.jaya
स्पष्टवादिता का युग आएगा ,
फाईलें भारी नहीं होंगी,
दूध में निरमा नहीं होगा,
आदमी तब निकम्मा नहीं होगा,
नियत खोटी नहीं होगी,
संसाधनों की कमी नहीं होगी,
हँसी खुशी की हर और होगी.
लगता है ना..रामराज्य आयेगा?
काश ऐसा हम सब के सामने जल्दी होता नहीं तो संस्कृत साहित्य का इक श्लोक कारगर हो जाएगा .
रात्रिर गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं ,भाष्वानु देश्यति हसस्यति पंक्जालिः |
इथ्याम विचारयति कोष गते द्वरेफे,हा हन्त हन्त नलिनीम गज उज्जहार: ||
आशा ही जीवन है .हम सभी को उस स्वर्णयुग का इन्तजार है .बेहतर रचना के लिए आप को और रचनाकार को बधाई .
परिवर्तन आयेगा, आना ही है। पर गड्डमड्ड तरीके से आयेगा। और सदा खुशनुमा तरीके से नहीं आता।
parivartan aana hi chahiye...
wakai mein bahut hi prabhavshali rachna..
भ्रष्टाचार मिटा कर, सदैव सत्यमेव जयते कहेंगे.
तब सब वास्तव में यही कहेंगे...
जी हाँ,बदल रहा है भारत !
सच ही तो है...आएगा परिवर्तन आएगा!
bahut sunder kavita
regards
जी बिल्कुल सहमति है, बहुत अच्छी रचना है!
sabse pehley to Alpna ji ko koti koti dhanyawad aur saath mein aap sab ka aabhar ki aap sab ko "parivartan ki meri pratiksha" ka aabhass mila. meri aur bhi aashawadi kavitayen hain lekh hain jo ki samay samay par prakashit hotey rahe hain. Ho saka to Maein Alpna behanji se phir anurodh karoonga ke unko isi blog par ek esthan de kar sammanit karen. Itna to awashya hai bandhu jitna prayas hum karengey utna is samaj ko badla ja sakta hai. aur agar hum na badley to aney wali pidiyan hamey hee doshi maneyngi.
ant mein phir se aap sab ka dhanyawad...aapka pradeep ( mujhey hindi mein type karna nahin aata aath es tarah likha hai)
हाँ, शायद लगता है की परिवर्तन अवश्य आएगा.
घुमड़ घुमड़ कर फिर प्रश्न यही है
मित्र!परिवर्तन कौन लायेगा?
मैं फिर यही कहता हूँ ,
जो लाया है यह स्थिति,बदलाव भी वोही लाएगा
" very motivating and inspiring poem"
Regards
आप सभी गुनिजनो का तहे दिल से धन्यवाद जो आप ने इस कविता को सराहा.
वास्तव में हर कोई चाहता है कि हर और खुश-हाली हो ,
इस उद्देश्य को पाने के लिए किस और जायें इस का सही रास्ता मिल नहीं पाता.
प्रदीप जी आशा करते हैं कि यह परिवर्तन जरुर आएगा.
आप सब युवाजनों के मन में अगर ऐसी भावनाएं आ जायें तो समझिये हम उस राह पर चलना शुरू हो गए हैं.
@आदर्श जी आप का मेसेज प्रदीप जी ने पढ़ लिया होगा.
आभार सहित-अल्पना
तुझे पाकर ज़माने की खुशी पाई है पाई है .. पुरी तरह से सुर में था मगर आप अन्यथा न ले जिज्ञासा और जागरूकता की दाद देता हूँ बहोत मेहनत किया है आपने ,कुछ jagah पे आप पुरी तरह से सुर में नही थी आपकी आवाज़ मध्यम lay में अच्छा चलती है ,तीब्र से जब आप टूट के मध्यम में आती है तो सुर से विचलित हो जाती है मगर आपका सहस और प्रयास उम्दा है ,अगर मेरी सलाह आप मने तो मध्यम lay के कुछ गीत आप गaye आपकी आवाज़ में सटीक होगा ........ मेरी टिपण्णी को अन्यथा ना ले अल्पना जी,बस ये कहूँगा के मुझे aapko सुनना अच्छा लगता है ........
इस कविता में आ गई, देश के दिल की बात.
परिवर्तन तो आयेगा, यह निश्चित है बात.
है यह निश्चित बात,प्रभु की यही है मर्जी.
पहुँच रही है उसतक, हम सबकी यह अर्जी.
कह साधक कवि, अन्दर-अन्दर आग जल रही.
देश के दिल की बात,इस कविता में आ गई.
वाह! अल्पना जी बड़ी आसानी से और सरल भावः प्रकट करते हुए आपने अपनी बात कहे दी.......
परिवर्तन जरुरी है ये बात हमको माननी पड़ेगी और होगा भी इसका विश्वास भी रखना होगा खुद के आस-पास ही देखना होगा की क्या गलत है क्या सही है उसे देखते हुए खुद को ही कदम उठाने होंगे पहेले ये देखना उसको नज़रंदाज़ नहीं करना ये परिवर्तन हमें खुद में लाना होगा तभी ये परिवर्तन संभव हैं आपकी रचना सार्थक और बहुत ही बढ़िया है मेरी शुभकामनाये स्वीकार करें....... मेरे ब्लॉग पर हार्दिक आपका स्वागत है आने के लिए
आप
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑ इस पर क्लिक कीजिए
आभार...अक्षय-मन
kassh!kabhi aisa ho jaye.
achchha hai.
sunder ... bahut khoob...
aapke blog par bahut deir tak rukna achchha lagaa...aapke gaaye geet bhi sunay...bahut hi madhur awaaz hai aapki...agar gayaki ko thoda gambhirta se lein toh mujhe umeed hai ki aap apne liye eik khaas sthaan banaa lengi...
merii samast shubhkaamnayein hein aapke liye...
Pramod Kush
http://binnewslive.com
Thanks Alpana for visiting my blog....Wish u great luck in music too...
आपको और प्रदीप जी को मुबारक बाद /मैं अहसानमंद हूँ जो आपने मेरे मामूली से प्रश्न का एक पोस्ट के रूप में उत्तर दिया -कल्पना में भी न सोचा था कि चंद लाइनों में इतना गूढ़ भावार्थ छुपा होगा /आपने ये भी महसूस किया होगा कि [आपके स्पष्टीकरण पर जो टिप्पणी आयी है ] मेरा प्रश्न मूर्खता पूर्ण नहीं था /एक वास्तविक जिज्ञासा थी /शायद कोई और होता तो उसे मूर्खता पूर्ण प्रश्न समझ क़र नज़रंदाज़ क़र सकता था मगर आपने एक अल्पग्य के मामूली प्रश्न को महत्त्व दिया और अगर अन्य विद्वान् बुरा न मानें तो यह भी कहूँगा कि मेरे साथ कई लोगों की जिज्ञासा शांत हुई होगी /आज मै अपने प्रश्न पर गौरान्वित हूँ कि जिसने अनेक पाठकों को लाभ पहुचाया
... कवि व आप दोनों बधाई के पात्र हैं,वास्तव में बहुत ही जानदार-शानदार रचना है। हमें भी परिवर्तन की चाह है, आपके साथ हम भी कदम बढा रहे हैं।
yes!change is the only permanent event.
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। यह हमेशा आता है, और आएगा भी। पर यह सबको पसंद आए, यह जरूरी नहीं होता।
वैसे इस विचारोत्तेजक कविता को पढवाने का शुक्रिया।
हाँ ,हमें ही बदलना होगा,
उतरना होगा खरा
उनकी,अपनी,सब की आशा पर,
संस्कार.संस्कृतमय भारतवर्ष को फिर से ,
ज्ञानमय ,विज्ञानमय विकसित करेंगे
अच्छी कविता है लेखक को तो धन्यवाद है ही आपको भी कि आपने इस कविता से हम सबको मुखातिब कराया.
अब परिवर्तन आवश्यक है
विचारों की आवश्यकता से,
अनुशासन की आवश्यकता से ,
स्वच्छ मानसिकता की आवश्यकता से ,
हाँ ,इन सब की आवश्यकता से ,एक भौतिक बदलाव आएगा.
अल्पना वर्मा जी!
आपकी यह पोस्ट को विलम्ब से कमेन्ट दे रहा हु ।
कारण राजस्थान चुनावो मे व्यस्थ हु। क्षमा स्वीकारे।
"अब परिवर्तन आवश्यक",- इससे इस निष्कर्ष पर पहुचते है कि व्यक्ति, समाज, राष्ट्र के परिवर्तन एवम निर्माण मे चेतना, प्रेरणा और रचनात्मक क्रान्ति कि चिन्गारी का अपने आप मे बडा ही महत्व है। व्यक्ति कि विचार क्रान्ति भी विश्व एवम राष्ट्र मे आमुलचुल परिवर्तन क्रान्ती की हेतु बन सकती है। रचनात्मक दृष्टि से आपकि कविता मे वो ताकत है, एक उम्मीद की किरण है- आपकी कविता मे।
काश ऐसा हो तो------ राष्ट्र मे कुविचारों,कुशासन, खराब मानसिकता, भौतिकता ,सरकारी दफ्तरों मे भ्रष्टाचार, भ्रष्ट् कर्मचारीयो, भ्रष्ट् नेताओ, भ्रष्ट्आदमीयो, खराब नियत, बैकार पडे संसाधनों, का खात्मा हो और परिवर्तन कि लहर पैदा कर ने मे आपके विचार सक्षम हो। बहुत मगल भावना।
आपको आमन्त्रण मेरे ब्लोगस पर आये एवम चिट्ठे के टीकाकारो - टीप्पणी करो, पर CONDITIONS APPLY ? आलेख पर विचार दे। मगलमय शुभकामनाओ सहित।
"हे प्रभु यह तेरापन्थ"... पर HEY PRABHU YEH TERA PATH
वाह बहुत खूब लिखा है आपने.
नमस्कार, उम्मीद है की आप स्वस्थ एवं कुशल होंगे.
मैं कुछ दिनों के लिए गोवा गया हुआ था, इसलिए कुछ समय के लिए ब्लाग जगत से कट गया था. आब नियामत रूप से आता रहूँगा.
इसी उम्मीद पर शायद कही ये देश टिका हुआ है ओर कुछ लोग है जो इस उम्मीद को जिंदा रखे हुए है ......आशा करता हूँ कवि की उम्मीद पूरी होगी ..साहिर की वो नज़्म याद आती है ....वो सुबह कभी तो आयेगी ....
Nice Presentation !!
Nice Presentation !!
बहुत ही सुंदर और प्रेरणास्पद कविता
Pradip ji ki itni sundar kavita uplabdh karane ka dhanyawad. Hamein bhi intejar hai parivartan ki us subah ka.
बहुत सुन्दर कविता पढ़वाई आपने अल्पना जी. परिवर्तन ज़रूर आएगा. बहुत आभार आपका.
yes change we need, yes change we can bring, first we have to started from ourselves
good one
take care
आशा ही जीवन है!!!!!!!!!!!!
वो सुबह कभी तो आयेगी???????
Jo laya hai yeh stithi ...badlaav bhi vohi layega...yatharthvadi rachna hai....badhai..
मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑
आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
अक्षय-मन
प्रदीप जी के सपने को ईश्वर मूर्त-रूप प्रदान करे ताकि सभी देशवासी खुशहाल रह सकें।
अभी कल तक यानी 29 नवंबर तक पाकिस्तानी आतंकियों ने मुम्बई मे जो उत्पात मचा रखा था…उससे थोडा विचलित ज़रूर हूं…और शायद कुछ टूटा हुआ भी…इसलिये मेरी टिप्पदी मे आज ईमानदारी नही है…
आप सगीत का शौक रखती हैं…ये भी अच्छा है,
खैर्॥अब चलता हूं…नेताओं पर भडास जो निकालनी है…
शुभरात्रि
:-)
Bahut badiya likha hai, jarur aayega parivartan.
aap sabhi ka tahey dil se kavita pasand akr ne ke liye dhnywaad.aap sabhi ki shubhkamnayen lekhak tak pahuncha dijayengi.
@Akshay mann--aap ke blog par tippani 3-4 baar post karne ka try kiya-magar post nahin hoti hai-kripya check karen.
हम भी यही आशा कर रहें है कि परिवर्तन आयेगा।
Sakaratmak parivartan ki vaastav me jarurat hai.
Dear Alpana,
I am back in MElbourne and was wondering if we can start working on the songs. Please mail me at :
cfdmodeler-dhool@yahoo.com
Thanks
Murali Venkatraman
वो कहते हैं ना..........
दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है....
इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है..
.......हाँ परिवर्तन तो आए....भले ही क़यामत के रूप में.....
"nazren jo badli nazare badl gaye
kasti jo badli kinare badl gaye"
ha..........jis sakaratmak soch ki hum baat kartain hai yadi use nibha lein to parivartan ..
......................nishchit hi aayega.
बहुत ही सुन्दर रचना...सब्दों को बड़ी ही कुशलता से काव्य मंजूषा में पिरोया है..
शुभकामनाएं...
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